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तलाशी-जब्ती की पूर्व सूचना देने से आइटी अधिकारियों को व्यावहारिक दिक्कतें होंगी : सुप्रीम कोर्ट

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Feb 11, 2026


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को डिजिटल युग में जांचकर्ताओं को होने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों पर जोर दिया और कहा कि तलाशी और जब्ती से पहले पूर्व सूचना देने से जांच शुरू होने से पहले ही समाप्त हो सकती है। सुबूत मिटाए जा सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट एक जनहित याचिका की सुनवाई कर रहा था, जिसमें आयकर अधिनियम की धारा 132 के तहत तलाशी और जब्ती शक्तियों के दायरे को यह कहते हुए चुनौती दी गई थी कि इसका दुरुपयोग होने की संभावना है।

आयकर अधिनियम की धारा 132 आयकर अधिकारियों को तलाशी लेने और जब्ती करने का अधिकार देती है जब उनके पस इस बात का पर्याप्त सुबूत हो कि किसी व्यक्ति के पास अघोषित आय, संपत्ति या दस्तावेज हैं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने पीआइएल याचिकाकर्ता विश्वप्रसाद अल्वा के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े द्वारा प्रस्तुतियों को कुछ समय तक सुना और बाद में इसे दो सप्ताह के लिए विचार के लिए स्थगित कर दिया।

न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि पूर्व नोटिस देने से जांच का उद्देश्य ही विफल हो सकता है क्योंकि इलेक्ट्रानिक साक्ष्य को आसानी से नष्ट किया जा सकता है।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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