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भारत और बांग्लादेश में तनाव के बीच पीएम मोदी और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार प्रोफ़ेसर मोहम्मद यूनुस की पहली मुलाक़ात में हिंदुओं की सुरक्षा और शेख़ हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा हावी रहा.
थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में हो रहे बिम्स्टेक (बे ऑफ़ बंगाल इनिशिएटिव फ़ॉर मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन) के छठे शिखर सम्मेलन से इतर दोनों नेताओं की ये मुलाक़ात हुई.
इस मुलाक़ात से ये तो दिखा कि दोनों नेता संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिशें कर रहे हैं और भविष्य में वार्ता के दरवाज़े खुले रखने का संकेत दे रहे हैं.
दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को लेकर सहयोगी और रचनात्मक रिश्ते को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता ज़ाहिर की.
प्रोफ़ेसर मोहम्मद यूनुस ने पीएम मोदी को, दस साल पहले हुई मुलाक़ात की एक तस्वीर भेंट की.
बीते एक दशक में दोनों नेताओं की यह पहली आधिकारिक मुलाक़ात है. बांग्लादेश की ओर से बताया गया कि दोनों नेताओं के बीच क़रीब 40 मिनट तक बातचीत हुई.
इस द्विपक्षीय वार्ता में बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन, मुख्य सलाहकार के प्रतिनिधि डॉ. खलीलुर रहमान, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल शामिल थे.
भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले कुछ समय से हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. पाकिस्तान और चीन के साथ बांग्लादेश की बढ़ती क़रीबी भी दोनों देशों के संबंधों को और जटिल बना रही है.
ऐसे में दोनों शीर्ष नेताओं के बीच हुई यह मुलाक़ात अहम मानी जा रही है.
रिश्ते सहज करने की कोशिश
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दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की ओर से इस मुलाक़ात के दौरान संबंधों को सहज करने की कोशिश दिखी.
प्रोफ़ेसर मोहम्मद यूनुस ने अपने एक्स हैंडल पर द्विपक्षीय वार्ता की तस्वीरें साझा करते हुए मुलाक़ात की जानकारी साझा की है.
इस मुलाक़ात के दौरान प्रोफ़ेसर यूनुस ने प्रधानमंत्री मोदी को एक तस्वीर भी भेंट की.
प्रोफ़ेसर यूनुस ने इसके बारे लिखा कि यह तस्वीर 3 जनवरी 2015 को 102वें इंडियन साइंस कांग्रेस के दौरान की है जब पीएम मोदी ने उन्हें गोल्ड मेडल दिया था.
जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिम्सटेक की अध्यक्षता संभालने पर बांग्लादेश को बधाई दी और आशा व्यक्त की कि यह मंच उसके नेतृत्व में क्षेत्रीय सहयोग को और आगे बढ़ाएगा.
नई दिल्ली की ओर से जारी बयान के अनुसार, “दोनों नेता बिम्सटेक के ढांचे के अंतर्गत क्षेत्रीय समन्वय को आगे बढ़ाने के लिए परामर्श एवं सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए.”
पीएम मोदी ने क्या कहा
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इस मुलाक़ात की तस्वीरें एक्स पर साझा करते हुए पीएम मोदी ने लिखा, “बांग्लादेश के साथ रचनात्मक और अवाम केंद्रित रिश्ते बनाने के लिए भारत प्रतिबद्ध है.”
उन्होंने लिखा, “मैंने बांग्लादेश में शांति, स्थिरता, समावेशी और लोकतंत्र के प्रति भारत के समर्थन की बात दोहराई. साथ ही अवैध रूप से सीमा पार करने की घटनाओं पर रोक लगाने के उपायों पर चर्चा की और हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कल्याण के लिए अपनी गंभीर चिंताएं साझा कीं.”
इस मुलाक़ात के बारे में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने माहौल को ख़राब करने वाली किसी भी बयानबाजी से बचने का आग्रह किया.
मिस्री के मुताबिक़, पीएम मोदी ने प्रो. यूनुस के साथ बातचीत में सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए क़ानून का सख़्त पालन किए जाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया.
पीएम मोदी के कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ‘प्रधानमंत्री ने बांग्लादेश में हिंदुओं सहित अल्पसंख्यकों की सुरक्षा मुद्दा उठाया और उम्मीद जताई कि बांग्लादेश सरकार उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, जिसमें उनके ख़िलाफ़ किए गए अत्याचारों के मामलों की गहन जांच भी शामिल है.’
बयान के अनुसार प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों देशों के बीच के आपसी हित के सभी मुद्दों को रचनात्मक चर्चा के ज़रिए हल किया जाएगा.
बांग्लादेश ने उठाया शेख़ हसीना का मुद्दा
इस मुलाक़ात के बारे में ढाका की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, प्रोफ़ेसर यूनुस ने पीएम मोदी से बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा उठाया.
बयान के अनुसार, मोहम्मद यूनुस ने कहा कि बांग्लादेश, भारत के साथ अपने संबंध को बहुत अहमियत देता है.
प्रोफ़ेसर यूनुस ने कहा, “हमारे दोनों देशों के बीच दोस्ती की गहरी जड़ें साझे इतिहास, भौगोलिक क़रीबी और सांस्कृतिक आत्मीयता में निहित हैं. 1971 के सबसे चुनौतीपूर्ण समय में भारत के लोगों और सरकार की ओर से मिले दृढ़ समर्थन के लिए हम शुक्रगुज़ार रहेंगे.”
बयान के अनुसार, प्रोफ़ेसर यूनुस ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के प्रत्यर्पण के लिए किए गए आवेदन में प्रगति के बारे में भी पीएम मोदी से बात की. यह मुद्दा भारत सरकार के साथ अभी लंबित है.
बयान के अनुसरा, प्रोफ़ेसर यूनुस ने कहा, “पूर्व प्रधानमंत्री ने तमाम मीडिया आउटलेट में भड़काऊ बयान दिया था और बांग्लादेश में हालात को अस्थिर करने की कोशिश कर रही हैं, जो कि भारत की ओर से दी गई मेहमाननवाज़ी का दुरुपयोग है.”
उन्होंने कहा, “बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के ख़िलाफ़ वह लगातार गल़त और भड़काऊ आरोप लगा रही हैं. हम अपील करते हैं कि आपके देश में रहते हुए इस तरह के भड़काऊ बयान देने से भारत सरकार उन्हें रोके.”
बयान के अनुसार, मुख्य सलाहकार ने मानवाधिकार मामलों पर संयुक्त राष्ट्र के हाई कमिश्नर ऑफ़िस की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट का भी हवाला दिया जिसके अनुसार 15 जुलाई से पांच अगस्त 2024 के बीच सुरक्षा बलों और अवामी लीग के कार्यकर्ताओं की ओर से गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन किए गए.
प्रोफ़ेसर यूनुस ने कहा कि इस दौरान प्रदर्शनों में 1400 लोगों की मौत हुई, जिसमें क़रीब 13 प्रतिशत बच्चे हैं.
बयान में कहा गया है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की हालत पर पीएम मोदी की चिंता का जवाब देते हुए प्रोफ़ेसर यूनुस ने कहा कि ‘अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों की रिपोर्टें बढ़ाचढ़ाकर बताई गई हैं और इनमें से बड़ी संख्या फ़ेक न्यूज़ की है.’
बयान के अनुसार, प्रोफ़ेसर यूनुस ने पीएम मोदी से कहा कि वो इन कथित हमलों की खुद जांच पड़ताल के लिए पत्रकारों को भेजें.
उन्होंने कहा कि ‘देश में धार्मिक और लैंगिक आधार पर होने वाली हर घटना की निगरानी के लिए एक प्रभावी तंत्र की स्थापना की गई है और इन घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सरकार गंभीर कार्रवाई कर रही है.’
बांग्लादेश के रुख़ पर क्या कहते हैं विशेषज्ञ
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भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने ढाका के बयान को अड़ियल बताया है.
कंवल सिब्बल ने एक्स पर लिखा, “मोदी के साथ मीटिंग पर बांग्लादेश ने जो बयान जारी किया है वह मददगार नहीं है क्योंकि यह बहुत दूरदर्शी नहीं है.”
“सबसे ख़राब बात यह कि अल्पसंख्यकों के बारे में भारत की चिंता को जिस तरह हल्के में लिया जाता है, वो ऐसे है जैसे भारत सरकार की चिंता सोशल मीडिया की उपज हो. “
सिब्बल ने लिखा है, ” यूनुस अंतरिम सलाहकार हैं. फिर भी पीएम मोदी ने उनसे आधिकारिक मीटिंग कर एक बड़ा राजनीतिक संकेत दिया. वह एक रस्मी मुलाक़ात भी कर सकते थे ताकि ऐसा न लगे कि उन्हें नज़रअंदाज़ किया गया हो.”
“हमारे पूर्वोत्तर को लेकर हाल ही में यूनुस का चीन में दिया गया बयान, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की सरकार के दिनों की याद दिलाता है. इन सबको नज़रअंदाज़ किया गया ताकि भविष्य में दोस्ताना और स्थिर द्विपक्षीय संबंधों के दरवाज़े खुले रहें.”
हाल ही में चीन के दौरे पर गए यूनुस ने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों का हवाला देते हुए चीन से अपनी अर्थव्यवस्था को विस्तार देने की अपील की थी.
उन्होंने पूर्वोत्तर के सातों राज्यों को लैंडलॉक्ड (ज़मीन से चारों ओर से घिरा) क्षेत्र बताया और बांग्लादेश को इस इलाक़े में समंदर का एकमात्र संरक्षक बताते हुए चीन से अपने यहां आर्थिक गतिविधि बढ़ाने की अपील की थी. उनके इस बयान की भारत में तीखी आलोचना हुई थी.
सिब्बल के अनुसार, “बिम्सटेक का सचिवालय बांग्लादेश में है और यूनुस से बातचीत करने के पीछे इसका भी ध्यान रखा गया होगा. बांग्लादेश के हित बेहतर तरीक़े से तभी पूरे होंगे जब वह नेबरहुड फ़र्स्ट पॉलिसी पर खुद भरोसा करे और उसका पालन करे.”
रक्षा विशेषज्ञ ब्रह्म चेलानी का कहना है कि मोदी, कूटनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने में अपने व्यक्तिगत प्रभाव और सहज तालमेल स्थापित करने की अपनी क्षमता का इस्तेमाल करने में भरोसा करते हैं.
चेलानी ने एक्स पर लिखा, “घरेलू स्तर पर यूनुस के भारत विरोधी भावना को भड़काने की कोशिशें भी मोदी को उनसे मिलने से रोक नहीं पाईं.”
अंतरराष्ट्रीय मामलों पर नज़र रखने वाले पत्रकार शशांक मट्टू ने एक्स पर लिखा, “भारत के पूर्वोत्तर पर यूनुस की टिप्पणी पर विवाद के कई दिनों बाद, पीएम मोदी ने उनसे ऐसी बयानबाज़ी करने से बचने को कहा जिससे भारत और बांग्लादेश के रिश्ते पर असर पड़ता हो. ”
बांग्लादेश में उच्चायुक्त रह चुकीं वीना सीकरी ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, “मुझे लगता है कि यह एक अच्छी और खुले मन से मुलाक़ात थी… हमारे प्रधानमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि हम एक लोकतांत्रिक, स्थिर, शांतिपूर्ण, संपन्न और समावेशी बांग्लादेश की उम्मीद करते हैं.”
वीना सीकरी ने कहा, “प्रधानमंत्री ने हिंदुओं समेत अल्पसंख्यकों पर हमलों से जुड़े हालात के बारे में विस्तार से चर्चा की और कहा कि दोषियों पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गई…यह भारत के लिए स्वीकार्य नहीं है. यह दुनिया के लिए भी स्वीकार्य नहीं है क्योंकि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग और दुनिया भर की तमाम एजेंसियों और संगठनों की इस पर नज़र है.”
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बांग्लादेश में जनउभार के चलते पिछले साल पांच अगस्त को पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना सरकार गिर गई थी, उसके बाद से ही दोनों देशों के संबंधों में तनाव देखा जा रहा है. भारत की मौजूदा सरकार से क़रीब रहीं शेख़ हसीना ने भारत में शरण ले रखी है.
अंतरिम सरकार बनने के बाद से बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़े हैं और इस मुद्दे को भारत सरकार लगातार उठाती रही है.
दूसरी ओर पाकिस्तान और चीन से बांग्लादेश की बढ़ती नज़दीकी से भी भारत असहज है.
बीते मार्च के अंत में प्रोफ़ेसर मोहम्मद यूनुस चीन के द्विपक्षीय दौरे पर गए थे और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा हुई. इस यात्रा में उन्होंने चीनी कंपनियों को तीस्ता प्रोजेक्ट में शामिल होने का न्योता दिया.
जबकि तीस्ता नदी के जल बंटवारे का मुद्दा भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से विवाद का विषय रहा है.
यही नहीं चीन की अपनी यात्रा के दौरान बीजिंग में हुए एक कार्यक्रम में प्रोफ़ेसर यूनुस ने यह कहकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया कि भारत के पूर्वोत्तर के सात राज्यों के लिए समंदर का एकमात्र गेटवे बांग्लादेश है.
इसका ज़िक्र करते हुए उन्होंने चीनी कंपनियों से बांग्लादेश में आर्थिक गतिविधि बढ़ाने की अपील की. भारत में इस बयान को चीन के प्रभाव को बढ़ाने के लिए आमंत्रण दिए जाने के रूप में लिया गया.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित