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दो-तिहाई बहुमत के बिना बीजेपी का महिलाओं के आरक्षण क़ानून में संशोधन बिल लाने के पीछे क्या मक़सद था?

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Apr 18, 2026


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को लोकसभा में कहा था, “जो इस बिल का विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसकी क़ीमत चुकानी पड़ेगी”

लोकसभा में शुक्रवार को 131वां संविधान संशोधन बिल पेश हुआ और इस पर वोटिंग हुई, लेकिन यह बिल लोकसभा में पास नहीं हो सका.

संविधान संशोधन के लिए लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत की ज़रूरत होती है और एनडीए गठबंधन इसे हासिल करने में नाकाम रहा.

बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, वहीं इसके विरोध में 230 वोट पड़े. इस बिल को पास कराने के लिए कम से कम 362 वोटों की ज़रूरत थी.

इस बिल का उद्देश्य लोकसभा और विधानसभाओं में 33 फ़ीसदी महिला आरक्षण से जुड़े क़ानून को लागू करना, 2026 से पहले की जनगणना के आधार पर सीटों के परिसीमन की इजाज़त देना और लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करना था.

लेकिन इस बिल की टाइमिंग और सरकार की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं. जब सरकार को पता था कि उसके पास दो-तिहाई बहुमत नहीं है, फिर भी यह बिल क्यों लाया गया? इस बिल को लाने के पीछे सरकार की मंशा क्या थी?

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