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स्पेन की जनता को दबाने के लिए 500 साल पहले स्पेनियों ने यूरोप से ऐसे ‘ज़िंदा’ हथियार मंगाए थे जो तलवारों, धनुषों, तोपों और घोड़ों जितने ही भयानक थे. और ये हथियार ‘कुत्ते’ थे.
स्पेन की कई जीतों में उन्होंने कुत्तों की शक्तिशाली ब्रीड को हथियारों के रूप में इस्तेमाल किया जैसे कि स्पेनिश एलानो या जर्मन बुलमास्टिफ़.
इनका इस्तेमाल अपने अभियानों और बस्तियों की रक्षा करने के साथ साथ मूल निवासियों पर हमला करने के लिए किया जाता था.
इन हमलों के दौरान स्थानीय लोगों में डर पैदा करने की रणनीति के रूप में कुत्तों का इस्तेमाल किया गया था.
स्थानीय लोग इस जानवर की छोटी, मिलनसार नस्ल से परिचित थे, लेकिन इतने आक्रामक जानवर को देखकर वे हैरतज़दा रह गए.
पेरू की सेना के कर्नल कार्लोस एनरिक फ़्रेयर ने बीबीसी मुंडो को बताया, “कुत्ता एक हथियार के रूप में काम करता है. कुत्ते के आकार, उसको ट्रेनिंग और उसे संभालने वाले व्यक्ति आदि को मिलाकर एक पूरी प्रक्रिया होती है.”
उनका ताज़ा उपन्यास ‘लैंड ऑफ डॉग्स’, एक ‘डॉग हैंडलर’ की कहानी है. जिसकी ज़िम्मेदारी पेरू विजय के दौरान स्पेनिश सैन्य दल की रक्षा करने वाले कुत्तों के एक समूह को ट्रेनिंग देने और उनकी रक्षा करने की थी.
सदियों से कुत्ते इतने महत्वपूर्ण क्यों रहे हैं?
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स्पेनिश सेना में कुत्तों के इस्तेमाल पर बहुत कम दस्तावेज़ उपलब्ध हैं और उनकी बहुत कम तस्वीरें मिल पाती हैं.
फ़्रेयर का कहना है कि उत्तर पश्चिमी पेरू के टुम्बेस शहर की यात्रा के दौरान उन्हें इस विषय में दिलचस्पी पैदा हुई.
वहां उन्होंने उस समय के कई इतिहासकारों की किताबें बढ़ीं, जिन्होंने स्थानीय संस्कृति का गहन अध्ययन किया था और लड़ाई के दौरान किए गए अत्याचारों का भी ज़िक्र किया था.
लेखक लिखते हैं, “वे इन कुत्तों के बारे में बात करते हैं और उनके नाम बताते हैं. कई मामलों में वे उनकी विशेषताओं का भी वर्णन करते हैं. ये कुत्ते टुम्बस पहुंचे और उन्होंने वहां रहने वाले लोगों का सफ़ाया कर दिया.”
ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित अपने काल्पनिक उपन्यास में, टोमास डी जेरेज़, बाल्डोमेरो नामक एक प्रभावशाली डॉग ट्रेनर बन जाते हैं.
हालांकि, अमेरिका की शुरुआती खोज के दौरान, सैन्य लीडर वास्को नुएस्ट्रो डी बाल्बोआ के पास कुत्ते थे. इनमें लियोसिंको नाम का एक स्पेनिश मास्टिफ़ भी शामिल था.
लियोसिंको असल में बेसेरिल नामक कुत्ते का ब्रीड था, जिसे सैन्य नेता जुआन पोंस डी लियोन हिस्पानियोला द्वीप और वर्तमान प्यूर्टो रिको के अपने अभियान के दौरान अपने साथ ले गए थे.
16वीं शताब्दी के पूर्वार्ध में मूल अमेरिकी क्षेत्रों की खोज और उपनिवेशीकरण के शुरुआती दिनों से ही कुत्तों का बहुत महत्व था.
जंग में कुत्तों का इस्तेमाल कब शुरू हुआ?
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अमेज़न इलाक़े की खोज करते समय, स्पेनवासी अपने साथ 2,000 कुत्ते ले गए थे.
‘इंका साम्राज्य’ पर विजय प्राप्त करने के अभियान का नेतृत्व करने वालों में फ्रांसिस्को पिजारो भी थे. जिन जगहों से वो होकर गुज़रे उनमें से एक टुम्बेस भी था.
फ्रेयर कहते हैं, “आम धारणा से उलट उनके पास इतने घोड़े नहीं थे. इसके अलावा, बंदूकें और पिस्तौल जैसे हथियार आज की तुलना में बहुत कम उपलब्ध थे. जहाँ बंदूकें, तलवारें या घोड़े नहीं जा सकते थे, वहाँ कुत्ते जा सकते थे.”
कुत्तों के प्रशिक्षकों ने उन्हें स्थानीय लोगों में छोड़ दिया जो यूरोप से लाए गए इतने बड़े और आक्रामक रूप से प्रशिक्षित कुत्तों की नस्लों से अपरिचित थे.
उन्होंने बताया, “ये स्पेनिश कुत्ते बहुत बड़े थे. इसलिए स्थानीय लोगों को लगा कि ये कुत्ते नहीं, बल्कि शेर हैं.”
जंग के मैदान में कुत्ते कैसे ज़िंदा रहते थे?
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कुत्तों के झुंड का इस्तेमाल केवल इंका साम्राज्य तक ही सीमित नहीं था, बल्कि कैरेबियन, मध्य अमेरिका और मेसोअमेरिका के कई क्षेत्रों में इसका प्रचलन था.
जनजातीय प्रतिरोध को दबाने और दंडित करने के लिए कुत्तों का इस्तेमाल किया जाता था.
‘द मैग्निफिसेंट लॉर्ड अलोंसो लोपेज़, मेयर ऑफ सांता मारिया डे ला विक्टोरिया एंड इंडियन डॉग किलर’ नामक पुस्तक मैक्सिको के राष्ट्रीय स्वायत्त विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित की गई है.
इसमें लिखा है, “सोलहवीं शताब्दी के मध्य में, कुआटल डी अमिततान को धूम्रपान और मूर्ति पूजा करने, शैतान का आह्वान करने, धार्मिक वस्तुओं को न रखने या ईसाई धर्म का सम्मान न करने, चर्च की स्वच्छता की उपेक्षा करने और अपने शहर के निवासियों को धर्म में भाग न लेने का आदेश देने के लिए कुत्तों द्वारा मारे जाने और जलाए जाने की सज़ा सुनाई गई थी.”
इतिहासकार मिगुएल लियोन पोर्टिला ने ‘द डेस्टिनी ऑफ़ द वर्ड’ में वर्तमान मेक्सिको के स्वदेशी लोगों की कहानियाँ भी लिखी हैं.
एक कहानी में बताया गया, “और उनके कुत्ते बहुत-बहुत बड़े हैं. उनके बड़े जबड़े कांपते हैं, उनकी आंखें सूजी हुई हैं, उनकी आंखें कोयले की तरह पीली हैं, उनके पेट पतले, झुर्रीदार हैं, मांस रहित पेट हैं, वे बहुत बड़े हैं, वे शांत नहीं हैं, वे हांफते हुए दौड़ते हैं, उनकी जीभ बाहर निकली रहती है, उनके शरीर पर जगुआर जैसे धब्बे हैं, अलग-अलग रंगों के धब्बे.”
फ्रेयर ने ‘लैंड ऑफ डॉग्स’ को पेरू में केंद्रित करने की कोशिश की है. उनका मानना है कि प्राचीन काल की कठोर कहानियों को नियंत्रण में रखना महत्वपूर्ण है.
लेखक ने कहा, “पाठ में हिंसा का उपयोग वर्णनात्मक है, लेकिन इतना अधिक नहीं कि लोग किताब बंद करके कहें, ‘यह कितना घिनौना है.’ कुछ संतुलन होना आवश्यक था.”
काम ख़त्म करने के बाद कुत्तों का क्या हुआ?
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क्षेत्रों और आबादी पर प्रभुत्व स्थापित करने के बाद, इन कुत्तों ने अपना मूल उद्देश्य खो दिया और समय के साथ स्पेनियों के लिए सिरदर्द बन गए.
चूंकि उन्हें मज़दूरों की ज़रूरत थी, जिनमें ग़ुलाम मज़दूर भी शामिल होते, इसलिए स्थानीय आबादी को और नष्ट करना संभव नहीं था और कुत्तों की मौजूदगी और उनकी आक्रामकता एक समस्या बन गई.
फ्रेयर बताते हैं कि स्पेन में राजशाही द्वारा अमेरिका के विभिन्न कमांडरों को पत्र भेजे गए थे, जिसमें उनसे आगे की समस्याओं से बचने के लिए कुत्तों को ख़त्म करने के लिए कहा गया था.
“उन्होंने देखा था कि अगर उन्हें स्वतंत्र छोड़ दिया गया तो वे स्पेनियों और मूल निवासियों दोनों से झुंड में लड़ेंगे, और इसीलिए कुत्तों द्वारा किए गए नुकसान के संबंध में क़ानून पेश किए गए थे.”
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हालांकि, कई वर्षों के प्रशिक्षण और एक साथ लड़ने के दौरान, उनके प्रशिक्षकों का अपने कुत्तों के साथ एक विशेष बॉन्ड विकसित हो गया था जो ‘लैंड ऑफ़ डॉग्स’ की कहानी में भी दिखता है.
फ्रेयर के अनुसार, “इस कुत्ते और इसे पालने वाले सैनिक के बीच बहुत गहरा रिश्ता है.”
परिणामस्वरूप, कुछ लोगों के लिए शाही आदेशों के बावजूद अपने प्यारे कुत्ते को छोड़ना अकल्पनीय था.
आदिवासी क्षेत्रों में स्पेनिश शासन के मज़बूत होने के साथ, कुत्तों ने धीरे-धीरे युद्ध के हथियार के रूप में अपना दर्जा खो दिया और स्वदेशी लोगों को गुलाम बनाने में उनकी भूमिका भूली बिसरी बात हो गई.
धीरे-धीरे उनकी भूमिका सुरक्षा और सहायता तक सीमित रह गई.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.