पीटीआई, नई दिल्ली। देशभर के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के मामले में केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया कि अगले दो सप्ताह के भीतर इससे जुड़ी सभी समस्याओं और तकनीकी बाधाओं को सुलझा लिया जाएगा।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के समक्ष अटार्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से इस मामले की समीक्षा कर रहे हैं और जल्द ही इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
केरलम मॉडल अपनाने पर जोर सुनवाई के दौरान पीठ ने केंद्र से कहा कि वह सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक समान दिशानिर्देश जारी करने पर विचार करे।
कोर्ट ने विशेष रूप से केरलम के सॉफ्टवेयर और मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि जब वहां एक सफल सिस्टम और सेंट्रलाइज्ड डैशबोर्ड मौजूद है, तो अन्य राज्य अलग से पैसा और समय क्यों खर्च करें?
कोर्ट ने सुझाव दिया कि मध्य प्रदेश और राजस्थान की तरह अन्य राज्यों को भी केरलम का अनुसरण करना चाहिए। केंद्रीय गृह सचिव की पेशी सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेश के अनुपालन में केंद्रीय गृह सचिव भी कोर्ट में उपस्थित हुए।
हालांकि, अटार्नी जनरल के आश्वासन के बाद कोर्ट ने कहा कि भविष्य में उनकी व्यक्तिगत पेशी की आवश्यकता तब तक नहीं होगी जब तक विशेष निर्देश न दिए जाएं।
कोर्ट ने न्यायमित्र सिद्धार्थ दवे को अगली सुनवाई (28 अप्रैल) तक ताजा स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकने के लिए कुछ महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे।
अब कोर्ट का जोर इसके पूर्ण और प्रभावी कार्यान्वयन पर है। निर्देशों के अनुसार, सीसीटीवी में नाइट विजन और आडियो रिकार्डिंग अनिवार्य है। फुटेज का बैकअप कम से कम एक वर्ष तक सुरक्षित रखना होगा।
कैमरे थानों के प्रवेश-निकास द्वार, लाक-अप, कोरिडोर और रिसेप्शन सहित हर कोने में होने चाहिए। जांच एजेंसियों (सीबीआइ, ईडी, एनआइए) के कार्यालयों में भी उपकरण लगाना अनिवार्य है।