राजीव कुमार झा, कोलकाता। इस बार का बंगाल विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए सिर्फ एक और चुनाव नहीं, बल्कि संगठनात्मक परिपक्वता और नेतृत्व की परीक्षा भी है।
खासकर तब, जब हाल में राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में विश्व की सबसे बड़ी पार्टी की कमान संभालने वाले नितिन नवीन पहली बार किसी विधानसभा चुनाव में प्रमुख रणनीतिकार की भूमिका में हैं। इस चुनाव में उनका जोर बूथ केंद्रित रणनीति के सहारे जीत हासिल करने पर है।
बंगाल में अगले माह होने वाले चुनाव से पहले 24-25 मार्च को कोलकाता के दो दिवसीय प्रवास में नवीन ने स्पष्ट कर दिया कि इस चुनौती को वह सिर्फ राजनीतिक भाषणों से नहीं, बल्कि गहराई से संगठन में उतरकर, उसे पुनर्गठित और सक्रिय बनाकर लड़ना चाहते हैं।
नवीन का यह दौरा पारंपरिक राजनीतिक यात्राओं से अलग रहा। इसमें ज्यादा जोर बैक-डोर रणनीति और माइक्रो मैनेजमेंट पर दिखा।
हावड़ा- हुगली और नवद्वीप जोन की बैठक से लेकर चुनाव संचालन समिति, जिला प्रभारियों और विभिन्न मोर्चों के साथ उनकी अलग-अलग संगठनात्मक बैठकों ने साफ कर दिया है कि वह चुनाव को बूथ स्तर से नियंत्रित करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
उन्होंने बूथ-केंद्रित रणनीति के जरिये जीत का पूरा खाका खींच दिया। उनकी कार्यशैली में संगठनात्मक अनुशासन के साथ आक्रामकता का मिश्रण, सीधी बात, स्पष्ट निर्देश और परिणाम की अपेक्षा प्रमुख रूप से उभर कर सामने आया।
नेताओं को संदेश-यह कोई ऑफिस ड्यूटी नहीं कि समय देखकर काम करें
जिलों के प्रभारी प्रवासी नेताओं के साथ बैठक में उन्होंने सख्त टिप्पणी की है कि यह कोई आफिस ड्यूटी नहीं है कि समय देखकर काम करें। इससे नेताओं को स्पष्ट संकेत मिला कि संगठन में दिखावे या औपचारिकता के लिए अब कोई जगह नहीं, बल्कि जमीन पर सक्रियता ही मान्य होगी।
उन्होंने नेताओं से साफ कहा कि वे कार्यकर्ताओं के बीच रहें, उनकी समस्याएं सुनें, स्थानीय मुद्दों को समझें और निरंतर सक्रिय रहें, नहीं तो जिम्मेदारी छोड़ दें।
नवद्वीप जोन की बैठक को संबोधित करते हुए जहां एक ओर उन्होंने चार मई को चुनाव नतीजे के दिन भगवा होली खेलने की बात कही, वहीं दूसरी ओर कार्यकर्ताओं को ‘बूथ जीतो, चुनाव जीतो’ का ठोस मंत्र भी दिया। नितिन नवीन ने नैरेटिव सेट करने पर भी जोर दिया।
उन्होंने बंगाल चुनाव को तृणमूल के भय बनाम भाजपा के भरोसे की लड़ाई के रूप में स्थापित किया, जो पार्टी की पूरी चुनावी रणनीति का केंद्र बिंदु बन सकता है। संगठनात्मक दृष्टि से देखें तो नवीन ने स्पष्ट रूप से कार्यकर्ता-आधारित अभियान पर जोर दिया।
उन्होंने बार-बार यह रेखांकित किया कि भाजपा की ताकत उसके कार्यकर्ता हैं, जो राष्ट्र प्रथम की भावना से काम करते हैं। हर कार्यकर्ता को स्वयं उम्मीदवार मानने का संदेश देकर उनका मनोबल बढ़ाने के साथ उन्होंने जिम्मेदारी का अहसास कराया।