जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में भारी उछाल की वजह से सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां (ओएमसी) भारी अंडर रिकवरी यानी घाटा झेल रही हैं।
पेट्रोल पर प्रति लीटर 24.40 रुपये, डीजल पर प्रति लीटर 104.99 रुपये और घरेलू एलपीजी पर प्रति सिलेंडर 380 रुपये का घाटा हो रहा है। मई के अंत तक इन तीनों उत्पादों पर कंपनियों का कुल घाटा लगभग 40,484 करोड़ रुपये पहुंचने की आशंका है।
पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बुधवार को स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक माह में 100 प्रतिशत तक की तेजी के बावजूद देश में सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतें अपरिवर्तित रखी गई हैं।
सामान्य पेट्रोल व डीजल की कीमतों में कंपनियों की तरफ से तकरीबन चार वर्षों से कोई बदलाव नहीं किया गया है, जबकि दुनिया के कई देशों में इनकी कीमतें 30-50 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। कुछ ऐसी ही स्थिति एलपीजी बाजार की भी है।
सऊदी कान्ट्रैक्ट प्राइस मार्च के 542 डॉलर प्रति मीट्रिक टन से बढ़कर अप्रैल में 780 डालर प्रति मीट्रिक टन हो गया है। इसके पीछे वजह वैश्विक एलपीजी आपूर्ति का 30 प्रतिशत तक होमुर्ज स्ट्रेट में फंस जाना है। वैसे पिछले दो वर्षों से एलपीजी का कारोबार तेल कंपनियों के लिए घाटे का सौदा हो गया है।
पिछले साल भी एलपीजी से कुल 60,000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था जिसमें सरकार व तेल कंपनियों ने 30-30 हजार करोड़ रुपये का बोझ उठाया था। आम चुनाव 2024 से पहले केंद्र सरकार ने एलपीजी सिलिंडर पर दोबारा से सब्सिडी देने का फैसला किया था।
इस बार भी कंपनियां और सरकार मिलकर घाटा उठा रही हैं। देश में 33.5 करोड़ एलपीजी कनेक्शन हैं। इसमें 10 करोड़ कनेक्शन उज्जवला योजना के तहत हैं। इन सभी को 300 रुपये प्रति सिलिंडर की सब्सिडी मिलती है।
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत में घरेलू एलपीजी की कीमत दुनिया में सबसे कम है। पाकिस्तान में यह 1,046 रुपये, श्रीलंका में 1,242 रुपये और नेपाल में 1,208 रुपये है। पश्चिम एशिया में चल रहे विवाद के कारण देश के कई हिस्सों में पेट्रो उत्पादों की कमी की खबरें भी सामने आई हैं।