डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कोलकाता हाईकोर्ट ने पति और पत्नी के बीच वर्कप्लेस पर होने वाले झगड़े के मामले में फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट का कहना है कि अगर पति, वर्कप्लेस पर पत्नी का अपमान करता है तो इसे मानसिक क्रूरता माना जाएगा।
कोलकाता हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि पत्नी इस बात को आधार बनाकर अपने पति से तलाक भी ले सकती है। पति का वर्कप्लेस पर अपमानजनक शब्द कहना, पत्नी की मानसिक शांति पर हमला है।
वर्कप्लेस पर अपमान करना मानसिक क्रूरता
जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य और जस्टिस सुप्रतिम भट्टाचार्य की बेंच ने एक मामले में फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट का यह फैसला एक महिला डॉक्टर की अपील पर सुनाया गया है। यह मामला पहले फैमिली कोर्ट में पहुंचा था, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया।
महिला ने फैमिली कोर्ट के फैसले को कोलकाता हाईकोर्ट में चुनौती दी। महिला ने अपने पति पर आरोप लगाया कि उसका पति वर्कप्लेस पर आकर उसे गाली देता था और उसके चरित्र के बारे में अफवाहें फैलाता था।
हाईकोर्ट ने तलाक का दिया आदेश
हाईकोर्ट ने माना कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए महिला को उसके साथ काम करने वाले लोगों के साथ पूछताछ की अनुमति नहीं दी गई, जिससे वह आरोपों को साबित नहीं कर सकी।
हाईकोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए तलाक का आदेश दिया। कोर्ट ने महिला के पति को उसके नाबालिग बेटे के मिलने का अधिकार दिया है। इसके साथ ही बच्चे की देखभाल के लिए कंप्लीट शेड्यूल भी बताया है।