डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर करके कहा गया है कि अयोग्य कानूनी पेशेवर जमीन विवादों पर फैसले दे रहे हैं, लिहाजा इसके लिए राजस्व न्याय सेवा की स्थापना की जाए। साथ ही ऐसे मामलों पर फैसला सुनाने वाले राजस्व अधिकारियों के लिए न्यूनतम कानूनी योग्यता और हाई कोर्टों के परामर्श से ट्रेनिंग मॉड्यूल निर्धारित किया जाए।
वकील अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि लगभग 66 प्रतिशत दीवानी मामले जमीन विवादों से जुड़े होते हैं और इसमें मुख्य खामी यह है कि इन पर ऐसे अधिकारी फैसला दे रहे हैं जिनके पास औपचारिक कानूनी शिक्षा और प्रशिक्षण नहीं है। इसकी वजह से गलत और असंगत फैसले आ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई दो अप्रैल को कर सकता है।
वकील अश्वनी दुबे द्वारा तैयार याचिका में कहा गया है कि इस मुद्दे पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विचार किया था, लेकिन उसके निर्देशों को आज तक पूरी तरह से लागू नहीं किया गया है।
याचिका के मुताबिक, वर्तमान व्यवस्था से संपत्ति के अधिकारों को लेकर लंबे समय तक अनिश्चितता बनी रहती है, जमीन के इस्तेमाल व हस्तांतरण पर रोक लगी रहती है, मुकदमों व खर्चों में बढ़ोतरी होती है और न्याय तक प्रभावी पहुंच से वंचित होना पड़ता है। इस प्रकार यह संविधान के अनुच्छेद-14 और 21 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)