पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में बने तनावपूर्ण हालात के बीच भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर लगातार सक्रिय है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और वहां फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार ने कहा कि जिन भारतीय नागरिकों को ट्रांजिट या कम समय की यात्रा के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ा था, उन्हें सुरक्षित वापस लाने की प्रक्रिया जारी है।
सरकार ने स्थिति को लेकर क्या जानकारी दी?
विदेश मंत्रालय ने कहा कि पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में हालात तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में भारत सरकार वहां मौजूद भारतीय नागरिकों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। मंत्रालय के मुताबिक जो भारतीय ट्रांजिट में फंसे थे या कम समय के लिए इन देशों में गए थे, उनकी सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार ने सभी भारतीय नागरिकों से अपील की है कि वे स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों और भारतीय दूतावास या वाणिज्य दूतावास की सलाह का पालन करें।
कितने भारतीय अब तक सुरक्षित भारत लौटे हैं?
विदेश मंत्रालय के अनुसार 1 मार्च से 7 मार्च 2026 के बीच खाड़ी क्षेत्र से 52 हजार से अधिक भारतीय सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। मंत्रालय ने बताया कि इन यात्रियों में वे लोग भी शामिल हैं जो दूसरे देशों की यात्रा के दौरान ट्रांजिट में फंस गए थे। एयरस्पेस आंशिक रूप से खुलने के बाद कई वाणिज्यिक और विशेष उड़ानों के जरिए यात्रियों को वापस लाया गया है। इससे हजारों परिवारों को बड़ी राहत मिली है।
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भारतीय एयरलाइनों की क्या भूमिका रही?
सरकार के मुताबिक भारत लौटने वाले यात्रियों में से 32 हजार 107 लोगों ने भारतीय एयरलाइनों की उड़ानों से यात्रा की है। भारतीय एयरलाइनों ने अतिरिक्त और विशेष उड़ानों का संचालन कर फंसे हुए लोगों की वापसी में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा कुछ विदेशी एयरलाइनों ने भी यात्रियों को वापस लाने के लिए उड़ानें चलाईं। इससे वापसी की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ सकी।
सरकार ने लोगों की मदद के लिए क्या व्यवस्था की है?
विदेश मंत्रालय ने बताया कि स्थिति को देखते हुए एक विशेष कंट्रोल रूम भी बनाया गया है। यह कंट्रोल रूम 24 घंटे काम कर रहा है और फंसे हुए भारतीयों तथा उनके परिवारों की समस्याओं का जवाब दे रहा है। इसके अलावा संबंधित देशों में भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास ने भी 24 घंटे हेल्पलाइन शुरू की हैं ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को तुरंत सहायता मिल सके।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि आने वाले दिनों में और भी उड़ानें संचालित करने की योजना है। जिन देशों में अभी वाणिज्यिक उड़ानें उपलब्ध नहीं हैं, वहां मौजूद भारतीयों को अपने नजदीकी भारतीय दूतावास या वाणिज्य दूतावास से संपर्क करने की सलाह दी गई है। सरकार ने कहा कि विदेश में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा और कल्याण उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है और जरूरत पड़ने पर हर संभव मदद दी जाएगी।
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