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एपस्टीन फ़ाइल्स से सामने आ रहे राज़ दुनियाभर में सुर्ख़ियां बन रहे हैं. इनमें कई दिग्गज हस्तियों के नाम सामने आए हैं.
उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि उनका जेफ़री एपस्टीन से ‘कोई लेना-देना नहीं’ था. ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी की गई फ़ाइलों से साज़िश सामने आती है. इसका मक़सद उन्हें ‘राजनीतिक रूप से नुक़सान पहुंचाना और चुनाव हरवाना था.’
बहरहाल, हाल ही में सामने आए इन दावों ने अमेरिकी यौन अपराधी और मानव तस्कर जेफ़री एपस्टीन को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है.
एपस्टीन की मौत 2019 में हो चुकी है. लेकिन मृत्यु के 6 साल बाद भी एपस्टीन की फ़ाइलें विश्व की कई सरकारों, नेताओं, बिज़नेसमैन और नामी-गिरामी हस्तियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं.
भले ही एपस्टीन फ़ाइल्स में नाम आने से ट्रंप घिर गए हों, लेकिन उन्होंने ही इसे जारी करने का आदेश दिया था. उनके अपने समर्थकों और रिपब्लिकन पार्टी के कुछ नेताओं ने लगातार दबाव डाला कि एपस्टीन की जांच में क्या-क्या पता चला, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए.
कई हफ़्तों तक ट्रंप ने यह बात नहीं मानी, लेकिन बाद में उन्होंने राय बदली और रिपब्लिकन सांसदों से कहा कि वे एपस्टीन फ़ाइलों को लोगों के सामने सार्वजनिक करने के लिए वोट दें.
अमेरिकी संसद के दोनों सदनों (हाउस और सीनेट) ने एक क़ानून पास किया, जिससे न्याय विभाग को सभी फ़ाइलें जारी करने का आदेश मिला. ट्रंप ने नवंबर में इस पर हस्ताक्षर कर दिए.
इस क़ानून के बाद फ़ाइलें जारी करने की 30 दिनों की समयसीमा शुरू हुई. लेकिन कुछ फ़ाइलें जारी नहीं की जाएंगी, जैसे- फ़िलहाल चल रही किसी आपराधिक जांच से जुड़ी फ़ाइलें, एपस्टीन के शिकार लोगों की पहचान बताने वाली जानकारी, निजी जानकारी जो गोपनीयता भंग करे या बच्चों के यौन शोषण, मौत और चोट की तस्वीरें.
एपस्टीन फ़ाइल्स क्या हैं?
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दरअसल, 2008 में एक 14 साल की लड़की के माता-पिता ने पुलिस को बताया था कि जेफ़री एपस्टीन ने उनकी बेटी के साथ उनके पाम बीच वाले घर पर ग़लत काम किया. घर में कई लड़कियों की तस्वीरें मिलीं.
एपस्टीन को नाबालिगों से सेक्स वर्क करवाने के लिए दोषी ठहराया गया और सेक्स अपराधी के रूप में रजिस्टर किया गया. इसके बाद एपस्टीन ने फ़्लोरिडा में अभियोजकों से एक समझौता किया, इसकी वजह से उसे ज़्यादा जेल नहीं हुई.
11 साल बाद 2019 में उस पर फिर आरोप लगा कि वह नाबालिग लड़कियों का सेक्स के लिए नेटवर्क चला रहा था. जेल में ट्रायल का इंतज़ार करते हुए उसकी मौत हो गई, जिसे सुसाइड बताया गया.
इन दोनों जांचों में बहुत सारे दस्तावेज़ जमा हुए, जैसे पीड़ितों और गवाहों के बयान, उसके घरों पर छापे में मिली चीज़ें.
2025 के न्याय विभाग के एक मेमो के मुताबिक़, इस मामले में एफ़बीआई के पास 300 गीगाबाइट (जीबी) से ज़्यादा डेटा और सबूत हैं. न्याय विभाग कहता है कि इनमें पीड़ितों की बहुत सारी तस्वीरें और वीडियो हैं, जो बच्चों के शोषण से जुड़ी हुई हैं.
इन्हें सार्वजनिक नहीं किया जाएगा, क्योंकि नया क़ानून सर्वाइवर की पहचान छिपाने की इजाज़त देता है. यही जानकारी एपस्टीन फ़ाइल्स हैं, जो समय-समय पर जारी हो रही हैं.
एपस्टीन की ब्रिटिश साथी और पूर्व प्रेमिका ग़िस्लेन मैक्सवेल पर भी अलग जांच हुई. उसे 2021 में एपस्टीन के साथ मिलकर लड़कियों का यौन व्यापार करने का दोषी ठहराया गया.
एपस्टीन के बारे में अब तक क्या जारी हुआ है?
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एपस्टीन फ़ाइल्स से जुड़े 30 लाख नए दस्तावेज़ जारी किए गए हैं. कुछ सामग्री पहले ही सार्वजनिक हो चुकी है, जिनमें तस्वीरें भी शामिल हैं. इससे पहले कमिटी से एपस्टीन की संपत्ति के हज़ारों दस्तावेज़ आए, जिनमें ज़्यादातर ईमेल थे. सितंबर 2025 में एक बर्थडे बुक जारी हुई, जिसमें ट्रंप के नाम वाला एक नोट था. हालांकि, ट्रंप ने यह नोट लिखने से इनकार किया.
ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के कुछ हफ़्तों बाद ही फ़रवरी 2025 में न्याय विभाग और एफ़बीआई ने एपस्टीन फ़ाइल्स का पहला चरण जारी किया. कुछ दक्षिणपंथी प्रभावशाली लोगों को व्हाइट हाउस बुलाया गया, लेकिन उन्हें सिर्फ़ 341 पेज मिले, जो ज़्यादातर पहले से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध थे. इसमें एपस्टीन के प्लेन के उड़ान रिकॉर्ड और उसके किससे संपर्क रहे, यह बताया गया. लेकिन इसमें से भी कुछ नाम छिपाए गए.
अमेरिकी संसद में वोट एक डिस्चार्ज पिटीशन से हुआ, जिसमें 218 सांसदों के हस्ताक्षर ज़रूरी थे. चार रिपब्लिकन और सभी 214 डेमोक्रेट ने हस्ताक्षर किए. 18 नवंबर को वोटिंग हुई और हाउस में 427-1 से बिल पास हुआ.
लुइसियाना के रिपब्लिकन सांसद क्ले हिगिंस इकलौते ऐसे शख़्स थे जिन्होंने इसका विरोध किया जबकि कुछ सांसद वोट नहीं डाल पाए. हाउस के बाद सीनेट में बिना विरोध के यह पास हुआ और ट्रंप ने हस्ताक्षर किए.
इस प्रक्रिया के बाद भी फ़ाइलों का पूरी तरह से रिलीज़ होना मुश्किल है. अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी के पास अधिकार है कि वे किसी भी जानकारी को रोक सकती हैं, जो जांच को नुकसान पहुंचाए या पीड़ितों की पहचान बताए. क़ानून में कहा गया है कि व्यक्तिगत जानकारी को रोका या छिपाया जा सकता है जो ‘साफ़ तौर पर निजता में अनुचित तौर पर हस्तक्षेप’ करे.
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रिपब्लिकन कहते हैं कि एपस्टीन से जुड़ी जांचों के नाम पर जानकारी रोकने या देरी करने की आशंका है. रिप्रेज़ेंटेटिव थॉमस मैसी ने कहा था कि जांच के नाम पर जानकारी रोकने की कोशिश हो सकती है.
वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, मई में अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी ने ट्रंप को बताया कि एफ़बीआई दस्तावेज़ों में उनका नाम है. ट्रंप एपस्टीन के पुराने दोस्त थे. अख़बार ने लिखा कि नाम होना ग़लत काम का सबूत नहीं है. व्हाइट हाउस ने इसे ‘फ़ेक’ बताया, लेकिन रॉयटर्स को एक अधिकारी ने कहा कि ट्रंप का नाम होने से इनकार नहीं किया गया.
सार्वजनिक दस्तावेज़ों में कई और भी बड़े नाम आए हैं, जिनमें एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर (पूर्व प्रिंस और किंग चार्ल्स III के भाई), पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और माइकल जैक्सन भी शामिल हैं.
क्लिंटन और ब्रिटिश राजघराने ने एपस्टीन के अपराधों की जानकारी होने से इनकार किया. जैक्सन की 2019 में मौत हो चुकी है. सितंबर में जारी फ़्लाइट लॉग (ऐसे दस्तावेज़ जिनमें एपस्टीन के स्वामित्व वाले निजी जेट विमानों के यात्रियों की सूची का विवरण दिया गया है) में एलन मस्क और माउंटबेटन-विंडसर का नाम था. माउंटबेटन-विंडसर ने ग़लत काम से इनकार किया. जबकि मस्क ने कहा कि एपस्टीन ने उन्हें द्वीप पर बुलाया था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया.
12 नवंबर को जारी ईमेल में क्लिंटन के पूर्व ट्रेज़री सेक्रेटरी लैरी समर्स और ट्रंप के पूर्व सहयोगी स्टीव बैनन का नाम आया. समर्स ने कहा कि वे अब सार्वजनिक कार्यों से पीछे हटेंगे और उन्होंने एपस्टीन से संपर्क रखने की ग़लती की ज़िम्मेदारी ली. ट्रंप का नाम भी कई बार आया, लेकिन उन्होंने भी हमेशा आरोप ख़ारिज किए.
ट्रंप और एपस्टीन के रिश्ते कैसे थे?
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ऐसा महसूस होता है कि ट्रंप और एपस्टीन कई सालों तक दोस्त थे, उनका सामाजिक दायरा एक जैसा था. पहले जारी फ़ाइलों में ट्रंप का नाम एपस्टीन की ‘ब्लैक बुक’ में था. फ़्लाइट लॉग से निकली जानकारी के मुताबिक भी ट्रंप ने कई बार एपस्टीन के प्लेन में सफ़र किया.
1990 के दशक में वे साथ में हाई-क्लास पार्टियों में दिखे. सीएनएन की तस्वीरों में एपस्टीन ट्रंप की शादी (मारला मैपल्स से) में थे. 2002 में ट्रंप ने एपस्टीन को ‘शानदार आदमी’ कहा. एपस्टीन ने बाद में कहा कि वह 10 साल तक डोनाल्ड का सबसे क़रीबी दोस्त था.
लेकिन ट्रंप कहते हैं कि एपस्टीन की पहली गिरफ़्तारी से दो साल पहले ही उनका उससे झगड़ा हो गया था. 2008 तक ट्रंप कहने लगे कि वे एपस्टीन के फ़ैन नहीं रहे. व्हाइट हाउस कहता है कि झगड़ा एपस्टीन के व्यवहार की वजह से हुआ और ट्रंप ने उसे अपने क्लब से निकाल दिया क्योंकि वह ‘घिनौना शख़्स’ था. जबकि वॉशिंगटन पोस्ट का कहना है कि झगड़ा फ़्लोरिडा में किसी ज़मीन को लेकर हुआ था.
ट्रंप के मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (मागा) आंदोलन के कट्टर समर्थक लंबे समय से मानते हैं कि सरकारी अधिकारी एपस्टीन के जीवन और मृत्यु से जुड़े अहम सच छुपा रहे हैं.
कुछ का मानना है कि अमेरिकी समाज के सबसे ऊपरी तबके पर बच्चों के यौन शोषण का एक गिरोह चल रहा है, जिसे सरकार का संरक्षण प्राप्त है. यह बात ‘क्यू’ नाम के एक गुप्त व्यक्ति के रहस्यमय संदेशों से फैली. कुछ का तो यह भी दावा है कि एपस्टीन इसराइल सरकार का एजेंट था.
एपस्टीन की मौत
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आम लोगों के मन में कई ऐसे सवाल हैं, जिनके अभी भी जवाब नहीं मिले हैं, जैसे- फ़्लोरिडा में एपस्टीन को इतनी हल्की सज़ा क्यों दी गई, क्या इन काले कारनामों के पीछे सिर्फ़ एपस्टीन और मैक्सवेल ही थे और उसने जेल में आत्महत्या कैसे की.
हालांकि एपस्टीन की मौत के एक हफ़्ते बाद ही न्यूयॉर्क के मेडिकल एग्ज़ामिनर ने आधिकारिक तौर पर एपस्टीन की मौत को फांसी लगाकर आत्महत्या करार दे दिया था. 66 वर्षीय फ़ाइनेंसर का 10 अगस्त 2019 को जेल में शव मिला था.
अमेरिकी ब्यूरो ऑफ प्रिज़न्स ने पहले ही उसकी मौत को “संभावित आत्महत्या” बताया था, लेकिन इसके बावजूद कई तरह की साजिश की थ्योरीज़ सामने आती रहीं. इसके बाद अमेरिकी न्याय विभाग ने इस बात की जांच शुरू की कि न्यूयॉर्क की बेहद सुरक्षित मेट्रोपॉलिटन करेक्शनल सेंटर जेल में एपस्टीन की मौत कैसे हुई.
अटॉर्नी जनरल विलियम बार ने कहा कि जेल में “गंभीर अनियमितताएं” सामने आई हैं. इस जेल में पहले भी कई हाई-प्रोफाइल कैदी रह चुके हैं, जैसे मैक्सिकन ड्रग माफिया एल चापो और धोखाधड़ी के आरोपी बर्नी मैडॉफ.
एपस्टीन की मौत के बाद दो जेल गार्डों को निलंबित कर दिया गया और एमसीसी के एक वॉर्डन को अस्थायी रूप से हटा दिया गया, क्योंकि रिपोर्ट्स में कहा गया था कि एपस्टीन की यूनिट में जरूरी हर 30 मिनट की निगरानी ठीक से नहीं की गई थी.
(आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुजर रहे हैं तो भारत सरकार की जीवनसाथी हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.)
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.