जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। विपक्ष और खासकर कांग्रेस ने और कड़ा तेवर अख्तियार कर लिया है संसद तब तक नहीं चल सकती है जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा न हो जाए। जबकि सरकारी सूत्रों का साफ संकेत है कि दोषियों को नहीं बख्शा जाएगा लेकिन ऐसे मामलों में विपक्ष के दबाव मे आकर इस्तीफा नहीं लिया जा सकता है।
ऐसे में यह अटकलें भी तेज हो गई है कि विपक्ष की जिद के पीछे परिसीमन का डर तो नहीं है। सरकार मानसून सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक लाने की तैयारी में है। संसद के अंदर नंबर भी तेजी से बदलते जा रहे है और विपक्ष के कई दलों के रुख भी।
कांग्रेस विधेयकों के अटकाने के लिए अपना रहा रास्त
बुधवार को ही शरद पवार के प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद अटकलें फिर से तेज हो गई। वहीं द्रमुक अब तक विपक्ष के खेमे से दूरी बनाकर बैठा है। ऐसे में परिसीमन समेत कुछ और विधेयकों को अटकाने का आसान रास्ता यह हो सकता है कि सदन चले ही न।
चार दिन बिना किसी काम के खत्म
गौरतलब है कि मानसून सत्र 13 अगस्त को खत्म। इस सत्र में कुल 19 दिन की बैठक नियत है और चार दिन बिना किसी काम के खत्म हो चुके हैं। कुछ दिन और गतिरोध रहा तो परिसीमत समेत वंदे मातरम के अपमान पर कानूनी कार्रवाई वाला विधेयक भी टल जाएगा। वह ऐसा विधेयक है जिसका कोई पार्टी विरोध नहीं कर पाएगी।
लेकिन वह अटकता है तो कुछ दल अल्पसंख्यकों के बीच इसका फायदा उठाने की कोशिश जरूर कर सकते हैं। जबकि परिसीमन विधेयक अगर मानसून सत्र में पारित नहीं हो पाता है कि शीतकालीन सत्र तक का इंतजार भारी पड़ेगा क्योंकि पूरे देश में परिसीमन के लिए कम से कम दो ढ़ाई साल का वक्त लगेगा।
2029 चुनाव से पहले लागू करना कैसे होगा मुश्किल?
ऐसे में 2029 चुनाव से पहले लागू करना मुश्किल हो सकता है। वहीं कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल किसी भी कीमत पर 2029 तक इसे रोकना चाहते हैं। उन्हें आशंका है कि परिसीमन हुई और सीटों की संख्या बढ़ी तो उनके लिए जीत और मुश्किल होगी। ऐसे में प्रधान का इस्तीफा एक बड़ा मुद्दा मिला है जिसपर विपक्ष में एकजुटता बनाई गई है।