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ज्वालामुखी फटा तो आधुनिक दुनिया में पहुंचे 150 साल से अलग-थलग रह रहे लोग, लेकिन फिर क्यों लौट गए?

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Oct 13, 2026


ज्वालामुखी फटने के बाद नाव से ब्रिटेन जाते ट्रिस्टन दा कुन्हा द्वीप के लोग.

इमेज कैप्शन, ज्वालामुखी फटने के बाद नाव से ब्रिटेन जाते ट्रिस्टन दा कुन्हा द्वीप के लोग

अटलांटिक महासागर में ट्रिस्टन दा कुन्हा नाम का एक छोटा-सा द्वीप है. वहां ज्वालामुखी फटने के बाद सभी 264 लोगों को अपना घर छोड़कर जाना पड़ा.

इसके बाद इन लोगों ने कुछ समय ब्रिटेन में बिताया. वहां उन्होंने पहली बार आधुनिक दुनिया को देखा. बाद में उन्होंने अपने ये अनुभव बीबीसी के साथ साझा किए.

साल 1963 में प्रसारित बीबीसी के एक कार्यक्रम में टिम ब्रिंटन ने कहा था, “एक साल पहले तक इन लोगों ने न तो सड़क देखी थी, न कोई गाड़ी और न ही छोटी-सी झोपड़ी से ऊंचा कोई मकान.”

वह ट्रिस्टन दा कुन्हा के लोगों के बारे में बता रहे थे. इसे दुनिया का सबसे दूर-दराज़ का द्वीप कहा जाता है.

ज्वालामुखी फटने से बदली द्वीप के लोगों की ज़िंदगी

दक्षिण अटलांटिक महासागर के बीच मौजूद यह छोटा-सा ब्रिटिश द्वीप दक्षिण अफ़्रीका के केपटाउन और ब्राज़ील के रियो डी जनेरियो से लगभग बराबर दूरी पर है.

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