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अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ़) ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे को लेकर चिंता जताई है.
आयोग ने बुधवार को अमेरिकी सरकार से भागवत का वीज़ा रद्द करने और उन्हें भविष्य में अमेरिका में प्रवेश के लिए अयोग्य घोषित करने की मांग की है.
यूएससीआईआरएफ़ ने अपने बयान में आरोप लगाया, “आरएसएस से जुड़े संगठनों के सदस्यों ने भारत में ईसाइयों, दलितों, मुसलमानों और सिखों समेत धार्मिक अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ हिंसक हमले किए हैं.”
आयोग के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार की नीतियां आरएसएस की हिंदुत्व विचारधारा से क़रीबी तौर पर जुड़ी हैं और इनका धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों पर ‘भेदभावपूर्ण प्रभाव’ पड़ता है.
यूएससीआईआरएफ़ के चेयरपर्सन आसिफ़ महमूद ने कहा, “भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति लगातार ख़राब हो रही है और धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के लिए हिंसा और भड़काऊ गतिविधियों का इस्तेमाल किया जा रहा है.”
उन्होंने अमेरिकी सरकार से आरएसएस के सदस्यों और धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन में कथित तौर पर शामिल भारतीय अधिकारियों पर टारगेटेड सैंक्शन लगाने की भी अपील की.
आयोग ने भारत सरकार पर धार्मिक अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ भीड़ की हिंसा को रोकने, उसकी जांच करने और दोषियों को सज़ा दिलाने में नाकाम रहने का आरोप लगाया.
यूएससीआईआरएफ़ ने आरोप लगाया कि असम में एनआरसी और सीएए के तहत ‘मुस्लिम नागरिकों को जबरन बाहर किया जा रहा’ है.
यूएससीआईआरएफ़ की वाइस चेयरपर्सन सीसी हेल ने कहा, “अमेरिकी सरकार के पास भारत को जवाबदेह ठहराने और यह संदेश देने का अवसर है कि अमेरिका भारत के लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता के समर्थन में खड़ा है.”
आयोग ने अपनी 2026 की वार्षिक रिपोर्ट में अमेरिकी विदेश विभाग से भारत को ‘कंट्री ऑफ़ पार्टिकुलर कंसर्न’ (ऐसा देश जहां सरकारों धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन हो) घोषित करने की सिफ़ारिश की है.