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ईरान सत्ता विरोधी प्रदर्शनों को रोकने के लिए कई क़दम उठा रहा है. इसके तहत तेहरान की सड़कों पर चेकपॉइंट बनाए जा रहे हैं, इंटरनेट पर पाबंदी लगाई जा रही है और आम लोगों को सामूहिक रूप से चेतावनी संदेश भेजे जा रहे हैं.
तेहरान में मौजूद लोगों ने बीबीसी को बताया है कि शहर में कई नई सुरक्षा चौकियां बनाई गई हैं. लोगों का कहना है कि इन चौकियों पर उन्हें रोका जाता है और उनकी तलाशी ली जाती है.
उन्होंने बीबीसी फ़ारसी को बताया है कि कुछ चौकियां पैदल पुलों के नीचे और सुरंगों के अंदर मौजूद सड़कों में स्थित हैं. इन रिपोर्टों के बाद कि सड़कों के बीच में स्थित कई चौकियों को ड्रोन हमलों का निशाना बनाया गया था.
ईरान की कट्टरपंथी फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी ने 11 मार्च को बताया कि तेहरान भर में चार चौकियों पर इसराइली हमलों में कई ईरानी सुरक्षाकर्मी मारे गए.
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फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक़ अनौपचारिक आंकड़ों से पता चलता है कि राजधानी के चार ज़िलों में हुए हमलों में सुरक्षा बलों के लगभग 10 सदस्य मारे गए.
बीबीसी से बात करते हुए, बीस साल के एक युवक ने चेकपॉइंट से निकलने की अपनी रणनीति के बारे में बताया. युवक ने बीबीसी को बताया कि उसे एक बार रोका गया था और उसकी कार की तलाशी ली गई थी.
उन्होंने कहा, “मैंने उनसे ‘आपकी मेहनत के लिए धन्यवाद’ जैसी बातें कहना शुरू कर दिया. मानो वे सचमुच बहुत मेहनत कर रहे हों और मैं उसकी सराहना करता हूं.”
इस तरह बात करने के बाद सुरक्षा बलों ने तलाशी ली और युवक को जाने दिया.
एक युवती ने बीबीसी को बताया, “मैं हमेशा रंगीन कपड़े पहनती हूँ लेकिन अब नहीं पहनती. मुझे उनकी गश्त से डर लगता है, मुझे चिंता है कि अगर मैंने कुछ ज़्यादा चमकीला पहना तो कहीं उन्हें ग़ुस्सा न आ जाए.”
इंटरनेट पर पाबंदी के कारण आ रही दिक़्क़तें
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क़रीब बीस वर्षीय एक अन्य व्यक्ति लोगों को ‘सुरक्षित इंटरनेट कनेक्शन’ बेचता है. इससे लोग सरकार के ब्लैकआउट को चकमा देते हुए इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं.
युद्ध की शुरुआत से ही जारी इंटरनेट में रुकावट के दौरान ईरान के भीतर लोगों से संपर्क करना बहुत मुश्किल है. लेकिन तेहरान में कुछ लोग स्पेसएक्स के स्टारलिंक उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं और अपना इंटरनेट कनेक्शन दूसरों के साथ साझा कर रहे हैं.
इंटरनेट तक पहुंच प्रतिबंधित करने से न केवल बाहरी दुनिया से संचार बाधित होता है, बल्कि प्रदर्शनकारियों की एकजुट होने, योजना बनाने और आपस में संपर्क करने की क्षमता भी घटती है.
एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स और प्लेटफॉर्म अक्सर रैलियों के आयोजन, विरोध प्रदर्शन स्थलों की जानकारी साझा करने और कार्रवाई के आह्वान की जानकारी देने में मदद करते हैं.
जब ये प्लेटफॉर्म उपलब्ध नहीं होते हैं, तो समन्वय करना कहीं अधिक कठिन हो जाता है.
इंटरनेट कनेक्शन बेचने वाले व्यक्ति ने बीबीसी को बताया कि जब वह टैक्सी में यात्रा करने के दौरान तेहरान की एक सुरंग में बने चेकपॉइंट से गुज़रा तो उसे कितना डर लगा.
उसने बताया, “मैं जो काम करता हूँ, उसे इस्लामी गणराज्य में अपराध माना जाता है. मैं बहुत चिंतित था, क्योंकि मेरे पास मेरा लैपटॉप और फोन था.”
“खुशकिस्मती से उन्होंने टैक्सी की तलाशी नहीं ली.”
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12 मार्च को अर्ध-सरकारी मेहर न्यूज़ एजेंसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, ईरानी पुलिस ने दक्षिणी फ़ार्स प्रांत में एक व्यक्ति को स्टारलिंक के ज़रिए “अनफ़िल्टर्ड” इंटरनेट बेचने के लिए एक नेटवर्क बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया था.
फ़ार्स प्रांत पुलिस के एक डिप्टी कमांडर ने कहा है कि 37 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया गया है जिसने “स्टारलिंक के माध्यम से बिना फ़िल्टर वाला इंटरनेट बेचने के लिए देश के कई प्रांतों में एक नेटवर्क स्थापित किया था.”
डिप्टी कमांडर ने बताया कि “संदिग्ध के ठिकाने से एक स्टारलिंक डिवाइस और संबंधित उपकरण बरामद किए गए हैं.”
ईरान में स्टारलिंक का इस्तेमाल करने पर दो साल तक की जेल की सज़ा हो सकती है और कथित तौर पर अधिकारी लोगों को इंटरनेट से जुड़ने से रोकने के लिए स्टारलिंक डिश की तलाश कर रहे हैं.
सरकारी प्रवक्ता फ़ातिमेह मोहजेरानी ने 10 मार्च को कहा कि अधिकारी उन लोगों के लिए इंटरनेट सेवा बहाल करने पर काम कर रहे हैं जो देश की आवाज़ को दुनिया तक पहुंचा सकते हैं.
फिलहाल, बीबीसी ने जो टेलीग्राम मैसेजिंग ऐप संदेश देखे हैं उनके मुताबिक एक गीगाबाइट डेटा की क़ीमत लगभग 6 डॉलर (क़रीब 600 रुपये) है.
ईरान जैसे देश में ये काफ़ी अधिक कीमत है जहां औसत मासिक वेतन 200 से 300 डॉलर (20 से 30 हज़ार रुपये) के बीच होने का अनुमान है.
हालांकि ईरान में घरेलू स्तर पर उपलब्ध ऐप्स अभी भी मौजूद हैं, लेकिन बीबीसी ने जिन लोगों से बात की, उनमें से कुछ को डर है कि विरोध प्रदर्शनों को आयोजित करने के लिए ये ऐप्स, एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म जितने सुरक्षित नहीं हो सकते हैं.

15 मार्च को बीबीसी के अमेरिकी सहयोगी सीबीएस के साथ एक इंटरव्यू के दौरान, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची से पूछा गया कि जब उनके देशवासियों को इंटरनेट का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है, तो वह ज़ूम के माध्यम से कैसे बात कर पा रहे हैं?
उन्होंने जवाब दिया, “ऐसा इसलिए है क्योंकि मैं सभी ईरानियों की आवाज़ हूं. मैं उनके अधिकारों की रक्षा करता हूं.”
अधिकारियों के अलावा, देश के भीतर कई पत्रकारों के पास तथाकथित “सफेद सिम कार्ड” हैं, जो उन्हें बिना प्रतिबंध वाली इंटरनेट सुविधा उपलब्ध करवाते हैं.
राजधानी के कुछ निवासियों ने बीबीसी फ़ारसी को बताया कि युद्ध की शुरुआत से ही, रात में उन्हें लाउडस्पीकरों पर सत्ता के समर्थन में नारे और गाने सुनाई देते हैं, जबकि समर्थक इस्लामी गणराज्य का झंडा लेकर सड़कों पर घूमते हैं.
बीबीसी पर्शियन, बीबीसी न्यूज की फ़ारसी भाषा की सेवा है, जिसका उपयोग दुनिया भर में 2.4 करोड़ लोग करते हैं. इनमें से अधिकांश ईरान में रहते हैं. हालांकि ईरानी अधिकारी बीबीसी फ़ारसी को नियमित रूप से ब्लॉक और जाम करते रहते हैं.
प्रदर्शन न करने की हिदायत देते संदेश
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अभी तक जनवरी में हुए जनविरोधी प्रदर्शनों जैसे बड़े पैमाने पर लोगों के सड़कों पर उतरने के कोई संकेत नहीं मिले हैं. अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी (एचआरएएनए) ने पुष्टि की है कि जनवरी के प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 7,000 नागरिकों की मौत हुई थी.
28 फ़रवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से, ईरानी अधिकारियों ने सत्ता समर्थक रैलियों का आयोजन किया है और समर्थकों से सड़कों पर उतरने का आग्रह किया है ताकि देश को भीतर से अस्थिर करने के प्रयासों को रोका जा सके.
बीबीसी फ़ारसी ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) की खुफिया इकाई का 13 मार्च को भेजा गया एक टेक्स्ट संदेश देखा है, जिसमें विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ चेतावनी दी गई है.
उस मैसेज में लिखा था, “दुष्ट दुश्मन एक बार फिर सड़कों पर भय और अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहा है. नव इस्लामिक स्टेट को 8 जनवरी से भी बड़ा झटका लगने वाला है.”
ईरान में सत्ता विरोधी व्यापक प्रदर्शनों की सबसे घातक रातों में 8 और 9 जनवरी की दो रातें थीं.
ईरान के पुलिस प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल अहमद रज़ा रादान ने 10 मार्च को कहा कि ‘दुश्मन के इशारे पर शहरों में कार्रवाई करने की कोशिश करने वाले’ किसी भी व्यक्ति को अब प्रदर्शनकारी नहीं बल्कि “दुश्मन” माना जाएगा.
आठ मार्च को, इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने ईरानी जनता को एक सीधा संदेश जारी कर उनसे सरकार के ख़िलाफ़ खड़े होने का आग्रह किया था.
लेकिन 12 मार्च को अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नेतन्याहू ने कहा कि वह ‘निश्चित रूप से यह नहीं कह सकते कि ईरानी जनता शासन को गिरा देगी.’
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.