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दीपम विवाद: ‘अनादर करने का कोई इरादा नहीं था’, मदुरै कलेक्टर ने कोर्ट से मांगी बिना शर्त माफी

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Feb 3, 2026


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मदुरै के ऐतिहासिक तिरुपरनकुंड्रम पहाड़ी पर कार्तिकई दीपम जलाने के अदालती आदेश की अनदेखी जिला प्रशासन को भारी पड़ गई है। सोमवार को मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै बेंच के समक्ष जिला कलेक्टर प्रवीण कुमार ने अवमानना मामले में बिना शर्त माफीनामा दायर किया।

अपने जवाब में दिए गए हलफनामे में जिला कलेक्टर ने कहा कि अदालत के आदेश का उल्लंघन या अनादर करने का कोई इरादा नहीं था।

दरअसल, अवमानना याचिकाएं न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन द्वारा 1 दिसंबर को पारित एक आदेश के अनुपालन न करने के कारण दायर की गई हैं, जिसमें निर्देश दिया गया था कि कार्तिकई दीपम को न केवल उसके पारंपरिक स्थान पर, जहां इसे एक सदी से अधिक समय से प्रज्वलित किया जाता रहा है, बल्कि एक दरगाह के निकट पहाड़ी की चोटी पर स्थित स्तंभ पर भी प्रज्वलित किया जाए।

3 दिसंबर को जारी एक निर्देश के अनुसार याचिकाकर्ता और दस अन्य लोगों को सीआईएसएफ की सुरक्षा में पहाड़ी पर जाकर दीपक जलाने की अनुमति दी गई। लेकिन जिला प्रशासन ने निषेधाज्ञा लागू कर दी। अगले दिन निषेधाज्ञा रद्द कर दी गई और याचिकाकर्ता को राज्य पुलिस के साथ दीपक जलाने की अनुमति दी गई।

हालांकि, इसकी भी अनुमति नहीं दी गई और सरकार ने आदेश को चुनौती देने की बात कही।

इसके चलते याचिकाकर्ता रामारविकुमार और अरसापांडी ने मदुरै जिला कलेक्टर प्रवीण कुमार, शहर पुलिस आयुक्त लोगनाथन, उपायुक्त इनिगो दिव्यान, मंदिर के कार्यकारी अधिकारी यज्ञ नारायणन और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) डेविडसन देवसिरवथम के खिलाफ अवमानना याचिकाएं दायर कीं।

अनादर करने का कोई इरादा नहीं था

अपने हलफनामे में जिला कलेक्टर ने कहा कि अदालत के आदेश का उल्लंघन या अनादर करने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने कहा कि धारा 144 पूरी तरह से कानून व्यवस्था बनाए रखने के हित में लागू की गई थी, क्योंकि खुफिया जानकारी मिली थी कि हिंदू समूह विरोध प्रदर्शन की योजना बना रहे थे और सांप्रदायिक तनाव की वास्तविक संभावना थी।

प्रशासन के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किया और बैरिकेड्स फेंके, जिसके कारण अधिकारियों को किसी भी अप्रिय घटना को रोकने और श्रद्धालुओं और आम जनता की सुरक्षा के लिए कार्रवाई करनी पड़ी।

पुलिस ने अदालत को बताया कि 3 दिसंबर को थिरुपरनकुंड्रम में सैकड़ों लोग जमा हुए थे, जिनमें से लगभग 1,000 से 1,500 लोगों ने पहाड़ी पर चढ़ने का प्रयास किया, जिससे भीड़ को नियंत्रित करना बेहद मुश्किल हो गया था। उन्होंने दोहराया कि उनका उद्देश्य न्यायपालिका का उल्लंघन करना नहीं बल्कि हिंसा को रोकना था।

कलेक्टर के निर्णय की निंदा

सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन ने तीखी टिप्पणियां करते हुए सवाल उठाया कि जिला कलेक्टर ने स्पष्ट न्यायिक निर्देश के बावजूद धारा 144 कैसे लागू की। उन्होंने कहा कि पुलिस आयुक्त, उपायुक्त और मंदिर के कार्यकारी अधिकारी को क्षमा किया जा सकता है, लेकिन साथ ही उन्होंने जिला कलेक्टर के इस निर्णय पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए अदालत के आदेश के बावजूद निषेधाज्ञा जारी करने की “दुस्साहस” की निंदा की।

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