जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। हर घर नल जल पहुंचाने के लिए शुरू किए जल जीवन मिशन के अधूरे प्रोजेक्टों को पूरा करने और जल आपूर्ति की व्यवस्था को स्थाई रूप देने के लिए भले ही केंद्र सरकार ने नए चरण को मंजूरी दी है और इसके लिए 1.51 लाख करोड़ की राशि जारी की है। लेकिन अब तक 20 से अधिक राज्य नए चरण से जुड़ने को लेकर असमंजस में है। उन्होंने अब तक मिशन से जुड़ने के किए केंद्र से साथ जरूरी करार भी नहीं किए है।
इन राज्यों में बिहार, कर्नाटक, तमिलनाडु, बंगाल व झारखंड जैसे प्रमुख राज्य शामिल है।राज्यों के इस रवैए के बाद भी जल शक्ति मंत्रालय इन सभी राज्यों को मिशन से जोड़ने के लिए चर्चा कर रहा है। सूत्रों की मानें तो इनमें से कुछ राज्य सहमत हो गए है, ऐसे में जल्द ही इनके साथ करार हो सकता है।
मिशन के नए चरण का मुख्य फोकस
वहीं, मिशन के इस नए चरण के तहत अब तक जिन 12 राज्यों के साथ करार हो चुका है, उनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गोवा, राजस्थान, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, मेघालय, हरियाणा व छत्तीसगढ़ शामिल है।
इनमें उत्तर प्रदेश व महाराष्ट्र जैसे राज्यों को वित्तीय मदद भी जारी कर दी गई है। मिशन के नए चरण का मुख्य फोकस केवल पानी पहुंचाने तक सीमित नहीं है बल्कि जल आपूर्ति की गुणवत्ता, प्रबंधन और डिजिटल मैपिंग पर भी किया गया है।
2028 तक हर घर को नल जल
मिशन जुड़े सूत्रों के मुताबिक अब राज्यों के असमंजस के पीछे मुख्य वजह वह करार है, जिसके तहत उन्हें वर्ष 2028 तक हर घर को नल जल देना सुनिश्चित करना होगा। साथ ही पानी की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने व नल जल योजनाओं की देखरेख और प्रबंधन के लिए एक तंत्र खड़ा करने जैसे लक्ष्य है।
राज्यों का कहना है कि इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए जो खर्च आएगा, वहीं उन्हें दी जा रही राशि से काफी कम है। वैसे भी प्रत्येक राज्य की भौगोलिक परिस्थितियां अलग-अलग है। ऐसे में सभी को एक जैसे मानकों के दायरे में रखना ठीक नहीं है।