संजय मिश्र, जागरण। देश के संस्थानिक विकास तथा प्रशासनिक ढांचे की रीढ़ माने जाने वाली शीर्ष नौकरशाही भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) तथा भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) कैडर के सैंकडों पद तमाम राज्यों में खाली पड़े हैं।
केंद्र सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, आईएएस कैडर के 1300 पद तो आईपीएस कैडर के भी 505 पद रिक्त हैं। अंडमान-निकोबार, गोवा, मेघालय तथा केंद्र शासित प्रदेश यानि एजीएमयूटी कैडर में आइएएस के सबसे अधिक 136 पद खाली हैं।
देश के सबसे बड़े सूबे उत्तरप्रदेश में इस संवर्ग के 81 पद रिक्त हैं। वहीं आईपीएस कैडर के सबसे ज्यादा 63 पद ओडिसा में खाली हैं।
उत्तरप्रदेश के बाद क्रमश: महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, केरल और मध्यप्रदेश में आइएएस के सबसे अधिक पद रिक्त हैं तो आईपीएस कैडर में ओडिसा के बाद कर्नाटक, राजस्थान, आंध्रप्रदेश और पंजाब में सबसे अधिक पद खाली हैं।
आईएएस कैडर के 1300 और आईपीएस कैडर के भी 505 पद रिक्त
आइएसएस तथा आईपीएस कैडर के तमाम राज्यों में कुल स्वीकृत पदों तथा पांच वर्ष के दौरान एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग की हुई नियुक्तियों का आंकड़ा साझा करने के दौरान यह तथ्य सामने आए।
केंद्रीय कार्मिक राज्यमंत्री जितेंद्र सिह ने लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि 1 जनवरी 2025 के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार देश भर में आइएएस कैडर के कुल स्वीकृत 6877 पद के मुकाबले 5577 अधिकारी कार्ययरत हैं।
यानि आइएएस के 1300 पद खाली हैं। जबकि आईपीएस के कुल 5099 पद के मुकाबले 4594 कार्यरत हैं और इस संवर्ग के 505 पद रिक्त हैं।
एजीएमयूटी कैडर में आइएएस के 542 की तुलना में 406 अधिकारी कार्यरत हैं और 136 पद खाली हैं। उत्तरप्रदेश में 652 कुल पदों की तुलना में 571 आइएएस तैनात हैं और 81 पद रिक्त हैं। महाराष्ट्र में 76 पद खाली हैं और 435 की जगह 359 आइएएस कार्यरत हैं।
पश्चिम बंगाल भी पीछे नहीं जहां 75 पद रिक्त हैं और 378 की के मुकाबले वर्तमान तैनाती 303 की है।शीर्ष नौकरशाही में एक समय वर्चस्व रखने वाले केरल का आंकड़ा चौंकाने वाला है जहां आइएएस कैडर के 231 पद के मुकाबले तैनाती 157 है और 74 पद खाली हैं।
बड़े राज्यों में मध्यप्रदेश में भी आइएएस कैडर के 68 पद खाली हैं जहां 459 की जगह 391 कार्यरत हैं। राजस्थान में 64, ओडिसा में 63 तथा गुजरात में 58 पद रिक्त हैं। बिहार में आइएएस के 359 पद के मुकाबले 303 कार्यरत हैं और 56 पद खाली हैं।प्रशासनिक ²ष्टिकोण से देखा जाए तो मझोले और छोटे राज्यों में भी औसतन खाली पद अधिक हैं।
हरियाणा में 43 पद खाली है जहां 215 के मुकाबले 172 की तैनाती है तो हिमाचल प्रदेश 153 आइएसएस की जगह 117 ही कार्यरत हैं और 36 पद रिक्त हैं। उत्तराखंड में 126 के मुकाबले 109 की तैनाती है यानि 17 पद खाली हैं।
झारखंड में 47 पद खाली हैं जहां 224 की जगह 177 और छत्तीसगढ में 202 के मुकाबले 164 आइएएस तैनात हैं और 38 रिक्तियां हैं। गौरतलब है कि वर्ष 2012 से हर साल सिविल सेवा परीक्षा के जरिए कुल 180 उम्मीदवारों की आइएसएस कैडर के लिए भर्ती की जाती है जिसमें चार प्रतिशत सीटें दिव्यांगों के लिए आरक्षित हैं।
केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक आइपीएस कैडर के सबसे ज्यादा 63 पद ओडिसा में रिक्त हैं तो सबसे कम केवल एक सीट बिहार में खाली है। बिहार में आइपीएस कैडर के 242 पद में 241 कार्यरत हैं।
आइपीएस में दूसरी सबसे अधिक 48 खाली सीटें मध्यप्रदेश में हैं जहां 319 के मुकाबले 271 ही तैनात हैं।इसके बाद पंजाब, तमिलनाडु, राजस्थान और आंध्रप्रदेश है जहां प्रत्येक जगह 34 आइपीएस के पद रिक्त हैं।
उत्तरप्रदेश में 541 के मुकाबले 510 आइपीएस हैं यानि 31 पद खाली हैं। एजीएमयूटी कैडर में 30 तथा बंगाल कैडर में 28 पद खाली हैं। हरियाणा में 17, झारखंड में 15 हिमाचल प्रदेश में 12 और छत्तीसगढ में आइपीएस के पांच पद रिक्त हैं। उत्तराखंड में आइपीएस कैडर में केवल दो पद खाली हैं और 75 की कुल संख्या में 73 तैनात हैं।
कार्मिक राज्यमंत्री ने पिछले पांच वर्षों (सीएसई 2020 से सीएसई 2024) के दौरान आइएएस और आइपीएस में सीधी भर्ती के माध्यम से एसी, एसटी और ओबीसी श्रेणी के तहत हुई नियुक्तियों की संख्या साझा करते हुए बताया कि इस दौरान आईएस में ओबीसी के 245, एससी के 135 और एसटी के 67 लोगों की नियुक्ति हुई है।
इसी दौरान ओबीसी के 255, एससी के 141 तथा एसटी के 71 लोगों की नियुक्ति आइपीएस कैडर में हुई है। सरकार के अनुसार जनवरी 2025 की स्थिति के मुताबिक आइपीएस कैडर में कोई बैकलॉग आरक्षित पद नहीं है।
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