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पियाजियो के औद्योगिक भूखंड का पट्टा रद, 30 दिनों में जमीन खाली करने का फैसला बरकरार 

Byadmin

Apr 7, 2026


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश में पियाजियो व्हीकल्स प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित एक औद्योगिक भूखंड के पट्टे को रद करने के निर्णय को बरकरार रखा है।

कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि कंपनी वर्षों तक पट्टे की शर्तों का पालन करने और भूमि का उचित उपयोग करने में विफल रही।

कोर्ट ने पियाजियो को 30 दिनों के भीतर भूखंड का खाली कब्जा उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण को सौंपने का निर्देश दिया है।

हालांकि, राहत के तौर पर कोर्ट ने आदेश दिया कि कार्यवाही के दौरान कंपनी द्वारा जमा की गई 10.95 करोड़ रुपये से अधिक की राशि ब्याज सहित वापस की जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने पियाजियो का औद्योगिक भूखंड पट्टा रद किया

जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली कंपनी की अपील पर सुनवाई की, जिसने उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा लीज रद करने के फैसले की पुष्टि की थी।

शर्तों का उल्लंघन और सुस्त रवैया विवाद ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर में स्थित 33 एकड़ के औद्योगिक भूखंड से संबंधित है, जो कंपनी को विनिर्माण इकाई स्थापित करने के लिए आवंटित किया गया था।

कोर्ट ने पाया कि 2002 में कब्जा मिलने के बावजूद, कंपनी निर्धारित अवधि के भीतर निर्माण कार्य करने या औद्योगिक उत्पादन शुरू करने में विफल रही।

कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया, ‘अपीलकर्ता कंपनी पूर्ण स्तर की औद्योगिक विनिर्माण इकाई स्थापित करने के लिए कोई ठोस प्रयास या वास्तविक इरादा प्रदर्शित करने में विफल रही।’

कंपनी को 30 दिनों में भूखंड खाली करने का निर्देश दिया

कोर्ट ने कंपनी के व्यवहार को ‘लचर’ करार देते हुए कहा कि कंपनी ने पिछले छह वर्षों में भूखंड पर किसी भी सार्थक औद्योगिक गतिविधि या परीक्षण गतिविधियों के होने का प्रमाण नहीं दिया।

विस्तार की मांग खारिज और जमीन वापसी के निर्देश पियाजियो ने तर्क दिया था कि उसने समय विस्तार की मांग की थी, लेकिन पीठ ने इसे खारिज कर दिया।

कोर्ट ने कहा कि समय बढ़ाने की अनुमति शुल्क के भुगतान और एक निर्धारित प्रारूप में हलफनामा प्रस्तुत करने की शर्त पर आधारित थी, जिसे पूरा करने में कंपनी विफल रही।

कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि औद्योगिक भूमि रियायती दरों पर आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए दी जाती है।

पीठ ने कहा, ‘उन वादियों के पक्ष में समानता (इक्विटी) काम नहीं कर सकती जिनका आचरण लापरवाह है और नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।’

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