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पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट से क़रीब 91 लाख नाम हटाए जाने को लेकर विवाद क्यों हुआ?

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Apr 9, 2026


प्रदर्शनकारी

इमेज स्रोत, Asian News International

इमेज कैप्शन, पश्चिम बंगाल में एसआईआर के बाद मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं (फ़ाइल फ़ोटो)

पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट से क़रीब 91 लाख वोटरों के नाम हटा दिए गए हैं. यह काम राज्य की मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (एसआईआर) के बाद हुआ.

यह संख्या राज्य के कुल मतदाताओं का लगभग 12% है, जो बीते साल अक्तूबर में एसआईआर शुरू होने के समय क़रीब 7.66 करोड़ थी.

इन 91 लाख में से 63 लाख से ज़्यादा वोटरों के नाम फ़रवरी में चुनाव आयोग की जारी सूची में ही हटा दिए गए थे. इन लोगों को “अनुपस्थित, कहीं और चले गए, मृत या डुप्लीकेट” बताया गया.

इसके अलावा 60.06 लाख वोटरों को “अंडर एडजुडिकेशन” यानी जांच के दायरे में रखा गया है. चुनाव आयोग के मुताबिक़ इन लोगों के रिकॉर्ड में “तार्किक गड़बड़ियां” थीं, जैसे नाम की स्पेलिंग, जेंडर में ग़लती, माता-पिता से उम्र का असामान्य अंतर आदि.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद, लगभग 700 न्यायिक अधिकारियों को “अंडर एडजुडिकेशन” हर वोटर की योग्यता को उनके जमा किए गए पहचान के दस्तावेज़ों के आधार पर वेरिफ़ाई करने का काम सौंपा गया था.

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