इमेज कैप्शन, एयरफ़ोर्स वन में यात्रा के दौरान ट्रंप ने भारत पर टैरिफ़ को लेकर बयान दिया था
भारत के रूस से तेल ख़रीदने और अमेरिकी टैरिफ़ को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से बयान दिया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को चेतावनी दी है कि अगर वो रूस के साथ व्यापार जारी रखता है तो उस पर जल्दी टैरिफ़ बढ़ाया जा सकता है.
ट्रंप के साथ खड़े रहे अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने दावा किया है कि ट्रंप के टैरिफ़ की वजह से भारत रूस से अब कम तेल ख़रीद रहा है.
ट्रंप और ग्राहम के इस बयान के बाद भारत के विपक्षी दलों ने केंद्र की बीजेपी सरकार की निंदा की है. कांग्रेस ने इसे भारत का अपमान बताया है और कहा है कि पीएम मोदी को इसका जवाब देना चाहिए.
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वहीं आम आदमी पार्टी ने कहा है कि “मोदी जी आपकी चुप्पी देश की इज़्ज़त पर भारी पड़ रही है.”
ट्रंप और अमेरिकी सीनेटर ने क्या कहा?
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इमेज कैप्शन, लिंडसे ग्राहम ने दावा किया है कि टैरिफ़ की वजह से भारत अब कम तेल ख़रीद रहा है
रविवार को एयर फ़ोर्स वन विमान में सवार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम पत्रकारों से रूस-यूक्रेन युद्ध पर बात कर रहे थे.
इसी बातचीत के दौरान लिंडसे ग्राहम पत्रकारों को बता रहे थे कि किस तरह से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फ़ैसलों से पुतिन पर अब तक सबसे अधिक दबाव पड़ा है.
इसी दौरान ट्रंप ने उन्हें टोकते हुए कहा कि “ये रूस को बुरी तरह नुकसान पहुंचा रहा है और भारत भी ख़ुद को बाहर निकाल रहा है.”
इसके बाद लिंडसे ग्राहम ने कहा, “इन्होंने (ट्रंप) भारत पर रूस से तेल ख़रीदने पर 25 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाया है. मैं लगभग एक महीने पहले भारतीय राजदूत (विनय क्वात्रा) के घर पर था और वो सिर्फ़ ये बात करना चाहते थे कि कैसे वे अब रूस से बहुत कम तेल ख़रीद रहे हैं और मैं राष्ट्रपति से टैरिफ़ में राहत देने के लिए कहूं.”
“अगर आप सस्ता रूसी तेल ख़रीदते रहेंगे और पुतिन की वॉर मशीन को चलने देंगे तो हम राष्ट्रपति को ये क्षमता मुहैया कराएंगे कि वो टैरिफ़ के ज़रिए कठिन विकल्प चुनें. मेरा बिलकुल यह मानना है कि इन्होंने (ट्रंप) भारत के साथ जो किया, इसी की वजह से भारत अब रूस से बहुत हद तक कम रूसी तेल ख़रीद रहा है.”
हालांकि लिंडसे ग्राहम ने कोई एक तारीख़ नहीं बताई थी जब उनकी भारत के राजदूत से मुलाक़ात हुई थी.
लेकिन ‘द हिंदू’ अख़बार की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, 2 दिसंबर 2025 को वॉशिंगटन में भारतीय दूतावास में सीनेटर ग्राहम और सीनेटर रिचर्ड ब्लमेंथल एक अमेरिकी सीनेट प्रतिनिधिमंडल में मौजूद थे.
लिंडसे ग्राहम इसी दौरान उस ‘रशियन सेंक्शंस बिल’ के बारे में भी बता रहे थे जिसमें वो और ब्लमेंथल दोनों ही सह-प्रायोजक हैं जिसे सीनेट में पेश किया गया है.
इस बिल के तहत रूस से तेल या यूरेनियम ख़रीदने वाले देशों पर 500 फ़ीसदी तक टैरिफ़ लगाने का प्रावधान किया गया है.
‘मोदी जानते थे मैं ख़ुश नहीं था’
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इमेज कैप्शन, ट्रंप ने पीएम मोदी को तारीफ़ की है
लिंडसे ग्राहम के इस बयान के बाद उनके साथ विमान में मौजूद राष्ट्रपति ट्रंप ने उन्हें टोकते हुए कहा, “वे मुझे ख़ुश करना चाहते थे. मूल रूप से मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं. उन्हें पता था कि मैं ख़ुश नहीं था और मुझे ख़ुश करना ज़रूरी था.”
अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि ‘वे आपस में व्यापार करते हैं’ और भारत ने हमारी बात नहीं मानी तो ‘हम उन पर बहुत जल्दी टैरिफ़ बढ़ा’ सकते हैं.
ट्रंप का ये बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ़ को लेकर बातचीत जारी है. इससे पहले भी ट्रंप दावा कर चुके हैं कि पीएम मोदी ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि भारत रूस से तेल ख़रीद सीमित करेगा.
अमेरिका पहले ही भारत पर 50 फ़ीसदी टैरिफ़ लगा चुका है, जिसमें से 25 फ़ीसदी टैरिफ़ रूस से तेल ख़रीदने की ‘सज़ा’ के तौर पर लगाया गया है.
विपक्षी दलों ने मांगा जवाब
ट्रंप के ताज़ा बयान के बाद विपक्षी दल केंद्र सरकार से जवाब मांग रहे हैं. कांग्रेस ने ट्रंप के बयान को ‘भारत का अपमान’ बताया है.
कांग्रेस ने एक्स पर लिखा, “ट्रंप ने कहा- ‘नरेंद्र मोदी ने मुझे ख़ुश करने के लिए रूस से तेल ख़रीदना बंद कर दिया’ ये भारत का अपमान है. नरेंद्र मोदी को इसका जवाब देना चाहिए, देश को सच्चाई बतानी चाहिए.”
आम आदमी पार्टी ने एक्स पर लिखा, “मोदी जी आपकी चुप्पी देश की इज़्ज़त पर भारी पड़ रही है. आख़िर ऐसा क्या है, जिसके लिए आप ट्रंप को ख़ुश करना चाहते हैं.”
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इमेज कैप्शन, अमेरिका मे रूसी कंपनी रोस्नेफ्ट के अलावा लुकोइल पर भी प्रतिबंध लगाया है
भारत ने रूस से तेल ख़रीदना कम किया
दिसंबर में होने वाली तेल डिलीवरी के आंकड़ों को देखें तो पता चलेगा कि भारतीय तेल कंपनियों ने रूसी कंपनियों से तेल ख़रीदना काफ़ी कम कर दिया है.
ब्लूमबर्ग के मुताबिक़ भारत की पांच बड़ी रिफाइनरी कंपनियों ने दिसंबर महीने के लिए तेल ख़रीद का कोई ऑर्डर नहीं दिया था.
बीते साल अगस्त में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय निर्यात पर 50 फ़ीसदी का टैरिफ़ लगा दिया था.
इसके तुरंत बाद रूस से भारत की तेल ख़रीद बहुत ज्यादा नहीं घटी थी.
लेकिन नवंबर में रूसी तेल कंपनियों रोजनेफ़्ट और लुकोइल पर अमेरिकी प्रतिबंध के बाद भारत की ज्यादातर तेल रिफ़ाइनरियों ने रूस से तेल ख़रीदना लगभग रोक दिया था.
तेल ख़रीद पर रियल टाइम डेटा देने वाली फर्म केपलर के मुताबिक़ भारत ने एक से 17 नवंबर के बीच रूस से हर दिन 6,72,000 बैरल तेल ख़रीदा.
ये अक्तूबर महीने में ख़रीदे गए 18 लाख बैरल प्रति दिन से काफ़ी कम है.
हालांकि दो रूसी तेल कंपनियों पर प्रतिबंध के बाद बाक़ी जगहों पर होने वाला रूस का तेल निर्यात 28 फ़ीसदी तक कम हो गया था.
कहा जा रहा है कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर हो रही बातचीत ने इसमें अहम भूमिका निभाई है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.