डिजिटल गोल्ड ख़रीदने वालों को सेबी ने किया सतर्क- पैसा वसूल
सोना है तो चमकेगा भी, लेकिन पिछले कुछ महीनों में इसकी चमक और तेज़ हुई है. ख़ासकर डिजिटल गोल्ड के रूप में.
मार्केट रेगुलेटर सेबी की चेतावनी के बावजूद भी जेन ज़ी और युवाओं में डिजिटल गोल्ड का क्रेज बढ़ता ही जा रहा है.
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की हाल ही में आई रिपोर्ट से पता चलता है कि सालभर में डिजिटल गोल्ड का चलन 50 फ़ीसदी तक बढ़ गया है.
युवाओं में आख़िर क्या है इस बढ़ते क्रेज की वजह और सेबी को है किस बात का है डर… आज के पैसा वसूल में बात इसी पर.
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के डेटा जो आए हैं, वो चौंकाने वाले हैं. इस साल जनवरी से नवंबर के बीच भारतीय निवेशकों ने करीब 12 टन डिजिटल गोल्ड खरीदा, पिछले साल के मुक़ाबले ये 50 फ़ीसदी ज़्यादा है.
पिछले साल 8 टन डिजिटिल गोल्ड की ख़रीदारी हुई थी. गोल्ड काउंसिल ने ये अनुमान UPI ट्रांजेक्शन के आंकड़ों के आधार पर लगाया है.
नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया यानी एनपीसीआई ने पहली बार ये आंकड़े जारी किए हैं. कीमत की बात करें तो जो डिजिटल गोल्ड ख़रीदा गया है उसकी मार्केट वैल्यू तकरीबन साढ़े 16 हज़ार करोड़ रुपये बैठती है.
जेन ज़ी में डिजिटल गोल्ड को लेकर बढ़ रहे क्रेज की वजह है इसकी ख़रीदारी से जुड़ी सहूलियत. डिजिटल गोल्ड एक ऐसा तरीका है जिससे लोग ऑनलाइन सोना खरीद और बेच सकते हैं.
इसे न संभालकर रखने की टेंशन है और ना ही प्योरिटी को लेकर कोई चिंता. इसकी खासियत यह है कि आप सिर्फ 1 रुपये से भी सोना खरीदना शुरू कर सकते हैं.
यही वजह है कि यह ऐप्स और ऑनलाइन शॉपिंग में माहिर युवा खरीदारों के बीच ये बहुत लोकप्रिय है.
लेकिन नवंबर में सेबी ने एक प्रेस रिलीज जारी कर डिजिटल गोल्ड की ख़रीदारी करने वाले निवेशकों को आगाह किया. सेबी की ओर से जारी एक एडवाइजरी ने निवेशकों को सतर्क कर दिया.
सेबी ने साफ कहा कि डिजिटल गोल्ड न तो उसके द्वारा रेगुलेटेड सिक्योरिटी है और न ही मौजूदा कमोडिटी मार्केट नियमों के दायरे में आता है. सेबी ने बताया कि गोल्ड ETF और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स पूरी तरह रेगुलेशन के तहत आते हैं.
सेबी की इस चेतावनी के बाद इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन यानी IBJA ने डिजिटल गोल्ड के सेल्फ रेगुलेट करने की घोषणा की है.
इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक दिसंबर की शुरुआत में IBJA ने कहा कि वह एक सेल्फ-रेगुलेटरी ऑर्गनाइजेशन SRO बनाएगा.
यह SRO जनवरी से डिजिटल गोल्ड कंपनियों को अपने साथ जोड़ना शुरू करेगा. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहकों का डिजिटल गोल्ड पूरी तरह फिजिकल गोल्ड से बैक्ड हो और उसे सुरक्षित वॉलेट्स में रखा जाए.
इसके साथ ही कंपनियों की नियमित ऑडिटिंग और न्यूनतम नेटवर्थ जैसे नियम भी तय किए जाएंगे.
प्रोड्यूसर: दिनेश उप्रेती
प्रेज़ेंटर: प्रेरणा
शूट-एडिट: जमशैद अली
(बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित)