जागरण संवाददाता, जयपुर। राजस्थान में जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले की जांच कर रहे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बुधवार देर शाम फरार आइएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया है। इस मामले में मंगलवार को पकड़े गए नौ आरोपितों को अदालत ने तीन दिन के रिमांड पर भेज दिया है।
एसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने बताया कि इस मामले में 2024 में दर्ज प्रकरण में मंगलवार को 15 टीमों ने जलदाय विभाग के दस वर्तमान और सेवानिवृत्त अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। इनमें से एक आरोपित को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से पकड़ा गया है।
वर्ष 2022-23 में हुए 900 करोड़ रुपये से अधिक के इस घोटाले में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में जलदाय मंत्री महेश जोशी सहित तीन दर्जन अधिकारी और ठेकेदार पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। अब भी जांच के दायरे में 170 अधिकारी, इंजीनियर और ठेकेदार हैं।
एसीबी की जांच में हरियाणा जलदाय विभाग के कुछ अधिकारियों की भी संलिप्तता सामने आई है, जिन्होंने ठेकेदारों को फर्जीवाड़े में मदद की थी। ठेकेदारों ने हरियाणा से चुराए गए, जंग लगे और कम गुणवत्ता वाले पाइप ग्रामीण क्षेत्रों में बिछा दिए थे।
कुछ क्षेत्रों में बिछाए गए पाइप हरियाणा और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के कबाड़ियों से खरीदे गए थे, जिन्हें मरम्मत कर बिछाया गया था। अधिकारियों ने बिना ट्यूबवैल खोले और गुणवत्ता की जांच किए ठेकेदारों को भुगतान कर दिया।
राज्य के जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी ने कहा है कि इस मामले में हरियाणा सरकार से बातचीत की जाएगी। उल्लेखनीय है कि कई क्षेत्रों में बिना पाइप लाइन बिछाए ही बिल उठाए गए थे, जिसके बदले ठेकेदारों ने अधिकारियों को रिश्वत दी थी।
जेजेएम के तहत राज्य के 22 जिलों में पाइप लाइन बिछाई जानी थी, लेकिन सबसे अधिक फर्जीवाड़ा सीमावर्ती जैसलमेर, बाड़मेर, अलवर, दौसा, जयपुर, उदयपुर, बांसवाड़ा, सीकर और जालौर जिलों में हुआ है।
जांच में सामने आया है कि जयपुर की दो फर्मों श्रीश्याम ट्यूबवैल कंपनी के मालिक पदमचंद जैन और गणपति ट्यूबवैल कंपनी के मालिक महेश मित्तल ने हरियाणा के अधिकारियों की मिलीभगत से चोरी किए गए पाइप राजस्थान लाकर बिछाए थे। दोनों कंपनियों ने फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर कई जिलों में पाइप लाइन बिछाने के ठेके लिए थे।