इमेज स्रोत, Getty Images
मन और शरीर का संबंध हमारी भूख पर प्रभाव डाल सकता है. इसलिए यह सिर्फ़ इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आप क्या खाते हैं, बल्कि इस पर भी कि आप उसके बारे में कैसे सोचते हैं.
दरअसल हम जो खाने की उम्मीद करते हैं, वह भूख और पेट भरने के बारे में दिमाग़ की धारणाओं को प्रभावित करता है.
अगर आपके सामने एक स्वादिष्ट चॉकलेट बार और कम कैलोरी वाला, प्राकृतिक रूप से मीठा किया गया उसका विकल्प रखा जाए, तो आप किसे चुनेंगे?
बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
मिशिगन विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान की प्रोफ़ेसर ऐशली गियरहार्ड्ट कहती हैं, “अल्ट्रा प्रोसेस्ड उत्पाद असल में एक हेवी मेटल कॉन्सर्ट जैसे होते हैं. इन्हें इस तरह डिज़ाइन किया जाता है कि बाकी सब कुछ दब जाए. और ऐसे में लोगों के लिए फल या सब्ज़ी के सूक्ष्म शास्त्रीय संगीत को सुन पाना वाक़ई बहुत मुश्किल हो जाता है.”
लेकिन शोध इस विचार की ओर इशारा करते हैं कि स्वस्थ वज़न बनाए रखने के लिए हमें सिर्फ़ इस पर ध्यान नहीं देना चाहिए कि हम क्या खाते हैं, बल्कि खाने के प्रति हमारा नज़रिया भी अहम है. सच तो यह है कि खाने का आनंद लेना स्वास्थ्य के लिए फ़ायदेमंद है, क्योंकि हमने क्या खाया है इसे लेकर हमारी सोच ही यह तय करती है कि हमें कितनी भूख लगती है.
असंतोषजनक ‘हेल्दी’ मिल्कशेक
अब से 15 साल पहले प्रकाशित एक काफ़ी मशहूर प्रयोग में, वैज्ञानिकों के एक समूह ने पाया कि खाने के बारे में हमारे विचार इस बात को प्रभावित कर सकते हैं कि हमारा शरीर कैसे प्रतिक्रिया करता है.
अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की मनोवैज्ञानिक आलिया क्रम के नेतृत्व में एक टीम ने दिखाया कि अगर प्रतिभागियों को लगता है कि वे ज़्यादा कैलोरी वाला, आनंददायक मिल्कशेक पी रहे हैं, तो उनके शरीर की हार्मोनल प्रतिक्रिया अलग होती है.
दरअसल यह इस बात पर निर्भर करती है कि- वे क्या खा रहे हैं, इसके बारे में वे क्या सोचते हैं, न कि इस पर कि उन्होंने वास्तव में कितनी कैलोरी ली है.
इमेज स्रोत, Getty Images
प्रतिभागियों को एक ही मिल्कशेक दिया गया था, लेकिन कुछ को बताया गया कि यह हेल्दी (स्वास्थ्य के लिए अच्छा) है और इसमें सिर्फ़ 140 कैलोरी हैं, जबकि दूसरों से कहा गया कि यह 620 कैलोरी वाला ‘आनंददायक’ शेक है. हक़ीक़त में वह मिल्कशेक सिर्फ़ 380 कैलोरी का था.
जब प्रतिभागियों को लगा कि वे ‘आनंददायक’ शेक पी रहे हैं, तो उनमें भूख बढ़ाने वाले हार्मोन घ्रेलिन में कहीं ज़्यादा तेज़ गिरावट देखी गई. घ्रेलिन भूख को उत्तेजित करता है और आम तौर पर तब बढ़ता है जब हमें भूख लगती है, और तब घटता है जब हमारा पेट भर जाता है. लेकिन जब उन्हें बताया गया कि वे एक हेल्दी शेक पी रहे हैं, तो घ्रेलिन में गिरावट कम थी.
इससे यह पता चला कि खाने को लेकर उनका नज़रिया और अपेक्षाएं इस बात को बदल देती हैं कि उनका शरीर कैसे प्रतिक्रिया देता है. क्रम कहती हैं, “यह मानना कि आपने काफ़ी खा लिया है, शरीर को ऐसे प्रतिक्रिया देने पर मजबूर करता है जैसे कि उसने सच में काफ़ी खा लिया हो.”
इसलिए बहुत ज़्यादा संयम वाला माइंडसेट स्वस्थ वज़न बनाए रखने में उल्टा असर डाल सकता है. “अगर आप वज़न कम करने की कोशिश में चीनी, वसा और कुल कैलोरी तो घटा देते हैं, लेकिन लगातार खुद को रोकने वाले माइंडसेट में रहते हैं, तो इससे आपका वज़न उतना कम नहीं हो पाएगा, जितना हो सकता था.”
लेबलिंग क्यों मायने रखती है
इमेज स्रोत, Getty Images
लेबलिंग भी फ़र्क़ डालती है. एक अन्य अध्ययन में, प्रतिभागियों से एक प्रोटीन बार खाने को कहा गया, जिस पर या तो ‘स्वादिष्ट’ या ‘हेल्दी’ लिखा हुआ था- जबकि दोनों का पोषण स्तर एक सा था. प्रतिभागियों के एक तीसरे समूह से केवल बार की बनावट का मूल्यांकन करने को कहा गया.
इन सभी अध्ययनों को साथ में देखें, तो ये उन लोगों के लिए अहम संकेत देते हैं जो अपना वज़न कम करना चाहते हैं.
क्रम कहती हैं कि इसके बजाय हमें अपने शरीर पर भरोसा करने और ऐसे खाने के वर्णनों से बचने पर ध्यान देना चाहिए जो कुछ छूटने का एहसास कराते हों, जैसे ‘लाइट’, ‘लो’ या ‘रिड्यूस्ड’. वह कहती हैं, “यह अहसास कि आपको काफ़ी नहीं मिल रहा है, वास्तव में डाइटिंग के असर को उल्टा ही कर सकता है.”
इमेज स्रोत, Getty Images
गियरहार्ड्ट भी इससे सहमत हैं और कहती हैं कि हमारे लिए भोजन को आनंददायक के रूप में सोचना फ़ायदेमंद होगा, न कि केवल पोषक तत्वों और कैलोरी पर ध्यान केंद्रित करना. वह कहती हैं, “जब हम खुद को रोकते हैं, तो यह एक बोझ बन सकता है.”
गियरहार्ड्ट कहती हैं कि इसके बजाय, हमें बिना प्रोसेस किया हुआ भोजन जिसमें प्रोटीन और भरपूर फल व सब्ज़ियां शामिल हों- पर ध्यान देना चाहिए.
“यही वह भोजन है जिसे मानव शरीर को पोषण पाने के लिए बनाया गया है, और जो उसे संतोषजनक व आकर्षक लगता है.”
क्रम का तर्क है कि हम यह सब एक ‘आनंद पाने के भाव’ के साथ भी कर सकते हैं. इसका मतलब है यह सुनिश्चित करना कि आपके शरीर को वही मिल रहा है जिसकी उसे ज़रूरत है, बजाय इसके कि आप केवल संयम बरतने पर ध्यान दें.
क्रम कहती हैं, “ख़ुद पर और अपने शरीर पर भरोसा रखें कि उसे सही समय पर सही चीज़ों की भूख लगेगी.”
संतुलित आहार के साथ-साथ, कभी-कभार कुछ स्वादिष्ट खाना और उसका आनंद लेना, स्वस्थ वज़न बनाए रखने में स्पष्ट रूप से एक भूमिका निभा सकता है.
मेलिसा होगनबूम बीबीसी की वरिष्ठ स्वास्थ्य संवाददाता हैं और ‘ब्रेडविनर्स’ (2025) तथा ‘द मदरहुड कॉम्प्लेक्स’ की लेखिका हैं. वह इंस्टाग्राम पर melissa_hogenboom नाम से मौजूद हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.