इमेज स्रोत, @ChiefAdviserGoB
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 2025 का अंत ढाका दौरे से किया था.
31 दिसंबर को जयशंकर बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री ख़ालिदा ज़िया को श्रद्धांजलि देने के लिए ढाका गए थे.
जयशंकर के अलावा दक्षिण एशिया के बाक़ी देशों के प्रतिनिधि भी वहां पहुँचे थे.
इसी दौरान भारत के विदेश मंत्री ने पाकिस्तानी संसद के स्पीकर सरदार अयाज़ सादिक़ से हाथ मिलाया था.
हाथ मिलाने की तस्वीर जयशंकर के छोटे ढाका दौरे में सबसे ज़्यादा चर्चित रही.
बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
पाकिस्तान में इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं. ख़ास करके तब, जब कहा जा रहा है कि हाथ मिलाने की पहल भारतीय विदेश मंत्री ने ही की थी. हालांकि जयशंकर ने ढाका दौरे से जुड़ी जो जानकारी सोशल मीडिया पर दी, उसमें अयाज़ सादिक़ से हाथ मिलाने वाला वाक़या शामिल नहीं था.
दूसरी तरफ़ पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने इस मुलाक़ात के बाद सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर कई तस्वीरें पोस्ट की थीं. इन तस्वीरों के साथ पोस्ट में दावा किया गया कि जयशंकर ने ख़ुद ही आगे बढ़ कर अयाज़ सादिक़ से हाथ मिलाया था.
अयाज़ सादिक़ ने जयशंकर से मुलाक़ात के बारे में क्या बताया?
इमेज स्रोत, @NAofPakistan
अब अयाज़ सादिक़ ने बताया है कि ख़ालिदा ज़िया के अंतिम संस्कार से पहले बांग्लादेश की संसद के वेटिंग रूम में जयशंकर से उनकी मुलाक़ात कैसे हुई और वहां क्या हुआ.
उन्होंने कहा कि मई में हुए युद्ध के बाद पाकिस्तान से उच्च-स्तरीय संपर्क की पहल भारतीय नेतृत्व की ओर से की गई.
पाकिस्तान की जियो न्यूज़ को सादिक़ ने बताया कि वो ख़ालिदा ज़िया की जनाज़े की नमाज़ में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व करने गए थे.
उन्होंने कहा, ”संसद के एक वेटिंग रूम में पहले से ही पाकिस्तान, मालदीव, नेपाल और भूटान के प्रतिनिधि मौजूद थे. इसके अलावा बांग्लादेश के अधिकारी भी थे, तभी जयशंकर के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल वहाँ पहुँचा.”
अयाज़ सादिक़ के मुताबिक़, ”कमरे में घुसने के बाद जयशंकर ने पहले अन्य प्रतिनिधियों का अभिवादन किया. उसके बाद मेरी तरफ़ बढ़े और हाथ मिलाकर बातचीत की पहल की.”
सादिक़ ने कहा, “मैं बांग्लादेश में पाकिस्तान के हाई कमिश्नर से बात कर रहा था, तभी वह मेरे पास आए, उन्होंने अभिवादन किया और अपना परिचय दिया. जब मैं अपना परिचय देने ही वाला था, तो उन्होंने कहा, ‘एक्सीलेंसी, मैं आपको पहचानता हूं, आपको अपना परिचय देने की ज़रूरत नहीं है.”
अयाज़ सादिक़ ने कहा, ”भारतीय मंत्री के साथ कैमरे भी मौजूद थे, जिससे यह साफ़ संकेत मिलता है कि जयशंकर को पूरी तरह पता था कि यह बातचीत रिकॉर्ड की जा रही है और मीडिया में इसकी रिपोर्टिंग होगी.”
उन्होंने कहा, “उन्हें ठीक-ठीक पता था कि वे क्या कर रहे हैं और यह भी कि इस पर मीडिया में कवरेज होगी.”
सादिक़ ने कहा, ”मुझे महसूस हुआ कि कमरे में मौजूद सभी लोगों की नज़रें उसी बातचीत पर टिकी हुई थीं.”
अयाज़ सादिक़ ने कहा, ”जयशंकर एक चतुर राजनेता हैं, जो उस पल के अहमयित और उसके ‘ऑप्टिक्स’ को अच्छी तरह समझ रहे थे.”
जियो न्यूज़ से सादिक़ ने कहा कि बांग्लादेश यात्रा के दौरान उन्हें बेहद उत्साहपूर्ण और गर्मजोशी भरा स्वागत मिला.
उन्होंने बताया कि वहां मौजूद लोग ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ और ‘आई लव पाकिस्तान’ के नारे लगा रहे थे.
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली स्पीकर ने अंतिम संस्कार स्थल तक की अपनी यात्रा के दौरान लोगों की प्रतिक्रिया का भी ज़िक्र किया.
उन्होंने कहा कि जिस गाड़ी से वो यात्रा कर रहे थे, उस पर पाकिस्तान का झंडा लगा हुआ था. झंडा देखते ही सड़क के दोनों ओर लोग हाथ हिलाने लगे.
‘भारत-पाकिस्तान को बातचीत में कोई दिलचस्पी नहीं’
इमेज स्रोत, Getty Images
‘जियो टीवी’ के ही एक कार्यक्रम में अमेरिका में पाकिस्तान की राजदूत रहीं मलीहा लोधी से ये पूछा गया कि जयशंकर और साद़िक का हाथ मिलाने को वह कैसे देखती हैं?
इसके जवाब में मलीहा लोधी ने कहा, ”मुझे नहीं लगता है कि इस हाथ मिलाने से भारत और पाकिस्तान के बीच गतिरोध टूट रहा है. मेरा मानना है कि हाथ मिलाना तो एक स्वाभाविक सी बात थी. यह सुनियोजित तो था नहीं. मुझे तो इसमें कोई अहमियत नज़र नहीं आती. आपस में एक दूसरे को देखा और हाथ मिला लिया लेकिन इसका कोई सियासी मायने नहीं है.”
”जहाँ तक परमाणु ठिकानों की लिस्ट शेयर करने की बात है तो ये पिछले 30 सालों से ज़्यादा समय से हो रहा है और इस बार भी ऐसा ही हुआ. इसे बहुत अहमियत देने की ज़रूरत नहीं है. दोनों मुल्क चाहते हैं कि उन्हें ज़िम्मेदार परमाणु शक्ति संपन्न देश के रूप में देखा जाए और ये अच्छी बात है. दोनों मुल्कों के बीच न युद्ध और न शांति वाली स्थिति है. मुझे कहीं से नहीं दिख रहा है कि बर्फ़ पिघल रही है.”
उनसे ये पूछा गया कि भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में फिलहाल इतना तनाव है कि क्रिकेट टीमें भी एक दूसरे से हाथ नहीं मिला रही हैं तो जयशंकर का इस तरह अयाज़ सादिक़ के पास ख़ुद चल कर आने से क्या ये समझा जाए कि भारत की सोच बदल रही है?
उन्होंने कहा, ”भारत के रुख़ में नरमी नहीं आई है. बल्कि हाल में भारत के के रक्षा मंत्री समेत कई नेताओं ने आक्रामक बयान दिए. ये पाकिस्तान को डराने की कोशिश थी. मुझे नहीं लगता कि जब तक नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री रहेंगे तब तक पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव मे कोई ख़ास कमी होगी. ”

पाकिस्तानी अख़बार ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ ने लिखा है कि दोनों देशों ने अपने-अपने परमाणु प्रतिष्ठानों और क़ैदियों की सूचियों का आदान-प्रदान किया.
अख़बार लिखता है कि यह क़दम ऐसे समय उठाया गया है, जब दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बना हुआ है. खास़कर साझा जल संसाधनों को लेकर भारत की कार्रवाइयों पर चिंता बरकरार है.
अख़बार लिखता है, ”इन नियमित कूटनीतिक आदान-प्रदानों का सिलसिला बुधवार को ढाका में दोनों देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के बीच हुई एक दुर्लभ सार्वजनिक मुलाक़ात के साथ भी जुड़ा रहा.”
”बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री बेगम ख़ालिदा ज़िया के राजकीय अंतिम संस्कार के मौक़े पर पाकिस्तान के नेशनल असेंबली स्पीकर सरदार अयाज़ सादिक और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को हाथ मिलाते हुए देखा गया.”
हालांकि विदेश कार्यालय ने इस मुलाक़ात को किसी भी तरह का राजनीतिक महत्व देने से इनकार किया. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि वह इस बैठक को लेकर नेशनल असेंबली स्पीकर की सार्वजनिक व्याख्या से आगे कुछ नहीं कहेंगे.
जयशंकर ने ‘बुरा पड़ोसी’ कहा
इमेज स्रोत, ANI
दूसरी ओर, बांग्लादेश से लौटे जयशंकर ने दो जनवरी को आईआईटी मद्रास के एक कार्यक्रम में कहा कि जहां भी अच्छे पड़ोसी जैसे रिश्तों की भावना होती है, वहां भारत मदद देता है लेकिन जब ‘बुरे पड़ोसियों’ की बात आती है तो भारत को अपने लोगों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है.
भारत के नेबरहुड फ़र्स्ट पॉलिसी से जुड़े एक सवाल के जवाब में एस जयशंकर ने कहा, “आपके पड़ोसी बुरे भी हो सकते हैं. बदकिस्मती से, हमारे हैं…अगर आप पश्चिम की तरफ़ देखें…”
जयशंकर ने कहा, “आपके पड़ोसी बुरे भी हो सकते हैं. बदकिस्मती से, हमारे हैं. जब आपके पड़ोसी बुरे हों…अगर आप पश्चिम की तरफ़ देखें, अगर कोई देश यह तय करता है कि वह जानबूझकर, लगातार और बिना पछतावे के आतंकवाद जारी रखेगा, तो हमें अपने लोगों को आतंकवाद से बचाने का अधिकार है. हम उस अधिकार का इस्तेमाल करेंगे.”
हैंडशेक से हलचल
इमेज स्रोत, @NAofPakistan
जयशंकर और अयाज़ सादिक़ के हाथ मिलाने पर दो जनवरी को पाकिस्तान के प्रमुख अंग्रेज़ी अख़बार डॉन ने एक संपादकीय लिखा है.
डॉन ने संपादकीय टिप्पणी में लिखा है, ”यह एक ऐसा हाथ मिलाना था, जिसने पूरे क्षेत्र में हलचल पैदा कर दी. बेशक,यह एक महत्वपूर्ण क्षण था, जिसने तीन देशों में ध्यान आकर्षित किया. भारतीय मीडिया ने इस घटना को कम महत्व देते हुए इसे ऐसे अवसरों पर होने वाली एक सामान्य औपचारिकता बताया और इसलिए इसे महत्वहीन क़रार दिया.”
”वहीं, पाकिस्तानी मीडिया ने यह ध्यान में रखते हुए कि मई में हुई झड़पों के बाद दोनों देशों के बीच यह पहला उच्च-स्तरीय संपर्क था और नेशनल असेंबली से जारी बयान को प्रमुखता से उठाया. बयान में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि कथित तौर पर हाथ मिलाने और शिष्टाचार की शुरुआत जयशंकर ने की, जिन्होंने अनौपचारिक अभिवादन के साथ सादिक़ से संपर्क किया.”
‘डॉन’ ने लिखा है, ”दिलचस्पी का एक कारण यह हो सकता है कि साल का यह समय न्यूज़ रूम के लिए अपेक्षाकृत धीमा रहता है. दूसरा कारण यह भी हो सकता है कि पाकिस्तान और भारत के बीच आगे क्या होगा, इसे लेकर लगातार उत्सुकता बनी हुई है. फिर भी, मौजूदा माहौल को देखते हुए केवल एक हाथ मिलाने से बहुत अधिक अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए.”
डॉन ने लिखा है, ”दिलचस्प बात यह है कि ‘हैंडशेक’ पर नेशनल असेंबली सचिवालय के बयान में यह कहा गया कि पाकिस्तान ने “लगातार संवाद, संयम और सहयोगात्मक उपायों पर ज़ोर दिया है. क्या इसे नई दिल्ली के लिए यह संकेत माना जा सकता है कि बातचीत का दरवाज़ा अब भी खुला है? दुर्भाग्य से, पड़ोसी देश की ओर से आक्रामक बयानबाज़ी और रुख़ में कमी के कोई संकेत नहीं दिखते. बेशक, हालात को ठंडा करने की सख़्त ज़रूरत है. लेकिन केवल हाथ मिलाना और औपचारिक अभिवादन ऐसा नहीं कर पाएंगे. इसके लिए विशेषकर नई दिल्ली की ओर से गंभीर प्रयासों और उच्चतम स्तर की कूटनीति की ज़रूरत होगी, तभी किसी ठहराव या नरमी की उम्मीद की जा सकती है.”
‘ हैंडशेक क्षेत्र के लिए अच्छा लेकिन इसमें कई अगर-मगर’
इमेज स्रोत, AFP via Getty Images
वहीं क़तर के प्रसारक अल जज़ीरा से इस्लामाबाद स्थित विदेश नीति के विश्लेषक मुस्तफा हैदर सईद ने कहा, “मुझे लगता है कि नए साल की शुरुआत में जयशंकर और अयाज़ सादिक के बीच हुआ यह संवाद एक स्वागतयोग्य घटनाक्रम है.”
उन्होंने कहा, “रिश्तों में बुनियादी बात है कि अधिकारियों को सम्मान दिया जाए और हाथ मिलाया जाए. यह तो बहुत ही सामान्य बात है, जो दुर्भाग्य से भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध के बाद ग़ायब रही है.”
पाकिस्तान के पूर्व अमेरिकी राजदूत सरदार मसूद ख़ान ने इस हाथ मिलाने को एक सुखद कूटनीतिक संकेत बताया है.
ख़ान ने अल जज़ीरा से कहा, “यह कल्पना करना मुश्किल है कि भारतीय विदेश मंत्री, भारतीय प्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व की स्पष्ट अनुमति के बिना, पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के स्पीकर का स्वतः अभिवादन करें.
ख़ान संयुक्त राष्ट्र और चीन में भी पाकिस्तान के दूत रह चुके हैं. उन्होंने कहा, “जो भी कारण रहा हो यह क्षेत्र के लिए अच्छा है, लेकिन आगे रास्ते में कई ‘अगर’ और ‘मगर’ हैं.”
भारत के अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स के विदेश मामलों के संपादक रेज़ाउल हसन लस्कर ने इस बातचीत के महत्व को कम करके आंका.
लस्कर ने अल जज़ीरा से कहा, “दोनों एक ही कमरे में मौजूद थे और ऐसी स्थिति में दो देशों के वरिष्ठ नेता जैसा करते हैं, वैसा ही किया. उन्होंने हाथ मिलाया और औपचारिक अभिवादन किया.”
उन्होंने कहा कि यह “महत्वपूर्ण” है कि इस मुलाकात की सभी तस्वीरें बांग्लादेशी और पाकिस्तानी आधिकारिक सोशल मीडिया खातों से सामने आईं, भारत से नहीं.
जयशंकर और अयाज़ सादिक़ का हाथ मिलाना पिछले साल सितंबर की घटना से बिल्कुल उलट था.
तब एशिया कप मुक़ाबले के दौरान भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव और उनके खिलाड़ियों ने अपने पाकिस्तानी समकक्षों से हाथ नहीं मिलाया था.
यह टूर्नामेंट संयुक्त अरब अमीरात में खेला गया था और भारत ने रोमांचक फाइनल में पाकिस्तान को हराकर खिताब जीता था. इस घटना ने यह रेखांकित किया था कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच रिश्तों में कड़वाहट कितनी गहरी हो चुकी है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.