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‘नक्सलवाद लगभग खत्म’ गृहमंत्री अमित शाह के इस दावे में कितनी सच्चाई?

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Apr 1, 2026


भारत में माओवाद के प्रभावी इलाक़ों के बड़े हिस्से को सुरक्षाबलों ने अपने क़ब्ज़े में लिया है.

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इमेज कैप्शन, भारत में माओवाद के प्रभावी इलाक़ों के बड़े हिस्से को सुरक्षाबलों ने अपने क़ब्ज़े में लिया है

“नक्सलवाद अब लगभग पूरी तरह समाप्त हो चुका है… बस्तर में अब स्कूल बन रहे हैं, राशन की दुकानें खुल रही हैं,” सोमवार 30 मार्च को लोकसभा में जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यह दावा किया.

गृह मंत्री अमित शाह ने एक और अहम दावा किया कि “नक्सलवाद की जड़ ग़रीबी या विकास की कमी नहीं, बल्कि एक विचारधारा है,” और यह भी कि 31 मार्च, 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है.

हालांकि मंगलवार 31 मार्च को छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने गृह मंत्री अमित शाह के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा, “कल (सोमवार) लोकसभा में अपने बयान में अमित शाह जी ने दावा किया कि हमारी सरकार ने नक्सलवाद के ख़िलाफ़ प्रयासों का समर्थन नहीं किया. यह पूरी तरह गलत है. मैं उन्हें किसी भी समय और स्थान पर इस पर बहस की चुनौती देता हूं. राज्य और देश के लोगों को गुमराह नहीं किया जाना चाहिए.”

इसके पहले लोकसभा में “वामपंथी उग्रवाद से देश को मुक्त करने के प्रयास पर चर्चा” के दौरान तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने सरकार के नक्सलवाद के ख़ात्मे के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा, “अगर नक्सलवाद ख़त्म हो गया है और सामान्य स्थिति लौट आई है, तो फिर बस्तर में भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती क्यों है?”

गृह मंत्री अमित शाह ने अगस्त 2024 में माओवाद की समाप्ति का लक्ष्य दिया था. इसके बाद पिछले लगभग 2 साल में सुरक्षाबलों ने माओवाद विरोधी अभियानों में तेज़ी लाते हुए भारत में माओवाद प्रभावित इलाक़ों के बड़े हिस्से को अपने क़ब्ज़े में लिया है.

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