जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन अधिनियम 2026 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।

शीर्ष अदालत में एक याचिका दाखिल हुई है जिसमें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की मान्यता, अधिकारों और संरक्षण को नियंत्रित करने वाले विभिन्न प्रविधानों में किए गए संशोधनों को चुनौती दी गई है।

यह याचिका ट्रांसजेंडर पर्सन परिषद के अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी और जैनब जाविद पटेल की ओर से दाखिल की गई है।

31 मार्च को मिली थी राष्ट्रपति की मंजूरी

ट्रांसजेंडर संशोधन कानून को बीते 31 मार्च को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई थी। यह कानून इस बात को पुनर्परिभाषित करता है कि किसे ट्रांसजेंडर व्यक्ति माना जाएगा, साथ ही यह जबरन पहचान परिवर्तन और शारीरिक नुकसान जैसे गंभीर अपराधों से निपटने के लिए दंडात्मक प्रविधानों को भी मजबूत करता है।

हालांकि संशोधित कानून को लेकर विपक्षी दल व एलजीबीटीक्यू समूह सवाल उठा रहे हैं। हितधारकों का कहना है कि संसद में विधेयक पेश करने से पहले उनसे कोई परामर्श नहीं किया गया।

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