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ज़ोहरान ममदानी ने जब अमेरिकी शहर न्यूयॉर्क के पहले मुस्लिम मेयर के रूप में शपथ ली, तो कई लोगों के मन में यह सवाल उठा कि उनकी पत्नी ने दो क़ुरान क्यों पकड़ रखे थे, जिन पर हाथ रखकर उन्होंने शपथ ली.
अमेरिका में न्यूयॉर्क के नवनिर्वाचित मेयर ज़ोहरान ममदानी एक जनवरी को पद संभालते समय क़ुरान पर शपथ लेने वाले न्यूयॉर्क सिटी के पहले मेयर हैं.
वो न्यूयॉर्क सिटी के पहले मुस्लिम मेयर भी हैं.
अमेरिकी मतदाताओं के बीच वो ‘धर्मनिरपेक्ष पहचान’ बनाने वाले नेता के तौर पर उभरे हैं.
उनके प्रवक्ता के अनुसार, वे इस दौरान अपनी निजी और सार्वजनिक दोनों तरह की शपथ एवं कार्यक्रमों में इस्लाम की पवित्र पुस्तक क़ुरान के कम से कम तीन अलग-अलग संस्करणों का इस्तेमाल करेंगे.
ज़ोहरान ममदानी जिन क़ुरानों पर शपथ लेने वाले हैं, उनमें उनके अपने दादा का क़ुरान और लेखक, इतिहासकार आर्तुरो शॉमबर्ग का क़ुरान भी शामिल है, जिसे न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी से लिया गया था.
उनका पहला शपथ ग्रहण समारोह पुराने सिटी हॉल सबवे स्टेशन पर आयोजित किया गया.
दिन के समय होने वाले शपथ ग्रहण के दौरान वे सिटी हॉल के बाहर एक बार फिर अपने दादा की धार्मिक पुस्तक और कम से कम एक अन्य पारिवारिक क़ुरान का इस्तेमाल करेंगे.
इससे पहले न्यूयॉर्क के हालिया मेयरों ने शपथ लेते समय विभिन्न धार्मिक पुस्तकों या ग्रंथों का इस्तेमाल किया है, जिनका व्यक्तिगत महत्व और ऐतिहासिक अहमियत रही है.
डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट्स ऑफ अमेरिका के सदस्य ममदानी ने चुनावी अभियान के दौरान अपनी ‘धार्मिक आस्था’ पर बात करने से परहेज़ नहीं किया.
अक्तूबर में जब उन्हें एक विवादित इमाम के साथ तस्वीर खिंचवाने को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ा, तो उन्होंने कहा, “हर मुसलमान का सपना बस इतना ही है कि उसे किसी दूसरे न्यूयॉर्कवासी की तरह समझा जाए, लेकिन फिर भी हमें लंबे समय से कहा जाता रहा है कि इससे कम की अपेक्षा रखें और जो थोड़ा-बहुत मिले, उसी में संतुष्ट रहें.”
हालांकि क़ुरान पर शपथ लेने वाले वे पहले अमेरिकी राजनेता नहीं हैं.
इससे पहले, पूर्व हाउस सदस्य कीथ एलिसन, जो अब मिनेसोटा के डेमोक्रेटिक अटॉर्नी जनरल हैं, ने 2007 में कांग्रेस में शपथ ग्रहण के दौरान क़ुरान का इस्तेमाल किया था.
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ज़ोहरान ममदानी ने एक जनवरी, 2026 को न्यूयॉर्क के मेयर पद की शपथ ले ली.
वह शहर के पहले मुस्लिम मेयर और बीते 100 साल में सबसे कम उम्र के मेयर बनकर इतिहास रच चुके हैं.
शहर के 111वें मेयर के तौर पर उनके शपथ ग्रहण समारोह में उनका परिवार मौजूद रहा. न्यूयॉर्क के स्थानीय समय के अनुसार, नए साल में आधी रात को उन्होंने शपथ ली.
एक जनवरी को आम लोगों को ब्रॉडवे पर एक स्ट्रीट पार्टी में शामिल होने के लिए बुलाया गया है, जो सिटी हॉल तक जाती है.
डेमोक्रेटिक पार्टी के कैंडिडेट के तौर पर ज़ोहरान ममदानी ने नवंबर महीने की शुरुआत में न्यूयॉर्क के मेयर का चुनाव जीता था.
34 साल के ममदानी 100 साल से भी अधिक समय में न्यूयॉर्क के सबसे युवा, पहले मुसलमान और दक्षिण एशियाई मूल के मेयर बने हैं.
मेयर पद के लिए मुख्य मुक़ाबला ज़ोहरान ममदानी और एंड्रयू कुओमो के बीच था. ममदानी से डेमोक्रेट प्राइमरी में हारने के बाद कुओमो इंडिपेंडेंट उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे थे.
वहीं, रिपब्लिकन पार्टी की ओर से कर्टिस स्लिवा उम्मीदवार थे.
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न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली के सदस्य ममदानी ने साल की शुरुआत एक काफ़ी हद तक अनजान उम्मीदवार के तौर पर की थी लेकिन वह पोल में सबसे ऊपर पहुंच गए थे.
उनके चुनाव ने प्रोग्रेसिव लोगों के लिए एक बड़ा बदलाव लाया, जो शहर के राजनीतिक केंद्र में बदलाव का संकेत था.
ममदानी ने ख़ुद को लोगों के उम्मीदवार और एक ऑर्गेनाइज़र के तौर पर पेश किया.
मेयर का चुनाव जीतने के बाद ममदानी ने आधे घंटे लंबे भाषण में राष्ट्रपति ट्रंप पर निशाना साधा था.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव से पहले ज़ोहरान ममदानी को वोट न करने की अपील की थी.
उन्होंने फ़्री बस सेवा, यूनिवर्सल चाइल्डकेयर और बढ़ती महंगाई काबू करने समेत अपने सभी चुनावी वादों को पूरा करने की बात कही.
ज़ोहरान ममदानी को जानिए
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ज़ोहरान क्वामे ममदानी का जन्म साल 1991 में युगांडा की राजधानी कंपाला में हुआ था.
ममदानी के पिता ने उन्हें एक क्रांतिकारी और घाना के पहले प्रधानमंत्री क्वामे एन्क्रूमाह के नाम पर मिडिल नेम क्वामे दिया था.
ममदानी मशहूर भारतीय-अमेरिकी फ़िल्म निर्देशक मीरा नायर और कोलंबिया यूनिवर्सिटी के जाने-माने प्रोफे़सर महमूद ममदानी के बेटे हैं.
कंपाला में उन्होंने अपने शुरुआती दिन बिताए और फिर पांच साल की उम्र में दक्षिण अफ़्रीका आ गए.
ममदानी के भारतीय मूल के पिता महमूद ममदानी केपटाउन विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर थे.
केपटाउन में ही 1848 में शुरू हुए दक्षिण अफ़्रीका के सबसे पुराने स्कूल सेंट जॉर्ज ग्रामर में उन्होंने शुरुआती पढ़ाई-लिखाई की.
सात साल की उम्र में वे न्यूयॉर्क आ गए. उन्होंने ब्रॉन्क्स हाई स्कूल ऑफ़ साइंस से पढ़ाई की.
साल 2014 में उन्होंने बोडन कॉलेज से ‘बैचलर इन अफ़्रीकन स्टडीज़’ में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की.
कुछ साल बाद 2018 में, ममदानी एक अमेरिकी नागरिक बन गए.
ममदानी का राजनीतिक सफ़र
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ज़ोहरान ममदानी ने सक्रिय राजनीति में क़दम रखने से पहले एक सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर काम किया.
राजनीति में आने से पहले ज़ोहरान ममदानी क्वींस, न्यूयॉर्क में बतौर फॉरक्लोज़र काउंसलर (घर ज़ब्ती मामलों में सलाहकार) का काम करते थे. ममदानी कम आय वाले परिवारों की मदद करते थे जो आर्थिक तंगी के कारण अपने घर खोने की कगार पर थे.
इस काम के दौरान उन्होंने देखा कि जिन परिवारों की मदद वह कर रहे थे, उनकी दिक्क़तें केवल आर्थिक नहीं बल्कि नीतिगत भी थीं. इसी अनुभव ने उन्हें सक्रिय राजनीति की ओर प्रेरित किया ताकि वह नीतियां बदल सकें जो आम लोगों को प्रभावित करती हैं.
इसके बाद साल 2020 में उन्होंने पहला चुनाव लड़ा. उन्होंने न्यूयॉर्क असेंबली के 36वें डिस्ट्रिक्ट (एस्टोरिया, क्वींस) से डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा.
ज़ोहरान ममदानी पहली बार में ही जीत गए और न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली में पहले दक्षिण एशियाई और पहले सोशलिस्ट प्रतिनिधि बने.
अब डेमोक्रेट ममदानी ने न्यूयॉर्क मेयर प्राइमरी में पूर्व गवर्नर को पीछे छोड़कर सभी को चौंका दिया है.
राज्य के पूर्व गवर्नर 67 वर्षीय कुओमो, यौन उत्पीड़न से जुड़े एक मामले में 2021 में पद से इस्तीफ़ा देने के बाद राजनीतिक वापसी का प्रयास कर रहे थे.
जीत के बाद ममदानी ने कहा था, “आज रात हमने इतिहास लिखा है. जैसा कि नेल्सन मंडेला ने कहा था- ‘जब तक यह पूरा नहीं हो जाता, यह हमेशा असंभव लगता है.’ मेरे दोस्तों, हमने इसे कर दिखाया. मैं डेमोक्रेटिक उम्मीदवार के रूप में आपकी न्यूयॉर्क सिटी का मेयर बनूंगा.”
मोदी और इसराइल की आलोचना
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ज़ोहरान ममदानी इसराइल से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक की खुलकर आलोचना कर चुके हैं.
मई, 2025 में एक कार्यक्रम में उनसे एक सवाल पूछा गया कि अगर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मैडिसन स्क्वेयर गार्डन में रैली करते हैं और फिर न्यूयॉर्क के मेयर के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करना चाहते हैं, तो क्या वह उसमें शामिल होंगे?
ममदानी ने इसका जवाब नहीं में दिया था और गुजरात में दंगों के लिए उनकी तीखी आलोचना की थी.
ज़ोहरान ममदानी का फ़लस्तीन के समर्थन और इसराइल की आलोचना को लेकर डेमोक्रेटिक पार्टी के ज़्यादातर नेताओं से मतभेद रहा है.
एक अमेरिकी चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने इसराइल के यहूदी देश के रूप में अस्तित्व का विरोध किया था.
उन्होंने कहा, “मैं किसी ऐसे देश का समर्थन नहीं कर सकता जहां नागरिकता धर्म या किसी और आधार पर बांटी जाती हो. हर देश में समानता होनी चाहिए, यही मेरा विश्वास है.”
मुस्लिम पहचान पर हुए हमले
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प्राइमरी चुनाव जीतने के बाद ममदानी की मुस्लिम पहचान पर हमले बढ़े. उनपर खुलेआम नस्ली हमले हुए.
रिपब्लिकन सांसद एंडी ओगल्स ने तो जस्टिस डिपार्टमेंट को पत्र लिखकर ज़ोहरान ममदानी की नागरिकता रद्द कर वापस भेजने की मांग कर दी थी.
ममदानी धार्मिक पहचान से जुड़े हमलों का खुलकर जवाब देते रहे हैं. उन्हें कैंपेन के दौरान हिंसक हमले की भी धमकियां मिलती रहीं. कई बार तो ममदानी ने अपने कैंपेन में उन धमकियों की रिकॉर्डिंग भी सुनाई थी.
इससे जुड़े मुद्दों पर ज़ोहरान ममदानी ने एमएसएनबीसी से बातचीत में कहा था, “मेरे नाम और आस्था के आधार पर नियमित रूप से हमले हो रहे हैं. इससे जूझना बहुत मुश्किल है. मेरी जीत यह बताने का मौक़ा है कि एक मुसलमान होना किसी दूसरे धर्म के अनुयायी होने जैसा ही है.”
साउथ कैरलाइना से रिपब्लिकन रीप्रेजेंटेटिव नैंसी मैक ने ईद के मौक़े पर ज़ोहरान ममदानी के कुर्ते पायजामे वाली तस्वीर शेयर करते हुए 25 जून को लिखा था, ”9/11 के बाद हमने कहा था- हम कभी नहीं भूलेंगे. मुझे लगता है कि हम भूल गए. यह बहुत ही दुखद है.”
9/11 का हमला जब हुआ था तो ज़ोहरान ममदानी नौ साल के थे और मैनहटन में रह रहे थे.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.