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तो इसलिए अचानक लौट आई ठंड… दिल्ली से राजस्थान तक बदला मौसम, यूपी-पंजाब में भी गिरा पारा

Byadmin

Mar 24, 2026


अरविंद शर्मा, नई दिल्ली। मार्च के दूसरे पखवाड़े में उत्तर भारत का मौसम तेजी से बदला है। आगे भी ऐसी स्थितियां जारी रह सकती हैं। इस महीने के प्रारंभ में गर्मी के तेजी से बढ़ने का संकेत मिलने लगा था, मगर मध्य मार्च के आते-आते बारिश, आंधी और तेजी से गिरते तापमान ने मौसम को पूरी तरह बदल दिया है।

मौसम वैज्ञानिक इसे सामान्य उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि कई अलग-अलग प्राकृतिक कारणों (मल्टी-फैक्टर क्लाइमेट इवेंट) को समग्रता में देख रहे हैं। जेट स्ट्रीम, भूमध्य सागर की नमी, आर्कटिक वॉर्मिंग और ला-नीना जैसे प्रमुख कारक एक साथ सक्रिय हो गए हैं। भारत मौसम विभाग (आईएमडी) का मानना है कि आगे भी मौसम में ऐसी अनिश्चितता बनी रह सकती है।

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सामान्य से पांच डिग्री तक नीचे चला गया तापमान

मार्च के प्रारंभ में तेजी से बढ़ते तापमान के चलते एकबारगी ऐसा लगने लगा था कि इस बार बहुत तेज गर्मी का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन ऐसी स्थिति ज्यादा दिनों तक नहीं रह पाई। दो हफ्ते बाद ही दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत उत्तर भारत के एक बड़े क्षेत्र में बादल, बारिश और तेज हवाओं ने माहौल को पूरी तरह ठंडा कर दिया।

कई इलाकों में तापमान सामान्य से पांच डिग्री तक नीचे चला गया, जिससे मार्च में ही ठंड का अहसास होने लगा। मौसम विज्ञानियों के अनुसार इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण लगातार सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ हैं। एक के बाद एक कई सिस्टम उत्तर भारत में पहुंच रहे हैं, जिससे बादल बनने और बारिश होने की प्रक्रिया की पुनरावृत्ति हो रही है। यही वजह है कि मौसम स्थिर नहीं हो पा रहा और बार-बार बदल रहा है।

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सिर्फ पश्चिमी विक्षोभ ही नहीं वजह

हालांकि, वैज्ञानिक इसे केवल पश्चिमी विक्षोभ तक सीमित नहीं मान रहे। इसके पीछे वैश्विक स्तर पर हो रहे बदलाव को भी बड़ा कारण बता रहे हैं। इनमें जेट स्ट्रीम का दक्षिण की ओर खिसकना है। सामान्य स्थिति में यह हिमालय के ऊपर बहती है, लेकिन इस बार इसके नीचे आने से पश्चिमी विक्षोभ सीधे उत्तर भारत में प्रवेश कर रहे हैं और मौसम पर गहरा असर डाल रहे हैं।

भूमध्यसागर क्षेत्र में बढ़ी हुई नमी भी ईरान से लेकर पाकिस्तान और भारत के मौसम पर फर्क डाल रहा है। वहां समुद्र का तापमान सामान्य से अधिक रहने के कारण बनने वाले मौसम तंत्र अधिक ताकतवर हो रहे हैं। यही सिस्टम भारत पहुंचकर आंधी के साथ बारिश को तेज कर दे रहा है। आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती गर्मी को भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है, जिसे आर्कटिक एम्प्लीफिकेशन कहा जाता है।

वैश्विक मौसम प्रणाली में अस्थिरता बढ़ी

इससे वैश्विक स्तर पर ठंडी और गर्म हवाओं का संतुलन बिगड़ रहा है। जेट स्ट्रीम में लहरें बढ़ रही हैं, जिससे मौसम का पैटर्न अधिक अस्थिर और अनिश्चित होता जा रहा है। ला-नीना की कमजोर होती स्थिति को भी मौसम परिवर्तन से जोड़कर देखा जा रहा है। ला-नीना अब न्यूट्रल स्थिति की ओर बढ़ रहा है। इस संक्रमण के दौरान वैश्विक मौसम प्रणाली में अस्थिरता बढ़ जाती है, जिसका असर भारत सहित कई क्षेत्रों में दिखाई देता है।

मौसम विभाग का मानना है कि आने वाले दिनों में भी पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रह सकते हैं, जिससे तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश की स्थितियां बनी रह सकती हैं। मार्च में अभी हफ्ते भर से ज्यादा समय शेष है। इस दौरान दो पश्चिमी विक्षोभ के आने की संभावना है। अप्रैल की शुरुआत में भी सिलसिला बरकरार रह सकता है, जो हीट वेव को नियंत्रण में रख सकता है।

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