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इसी महीने सात फ़रवरी से शुरू होने जा रहे टी-20 वर्ल्ड कप में भाग लेने लेकिन भारत के ख़िलाफ़ मैच में न उतरने के पाकिस्तान के फ़ैसले पर आईसीसी ने चेतावनी दी है.
पाकिस्तान के फ़ैसले को लेकर देश के अंदर और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत में भी मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं.
एक तरफ़ जहां पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटरों ने पूरे टूर्नामेंट का बहिष्कार करने को समाधान नहीं बताया.
वहीं पाकिस्तान क्रिकेट टीम के मौजूदा कप्तान सलमान आग़ा ने साफ़ किया कि भारत के ख़िलाफ़ मैदान में न उतरने का ‘ये फ़ैसला उनका नहीं’ है.
रविवार को ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ तीसरे टी-20 मैच के बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा, “हम वर्ल्ड कप खेलने जा रहे हैं. यह हमारा फै़सला नहीं है, हम कुछ नहीं कर सकते. भारत के ख़िलाफ़ न खेलने का फै़सला हमारा नहीं है. सरकार या पीसीबी प्रमुख हमें जो करने को कहेंगे, हम वही करेंगे.”
बीते महीने के आख़िर में जब बांग्लादेश इस टूर्नामेंट से बाहर हुआ तो पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने आईसीसी के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया था.
पीसीबी चेयरमैन मोहसिन नक़वी के बयानों से ऐसे संकेत मिल रहे थे कि पाकिस्तान इस पूरे टूर्नामेंट से बाहर भी हो सकता है लेकिन रविवार को जारी बयान में पाकिस्तान सरकार ने सिर्फ़ भारत के साथ मुक़ाबले में मैदान पर न उतरने की जानकारी दी.
उधर, पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान राशिद लतीफ़ ने एक भारतीय मीडिया को दिए इंटरव्यू में कहा कि ’24 घंटों में कुछ भी हो सकता है.’
‘बस बहुत हो गया’
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पाकिस्तान के पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज़ कामरान अकमल ने भारत के ख़िलाफ़ मैच का बहिष्कार करने के फ़ैसले का समर्थन करते हुए कहा है कि इस फ़ैसले का समय बहुत पहले ही आ जाना चाहिए था.
कामरान अकमल ने एएफ़पी समाचार एजेंसी को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “बहुत हो गया. हमें यह फै़सला लेना ही पड़ा, भारत ने राजनीति को खेल से मिलाकर क्रिकेट की मूल भावना को बार-बार नुक़सान पहुंचाया है.”
उन्होंने कहा, “इसलिए सरकार के इस कड़े रुख़ का समर्थन किया जाना चाहिए.”
इसी बीच, पूर्व भारतीय क्रिकेटर आकाश चोपड़ा ने सवाल उठाया, “पाकिस्तान ने उस दिन भारत के ख़िलाफ़ न खेलने की घोषणा की है जिस दिन भारत ने आईसीसी टूर्नामेंट में पाकिस्तान को हराया था. क्या इसे पाखंड कहा जा सकता है?”
उनका इशारा अंडर-19 विश्व कप के उस मैच की ओर था जिसमें भारत और पाकिस्तान रविवार को आमने-सामने थे. इस मैच में भारत ने पाकिस्तान को हराकर सेमीफ़ाइनल में जगह बनाई थी.
बहिष्कार का था दबाव
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पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के पूर्व अधिकारियों की भी पाकिस्तान के संभावित निर्णय के संबंध में अलग-अलग राय रही है.
पीसीबी के पूर्व अध्यक्ष ख़ालिद महमूद ने बीबीसी उर्दू से कहा कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को अपने सैद्धांतिक रुख़ पर अडिग रहना चाहिए.
उन्होंने कहा, “पाकिस्तान को एक बार फिर आईसीसी की आपातकालीन बैठक की मांग करनी चाहिए. पाकिस्तान को आईसीसी के अन्य सदस्यों को यह समझाना चाहिए कि भारत हर बार खेल में राजनीति लाता है और इस प्रवृत्ति को रोकना चाहिए.”
पीसीबी के पूर्व अध्यक्ष के अनुसार, “कभी-कभी भारतीय क्रिकेटर हाथ नहीं मिलाते, कभी-कभी वे ट्रॉफी लेने से इनकार कर देते हैं, और कभी-कभी वे दूसरे देश में खेलने जाने से इनकार कर देते हैं.”
उनके अनुसार, “आईसीसी के अन्य सदस्य देशों को भी यह समझना चाहिए कि हर देश का भारत के साथ विवाद क्यों है.”
उनका कहना है, “पहले भी कई टीमों ने सुरक्षा कारणों से पाकिस्तान आने से इनकार कर दिया है. आईसीसी ने किसी भी टीम को पाकिस्तान जाकर खेलने के लिए मजबूर नहीं किया है, तो अब बांग्लादेश को भारत जाने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है?”
उन्होंने कहा, “भले ही हमें सिद्धांतों के आधार पर लाखों डॉलर का बलिदान देना पड़े, हमें इससे पीछे नहीं हटना चाहिए, क्योंकि दुनिया सिद्धांतों को देखती है, पैसे को नहीं.”
हालांकि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) तौकीर ज़िया का मानना था कि ‘पाकिस्तान को टी-20 विश्व कप का बहिष्कार नहीं करना चाहिए.’
बीबीसी उर्दू से बात करते हुए उन्होंने कहा था, “बांग्लादेश के संबंध में आईसीसी के फै़सले पर किसी अन्य बोर्ड ने आपत्ति नहीं जताई. आईसीसी ने यह फै़सला सर्वसम्मति से लिया है. इसलिए, इस मामले को बेवजह खींचने के बजाय, पाकिस्तान को अब इस पर अपना रुख़ स्पष्ट करना चाहिए.”
उन्होंने कहा, “इसमें कोई संदेह नहीं है कि पाकिस्तान ने एक सैद्धांतिक बयान दिया है, लेकिन पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का एक महत्वपूर्ण सदस्य है, और भारत-पाकिस्तान मैच के प्रसारण अधिकारों का मुद्दा भी है.”
ग़ौरतलब है कि बांग्लादेश के भारत में खेलने से इनकार किए जाने पर उसे टूर्नामेंट से बाहर कर दिया गया जबकि पाकिस्तान ने उसके समर्थन में आईसीसी के अंदर ज़ोरदार आवाज़ उठाई थी.
‘पाकिस्तान पर बैन लगाना आसान नहीं’
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खेल जगत से जुड़े तमाम जानकार इस बारे में एकमत हैं कि अगर पाकिस्तान विश्व कप नहीं खेलता है, तो इसका आईसीसी के राजस्व पर सीधा असर पड़ेगा.
पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर बासित अली ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, “अगर पाकिस्तान विश्व कप नहीं खेलता है, तो प्रसारणकर्ता को बहुत परेशानी होगी. अगर पाकिस्तान टूर्नामेंट से बाहर हो जाता है, तो क्या भारत के ख़िलाफ़ खेलने वाली टीम को उतने ही दर्शक मिलेंगे?”
फे़डरेशन ऑफ़ इंडियन चैंबर्स ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के मुताबिक़, भारत और पाकिस्तान के बीच हुए मैचों से पिछले 20 वर्षों में 1 बिलियन डॉलर से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है.
पाकिस्तान के खेल विश्लेषक डॉ. नौमान नियाज़ ने सोशल मीडिया पर एक शो के दौरान कहा कि “पाकिस्तान की ग़ैर-भागीदारी पूरे विश्व कप को हिला देगी.”
उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान और भारत के बीच मैच के दौरान भारत में विज्ञापन का समय 4800 अमेरिकी डॉलर तक में बेचा जाता है. “इसके अलावा, आईसीसी ने ग्राउंड ब्रांडिंग और टाइटल स्पॉन्सरशिप सहित विभिन्न अनुबंध किए हैं.”
बहिष्कार की स्थिति में पाकिस्तानी टीम पर संभावित प्रतिबंध के सवाल पर डॉ. नौमान नियाज़ ने कहा, “अगर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड विश्व कप में अपनी टीम न भेजने का फ़ैसला करता है, तो यह प्रतिबंध लगाया जा सकता है. लेकिन अगर पाकिस्तानी सरकार ऐसा करने का फ़ैसला करती है, तो आईसीसी के लिए प्रतिबंध लगाना इतना आसान नहीं होगा.”
‘अंतिम 24 घंटों में कुछ भी हो सकता है’
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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के सूत्रों के हवाले से एएनआई ने बताया है कि 15 फ़रवरी को भारत और पाकिस्तान के बीच कोलंबो में मैच निर्धारित है और भारतीय टीम अपने पूर्व शेड्यूल के अनुसार ही स्टेडियम पहुंचेगी.
उधर, पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान राशिद लतीफ़ का मानना है कि अंतिम क्षणों तक कुछ भी हो सकता है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में राशिद लतीफ़ ने कहा, “अब तक सब कुछ ठीक चल रहा था. पाकिस्तान और भारत, दोनों इस बात पर सहमत थे कि अगले तीन साल तक हाइब्रिड मॉडल में मैच खेले जाएंगे. एशिया कप दुबई में हुआ. महिला वनडे वर्ल्ड कप में पाकिस्तान की महिला टीम ने श्रीलंका में खेला. सब कुछ सही था, लेकिन बांग्लादेश वाला मामला सामने आने के बाद हालात बदल गए.”
उनके मुताबिक, भारत-पाकिस्तान मुक़ाबले ही वर्ल्ड कप की दर्शक संख्या का सबसे बड़ा आधार हैं, “चाहे भारत हो या पाकिस्तान, वर्ल्ड कप देखने वाले 60 से 70 प्रतिशत लोग भारत-पाकिस्तान मैच की वजह से ही देखते हैं.”
लतीफ़ बताते हैं, “ऑस्ट्रेलिया से जुड़े मुक़ाबलों में भी स्टेडियम भरे रहते हैं, लेकिन जब भारत और पाकिस्तान आमने-सामने होते हैं, तो उसका स्तर बिल्कुल अलग होता है. दर्शकों की संख्या करोड़ों में पहुंच जाती है, स्पॉन्सरशिप की क़ीमत बढ़ जाती है और ब्रॉडकास्टर्स अपनी पूरी व्यावसायिक रणनीति इन्हीं मैचों के इर्द-गिर्द बनाते हैं.”
लतीफ़ ने कहा, “यह फ़ैसला भारत पर नहीं, सीधे आईसीसी पर असर डालता है. पाकिस्तान आम तौर पर ऐसे फै़सले नहीं लेता… पीसीबी पाबंदियों से भी नहीं डर रहा है.”
“इसका बड़ा असर होगा. इस साल इंग्लैंड में महिला टी-20 वर्ल्ड कप है, वहां भी पाकिस्तान भारत से खेल सकता है. 2028 में भारत में चैंपियंस ट्रॉफी होनी है. यानी मामला यहीं ख़त्म नहीं होगा. लगता है कि पाकिस्तान ने यह क़दम काफ़ी सोच-समझकर उठाया है.”
पाबंदियों को लेकर लतीफ़ ने कहा, “अगर बांग्लादेश अकेले ऐसा करता, तो उस पर सख्त कार्रवाई हो सकती थी. पाकिस्तान के शामिल होने से स्थिति बदल जाती है. अब पाकिस्तान के आने से ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड पर भी इसका वित्तीय असर पड़ेगा.”
लतीफ़ ने कहा कि एक अनुमान के मुताबिक़, “भारत-पाकिस्तान क्रिकेट का कारोबार अलग-अलग फॉर्मेट और टूर्नामेंट में करीब एक अरब डॉलर का है. इसका असर सिर्फ़ एक टूर्नामेंट तक सीमित नहीं रहेगा. एसीसी कैलेंडर, आने वाले एशिया कप और आईसीसी के दूसरे इवेंट भी दबाव में आएंगे.”
इसी इंटरव्यू में लतीफ़ ने कहा, “ब्रॉडकास्टर्स कितने ताकतवर होते हैं. वे कोई न कोई समाधान निकाल ही लेंगे. पर्दे के पीछे बातचीत हमेशा चलती रहती है.”
पाकिस्तान को इस रुख़ तक पहुंचने में करीब एक हफ्ता लगने को लेकर लतीफ़ ने कहा कि समय का चयन सोच-समझकर किया गया है. ऑस्ट्रेलिया सिरीज ख़त्म हो चुकी है, दोनों टीमें कोलंबो जाने वाली हैं और पूरा फ़ोकस आईसीसी पर है.
उन्होंने कहा, “24 घंटे में कुछ भी हो सकता है.”
गौरतलब है कि अगर पाकिस्तान 15 फ़रवरी को भारत के ख़िलाफ़ मैदान में नहीं उतरता है, तो उसे दो अंक गंवाने होंगे और आईसीसी की तरफ़ से पाबंदियां भी लग सकती हैं.
भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में कड़वाहट
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भारत और पाकिस्तान के बीच बिगड़े रिश्तों की यह ताज़ा कड़ी पिछले साल दुबई में हुए एशिया कप में भी साफ़ दिखाई दी थी.
टूर्नामेंट में भारत ने पाकिस्तान को तीन बार हराया, जिसमें 28 सितंबर को खेला गया फ़ाइनल भी शामिल था. हालांकि, भारतीय खिलाड़ियों ने विरोधी टीम से हाथ नहीं मिलाया और मोहसिन नक़वी से ट्रॉफ़ी लेने से भी इनकार कर दिया.
मोहसिन नक़वी पीसीबी चेयरमैन भी हैं और पाकिस्तान के गृह मंत्री भी हैं.
पीए स्पोर्ट्स के मुताबिक़, भारत ने टी-20 वर्ल्ड कप प्रतियोगिता दो बार जीती है, 2007 और 2024 में.
वहीं पाकिस्तान ने 2009 के फ़ाइनल में श्रीलंका को हराया था और वह दो बार उपविजेता भी रहा है.
बांग्लादेश को इस साल के टूर्नामेंट से बाहर कर दिया गया, क्योंकि उसने भारत आने से इनकार कर दिया था और अपने सभी मैच श्रीलंका में खेलने की अनुमति मांगी थी, जिसे आईसीसी ने ठुकरा दिया था.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित