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‘जस्टिस वर्मा पर क्यों नहीं दर्ज की गई FIR’, महेश जेठमलानी से उठाए सवाल

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Sep 15, 2026


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। जाने-माने वकील हरीश साल्वे और महेश जेठमलानी ने सोमवार को न्यायपालिका में बदलाव की वकालत की, जैसा कि इमरजेंसी के बाद हुआ था। उन्होंने कहा कि लोगों का इस संस्था पर भरोसा बनाए रखने के लिए शिकायतों के निपटारे के सिस्टम में सुधार की जरूरत है।

पिछले साल मार्च में जस्टिस यशवंत वर्मा के घर पर जलते हुए कैश मिलने की घटना का जिक्र करते हुए जेठमलानी ने पूछा कि FIR क्यों नहीं दर्ज की गई, जबकि जज ने बार-बार सुप्रीम कोर्ट से जांच रद करने की मांग की थी।

जेठमलानी ने कहा कि न्यायपालिका के कामकाज में पारदर्शिता लाने की बहुत जरूरत है। साल्वे ने पूछा कि अगर किसी मंत्री के घर पर ऐसी घटना होती, तो क्या वे FIR से बच पाते? अगर न्यायपालिका से बाहर के किसी व्यक्ति के घर पर ऐसी घटना की रिपोर्ट पर जनहित याचिका दायर की जाती, तो न्यायपालिका का क्या रुख होता?

सुधार ही नियम होना चाहिए: CJI सूर्यकांत

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोमवार को कहा कि जजों के विरुद्ध शिकायतों से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट द्वारा बनाया गया तंत्र मजबूत, बहुत तेजी से प्रतिक्रिया देने वाला और समय पर काम करने वाला है।

राम जेठमलानी स्मारक व्याख्यान प्रधान न्यायाधीश ने यह भी कहा, हम बिना किसी हिचकिचाहट के मानते हैं कि सुधार ही नियम होना चाहिए। कोई भी संस्था एक ही स्थिति में बने रहकर न तो टिक सकती है और न ही गर्व महसूस कर सकती है। लेकिन कुछ मुद्दे ऐसे भी होते हैं जिन पर सार्वजनिक मंच से प्रतिक्रिया देना सही नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में जायज आलोचना और संस्था में जनता के भरोसे के बीच के रिश्ते पर विचार किया है।

उन्होंने कहा, अपने आदेश में हमने फिर से कहा कि न्यायपालिका, एक संस्था के तौर पर, आलोचना के विरुद्ध नहीं है और न ही हो सकती है, क्योंकि न्यायिक कामकाज की निष्पक्ष, जानकारीपूर्ण और रचनात्मक आलोचना एक जीवंत संवैधानिक लोकतंत्र की जायज और जरूरी विशेषता है, जो संस्थागत जवाबदेही व आत्म-सुधार में योगदान देती है।

उन्होंने कहा कि अदालत के लिए पारदर्शिता का मतलब सिर्फ खुले दरवाजे और सार्वजनिक सुनवाई नहीं है, इसका मतलब है कि किसी फैसले के पीछे की वजह को कोई भी देख सके।

महेश जेठमलानी ने फिक्सर वकीलों की भूमिका पर उठाया सवाल

राज्यसभा सदस्य और वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने व्याख्यान में कहा, न्यायपालिका या न्यायाधिकरणों में भ्रष्टाचार नहीं हो सकता जब तक कि फिक्सर वकील न हों, जो पूरी कानूनी प्रणाली को रिश्वत देकर खेलते हैं।

बार में सभी को पता है कि वे कौन हैं। उनके नाम शायद खुफिया एजेंसियों के पास हैं और इन्हें सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम को सूचित किया जाना चाहिए।

उन्होंने बार काउंसिलों के कार्यप्रणाली की भी आलोचना की, विशेष रूप से बार काउंसिल आफ इंडिया के अध्यक्ष के कार्यकाल को पांच साल बढ़ाने के प्रयास पर।

(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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