जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने डाटा शेयरिंग के नाम पर लोगों की निजता से खिलवाड़ किए जाने को लेकर मंगलवार, 3 जनवरी को इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म वाट्सएप और मेटा को कड़ी फटकार लगाई।
कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि डाटा शेयरिंग के नाम पर इस देश के नागरिकों के निजता के अधिकार के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते। कोर्ट डाटा का एक भी शब्द शेयर करने की इजाजत नहीं देगा।
सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सएप को लगाई फटकार
शीर्ष अदालत ने वाट्सएप की डाटा शेयरिंग शर्तों पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘प्राइवेसी की शर्तें इतनी चालाकी से बनाई गई हैं कि आम आदमी उन्हें समझ ही नहीं सकता। लोगों की निजी जानकारी चुराने का यह अच्छा तरीका है। कोर्ट ऐसा करने की इजाजत नहीं देगा।’
सुप्रीम कोर्ट ने मेटा के डाटा शेयरिंग तरीके पर चिंता जताते हुए कहा, ‘अगर आप नियमों का पालन नहीं कर सकते, तो भारत छोड़ दें।’
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जोयमाल्या बागची और विपुल एम. पंचोली की पीठ ने ये कड़ी टिप्पणियां इंटरनेट मीडिया कंपनी वाट्सएप और मेटा की एनसीएलएटी के आदेश को चुनौती देने वाली अपीलों पर सुनवाई के दौरान मंगलवार को कीं।
एनसीएलएटी ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआइ) द्वारा मैसेजिंग प्लेटफॉर्मों पर उसकी 2021 की गोपनीयता नीति को लेकर लगाए गए 213.14 करोड़ रुपये के जुर्माने को बरकरार रखा था।
मंगलवार, 3 जनवरी को कोर्ट ने अपीलों को स्वीकार करते हुए पक्षकारों के संयुक्त अनुरोध पर केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भी पक्षकार बना लिया। मंत्रालय की ओर से पेश सालिसिटर जनरल तुषार मेहता और वकील सुदर्शन लांबा ने केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट का नोटिस स्वीकार किया।
मंगलवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि मेटा ने सीसीआइ द्वारा लगाई की 213.14 करोड़ की पेनाल्टी जमा करा दी है। कोर्ट ने आदेश दिया कि अगले आदेश तक यह रकम निकाली नहीं की जा सकती।
शीर्ष अदालत ने पक्षकारों को चार सप्ताह में जवाब और उसके बाद एक सप्ताह प्रतिउत्तर दाखिल करने के लिए दिया है। मामले पर अंतिम सुनवाई तीन न्यायाधीशों की पीठ 15 अप्रैल को करेगी, लेकिन अंतरिम आदेश के मुद्दे पर नौ फरवरी को सुनवाई होगी।
डाटा शेयरिंग को लेकर पॉलिसी
इससे पहले सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वाट्सएप की डाटा शेयरिंग पॉलिसी को लेकर कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने वाट्सएप की आप्ट आउट (या तो मानो या छोड़ दो) नीति की आलोचना करते हुए कहा कि यह नीति डाटा चोरी को सक्षम करती लगती है।
सीजेआइ सूर्यकांत ने कहा कि वाट्सएप यूजर्स के पास इस गोपनीयता नीति से बाहर निकलने का कोई स्पष्ट विकल्प नहीं है। उन्होंने मेटा और वाट्सएप के वकील मुकुल रोहतगी से कहा कि आप्ट आउट का सवाल ही कहां है। मुझे अपने मोबाइल में दिखाओ। निजी जानकारी की चोरी करने का यह अच्छा तरीका है।
सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा, ‘आप अपने व्यवसायिक हितों को जानते हैं और हम भी जानते हैं कि आपने उपभोक्ताओं को कैसे एप का आदी बना दिया है। हर कोई इसका इस्तेमाल करता है।’
सीजेआइ सूर्यकांत ने सवाल किया कि अगर यूजर को आप्ट आउट करने का अधिकार है तो उसे इस अधिकार का पता कैसे चलेगा। पीठ ने कहा कि डाटा शेयरिंग के नाम पर आप इस देश के संवैधानिक मूल्यों का मजाक उड़ा रहे हैं। लोग इसके लिए आपको पैसा देते हैं। उपभोक्ता के पास कोई विकल्प नहीं है, आपने एकाधिकार स्थापित कर लिया है।
कोर्ट ने कहा कि वाट्सएप एक हलफनामा दाखिल कर गोपनीयता नीति और उसके तहत डाटा शेयरिंग की गतिविधियों के संचालन को स्पष्ट करे। सीजेआइ ने सवाल किया कि तमिलनाडु में बैठा कोई व्यक्ति जो सिर्फ अपनी भाषा समझता है, वह आपकी शर्तों को कैसे समझेगा।
पीठ ने मेटा से कहा कि वह इस संबंध में हलफनामा दाखिल कर कोर्ट को भरोसा दिलाए, इसके बाद कोर्ट मामले की मेरिट पर विचार करेगा। सुनवाई के दौरान इस बात पर भी चर्चा हुई कि किस तरह वाट्सएप पर अक्सर यूजर्स की बिना स्पष्ट सहमति के लक्षित विज्ञापन दिखाए जाते हैं, जिससे निजी डाटा साझा करने को लेकर चिंताएं बढ़ जाती हैं।
वाट्सएप मेटा की ओर से पेश मुकुल रोहतगी ने कहा कि वाट्सएप एन्क्रेप्टेड है, दो व्यक्तियों के बीच भेजे गए संदेशों को वाट्सएप नहीं पढ़ सकता। यह भी कहा कि कुछ ही डाटा साझा किया जाता है।
सीजेआइ ने कहा कि वाट्सएप का घोषित उद्देश्य केवल संदेश भेजने की सेवाएं प्रदान करना है, न कि डाटा की बिक्री करना। मेहता ने कोर्ट की चिंताओं से सहमति जताते हुए कहा कि हमारी निजी जानकारी न केवल बेची जाती है, बल्कि उसका व्यवसायिक रूप से दुरुपयोग भी किया जाता है।
कोर्ट ने कहा कि मेरी निजी जीवन से संबंधित जो जानकारी उपलब्ध है, उसका मौद्रिक मूल्य है। यह मामला वाट्सएप की 2021 की गोपनीयता नीति से संबंधित है जिसमें मेटा के साथ डाटा शेयरिंग को अनिवार्य कर दिया गया है।