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दक्षिण भारत में राज्यपालों और राज्य सरकारों का टकरावः क्या यह नई शुरुआत है?

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Jan 30, 2026


कर्नाटक विधानसभा की फ़ाइल फ़ोटो

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, पिछले हफ़्ते कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने विधानसभा के संयुक्त सत्र में अपना अभिभाषण बीच में ही रोक दिया था (फ़ाइल फ़ोटो)

पिछले हफ़्ते कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने तमिलनाडु और केरल के अपने समकक्षों की तरह विधानसभा के संयुक्त सत्र में अपना अभिभाषण बीच में ही रोक दिया. इस घटना ने राजनीतिक और संविधान विशेषज्ञों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि कहीं यह कोई नया ‘पैटर्न’ तो नहीं बन रहा.

गहलोत का यह कदम कई लोगों के लिए चौंकाने वाला था, क्योंकि जब पश्चिम बंगाल के तत्कालीन राज्यपाल जगदीप धनखड़ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल रहे थे और तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के साथ विधायी बिलों को लेकर टकराव की स्थिति में थे, तब उन्होंने संयम बनाए रखा था.

लेकिन पिछले हफ़्ते महज़ तीन दिनों के भीतर दक्षिण भारत के तीन राज्यों के राज्यपालों ने लगभग एक जैसा रुख़ अपनाया. गहलोत ने रवि की राह पकड़ते हुए मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित परंपरागत अभिभाषण पढ़ने से इनकार कर दिया और जब तक हैरान-परेशान अधिकारी राष्ट्रीय गान बजवाने का संकेत देते, वह बाहर निकल गए.

केरल के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने तो इससे भी आगे बढ़कर अभिभाषण के कुछ पैराग्राफ़ अपनी ओर से बदल दिए. इसके चलते मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने अभूतपूर्व कदम उठाते हुए विधानसभा के रिकॉर्ड में दर्ज कराने के लिए वे हिस्से खुद पढ़े जिन्हें राज्य मंत्रिमंडल ने विशेष रूप से मंज़ूरी दी थी. बीते रविवार को यह टकराव और गहरा गया.

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