डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। डब्ल्यूटीओ में भारत ने मत्स्य पालन सब्सिडी को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए 25 साल की छूट मांगी है। साथ ही गहरे पानी में मछली पकड़ने वाले औद्योगिक बेड़ों पर कड़े नियम और मछली पालन सब्सिडी समझौते के दूसरे चरण के तहत पारंपरिक तरीके से मछली पकड़ने वालों के लिए एक स्थायी छूट की मांग की है।
वाणिज्य मंत्रालय ने रविवार को बताया कि मछली पालन सब्सिडी उन मुख्य विषयों में से एक थी, जिन पर 26-29 मार्च को कैमरून के याउंडे में आयोजित विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में चर्चा की गई। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने उस मंत्रिस्तरीय फैसले को आकार देने में सक्रिय रूप से योगदान दिया, जो मछली पालन सब्सिडी पर दूसरे चरण की बातचीत के भविष्य के मार्ग को निर्धारित करता है।
मछली पालन क्षेत्र भारत की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अहम
वार्ता के दौरान भारत ने कई बार इस बात पर जोर दिया कि दूसरे चरण की बातचीत में समानता के मूल सिद्धांतों का पालन किया जाना चाहिए। गोयल ने कहा कि मछली पालन क्षेत्र भारत की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और आजीविका प्रदान करने में एक अहम भूमिका निभाता है। यह 90 लाख से ज्यादा मछुआरे परिवारों को सहारा देता है, जिनमें ज्यादातर छोटे, पारंपरिक मछुआरे शामिल हैं।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत मछली पकड़ने वाला कोई बड़ा औद्योगिक देश नहीं है और ना ही उसके पास गहरे पानी में मछली पकड़ने वाले बड़े बेड़े हैं और ना ही भारी मशीनों से काम होता है। इतना ही नहीं भारत की मछली पालन सब्सिडी दुनिया में सबसे कम (हर साल प्रति मछुआरा परिवार लगभग 15 डॉलर) है।
मंत्रालय ने कहा, “भारत ने डब्ल्यूटीओ के मंच से इस बात को जोरदार तरीके से रखा कि जो भी फैसले सामने आते हैं, वे निष्पक्ष हों और कमजोर देशों पर उनका कोई बुरा असर नहीं पड़े।”
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)