डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। उत्तर भारत समेत देशभर में ठंड दस्तक देने लगी है। इसी के साथ प्रदूषण का स्तर भी बढ़ने लगा है. देश के प्रमुख शहरों में वायु गुणवत्ता का ताजा आकलन सामने आया है इसमें कुछ राहत भरी तस्वीर भी देखने को मिली है।
चेन्नई और हैदराबाद में हवा की गुणवत्ता अपेक्षाकृत अच्छी बनी हुई है। चेन्नई का AQI 81 और हैदराबाद का 71 दर्ज किया गया, जिससे दोनों शहर ‘संतोषजनक’ श्रेणी में बने हुए हैं। बेंगलुरु में भी स्थिति नियंत्रण में है, जहां AQI 110 के साथ ‘मध्यम’ श्रेणी में है।
लेकिन कई मेट्रो सिटिज में हालात बिगड़ने लगे हैं. मुंबई और कोलकाता में AQI क्रमशः 161 और 155 रहा, जो ‘मध्यम’ स्तर पर है। वहीं नई दिल्ली का AQI 269 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में है।
4 नवंवर को भारत के शहरों का AQI
भारत के छह शहरों में हवा की गुणवत्ता (AQI) इस प्रकार है:
| शहर | AQI |
|---|---|
| नई दिल्ली | 269 |
| मुंबई | 161 |
| कोलकाता | 155 |
| बेंगलुरु | 110 |
| चेन्नई | 81 |
| हैदराबाद | 71 |
AQI का क्या मतलब है?
एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) एक पैमाना है, जिसका उपयोग वायु प्रदूषण के स्तर और स्वास्थ्य पर इसके संभावित प्रभाव को बताने के लिए किया जाता है। यह हवा में मौजूद प्रदूषकों की मात्रा को एक सरल तरीके से दर्शाता है।
भारत का केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) AQI रीडिंग को छह श्रेणियों में बांटता है: अच्छा (Good), संतोषजनक (Satisfactory), मध्यम (Moderate), खराब (Poor), बहुत खराब (Very Poor) और गंभीर (Severe)। AQI की गणना PM2.5, PM10, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और ओजोन जैसे प्रदूषकों के आधार पर की जाती है।
भारत के नेशनल एयर क्वालिटी इंडेक्स के अनुसार AQI श्रेणियां
भारत के नेशनल एयर क्वालिटी इंडेक्स के अनुसार AQI श्रेणियां इस प्रकार हैं:
| श्रेणी | AQI रेंज |
|---|---|
| अच्छा | 0-50 |
| संतोषजनक | 51-100 |
| मध्यम | 101-200 |
| खराब | 201-300 |
| बहुत खराब | 301-400 |
| गंभीर | 401-500 |
PM2.5 और PM10 क्या हैं?
AQI रीडिंग की गणना हवा में मौजूद कई प्रदूषकों के आधार पर की जाती है, जिनमें ‘पार्टिकुलेट मैटर’ (कण) शामिल हैं।
PM2.5 का मतलब है ऐसे सूक्ष्म कण जिनका व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। PM10 उन कणों को कहा जाता है जिनका व्यास 10 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। जब लोग सांस के जरिए इन कणों को अंदर लेते हैं, तो ये उनके श्वसन तंत्र (सांस लेने की प्रणाली) में चले जाते हैं।
PM2.5 से स्वास्थ्य को गंभीर खतरा हो सकता है, क्योंकि ये कण इतने छोटे होते हैं कि फेफड़ों में बहुत गहराई तक जा सकते हैं। हवा में इन कणों की अधिक मात्रा होने से सांस लेने में दिक्कत हो सकती है, और फेफड़ों या दिल से जुड़ी पहले से मौजूद बीमारियां और भी गंभीर हो सकती हैं।
किसे सावधान रहना चाहिए?
अस्थमा और सांस संबंधी अन्य बीमारियों से पीड़ित लोग, बच्चे, बुजुर्ग और दिल की बीमारी वाले लोग वायु प्रदूषण के असर के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। जब हवा की गुणवत्ता खराब हो जाती है, तो लंबे समय तक बाहर रहने और शारीरिक मेहनत वाले काम करने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
प्रभावित शहरों में रहने वाले लोगों को स्थानीय वायु गुणवत्ता रिपोर्ट पर नज़र रखनी चाहिए और जरूरी सावधानी बरतनी चाहिए। प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से बचना और बाहर की गतिविधियों को सीमित करना स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने में मदद कर सकता है।
मौसम की स्थिति, हवा की गति और प्रदूषण के स्तर के आधार पर, दिन भर में हवा की गुणवत्ता के आंकड़े बदल सकते हैं। अलग-अलग मॉनिटरिंग स्टेशनों और वायु गुणवत्ता प्लेटफॉर्मों पर AQI के आंकड़े भी अलग-अलग हो सकते हैं।