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दक्षिण चीन सागर का मुद्दा एक बार फिर से चर्चा में आ गया है और इसकी वजह फिलीपींस के रक्षा मंत्री का एक बयान है.
इस सागर पर विवाद होता रहा है क्योंकि चीन, फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ताइवान और ब्रुनेई इस पर दावा करते रहे हैं.
इस मुद्दे को लेकर चीन काफ़ी गंभीर रहा है और उसने दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम द्वीप भी बनाए हैं. हर मंच पर चीन दक्षिण चीन सागर पर पुरज़ोर तरीक़े से इस पर दावा करता है.
हालिया मुद्दा भी इसी तरह का है जब फिलीपींस के रक्षा मंत्री ने चीन ‘धौंस जमाने’ का आरोप लगाया है.
उनका दावा है कि एक इंटरनेशनल फ़ोरम में उन्हें चीन का एक पर्चा पकड़ाया गया, जिसमें विवादित समुद्री इलाक़ों पर चीन के बड़े दावों को दोहराया गया था.
हालांकि चीन ने इन दावों को लेकर स्पष्ट कुछ भी नहीं कहा है. चीन के विदेश मंत्रालय का कहना हैकि उसे इसके “बारे में कोई ख़ास जानकारी नहीं है.”
फिलीपींस के रक्षा मंत्री ने पर्चे पर क्या कहा?
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दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल में सोल डिफ़ेंस डायलॉग 2026 में मंगलवार को फिलीपींस के रक्षा मंत्री गिल्बर्टो सी. थियोडोरो जूनियर ने भाग लिया था.
इस दौरान चर्चा के दौरान गिल्बर्टो थियोडोरो मंच पर थे, तभी उन्हें कार्यक्रम के एक कर्मचारी जैसा दिखने वाले शख़्स से एक पर्चा मिला.
फिलीपींस के राष्ट्रीय सुरक्षा के विभाग ने सोशल मीडिया एक्स पर इस घटना का पूरा वीडियो पोस्ट किया है.
पर्चा देखने के बाद गिल्बर्टो रुकते हैं और फिर कहते हैं, “मेरे पास एक पर्चा है. मुझे लगता है कि यह चीन की तरफ़ से है.” इसके बाद उन्होंने उस पर्चे में लिखी बातें पढ़कर सुनाईं.
उन्होंने पर्चा पढ़ते हुए कहा, “दक्षिण चीन सागर मध्यस्थता पर चीन का रुख़ साफ़, एक जैसा और पक्का है. यह मध्यस्थता अंतरराष्ट्रीय क़ानून के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन करता है.”
“तथाकथित फ़ैसला (फ़िलीपींस के पक्ष में) ग़ैर-क़ानूनी और अमान्य था और इसे मानने की कोई बाध्यता नहीं है. चीन न तो इस फ़ैसले को स्वीकार करता है और न ही इसे मानता है. वह इसका विरोध करता है और इससे जुड़े किसी भी दावे को कभी स्वीकार नहीं करेगा.”
“चीन इस फ़ैसले को स्वीकार नहीं करेगा”, इस वाक्य पर गिल्बर्टो ने कहा, “क्योंकि आप हार गए हैं.”
ऐसा अनुमान है कि ये नोट फिलीपींस के उस क़ानूनी मामले का ज़िक्र था जो उसने साल 2016 में चीन के ख़िलाफ़ ‘यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ़ द सी’ (यूएनसीएलओएस) के तहत दायर किया था.
इस मामले का फ़ैसला पूरी तरह से फिलीपींस के पक्ष में आया था. फ़ैसले में कहा गया था कि चीन के दावों के मुख्य हिस्से, जिनमें ‘नाइन-डैश लाइन’, ज़मीन को फिर से हासिल करने की हालिया गतिविधियाँ और फिलीपींस के समुद्री इलाक़े में अन्य गतिविधियाँ शामिल थीं, ग़ैर-क़ानूनी थे.
चीन लंबे समय से इस फ़ैसले का विरोध करता रहा है और फिलीपींस पर विवादित समुद्री इलाक़े में चीन की संप्रभुता का उल्लंघन करने का आरोप लगाता रहा है, जिसके कारण दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच कई बार टकराव की स्थिति बनी है.
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चीन को सुनाई खरी-खोटी
उस पर्चे को पढ़ने के बाद फिलीपींस के रक्षा मंत्री दर्शकों से पूछते हैं, “आप किसी ऐसे देश के साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर कैसे पेश आ सकते हैं. यह इस मंच के आयोजकों का अनादर करता है? आप उम्मीद कैसे कर सकते हैं कि उनके साथ शालीनता से पेश आया जाए?”
उन्होंने कहा, “मैं आपसे पूछता हूं, क्या यह सही काग़ज़ है जो मुझे तब दिया जाए जब मुझसे मंच पर कोई सवाल पूछा जा रहा हो? और आप इस तरह के व्यवहार से कैसे निपटेंगे?”
फिलीपींस के नेता ने कहा, “यह व्यवहार न केवल अंतरराष्ट्रीय क़ानून का अनादर करता है बल्कि ‘यूएनसीएलओएस को ज़मीन पर फेंकना और उसे रौंदना है’, यह उस बुनियादी शिष्टाचार का भी अनादर है जिसे हमारे बहुत ही अच्छे मेज़बान दक्षिण कोरिया और यहां मौजूद बाकी लोगों के प्रति दिखाया जाना चाहिए था. इसलिए, शायद चीन को बुनियादी शिष्टाचार और व्यवहार अपनाने की ज़रूरत है.”
पर्चा भेजने की घटना को फिलीपींस के रक्षा मंत्री ने “ज़बरदस्ती, दादागिरी और आक्रामकता” बताते हुए कहा कि, “शायद चीन को बुनियादी शिष्टाचार और व्यवहार अपनाने की ज़रूरत है.”
पर्चा देने वाले व्यक्ति की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, “मैं इस काग़ज़ को इस बात की निशानी के तौर पर रखूंगा कि चीन कितना बेताब है और आज़ाद लोगों के सामने उसका पक्ष कितना कमज़ोर है. मुझे यह काग़ज़ देने वाले व्यक्ति का बहुत-बहुत धन्यवाद. आपने अभी-अभी अपने देश की बहुत बड़ी सेवा की है.”
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चीन ने क्या जवाब दिया?
इस घटना पर चीन की ओर से कोई साफ़ जवाब नहीं आया है. चीन की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा है कि उन्हें इसके बारे में मालूम नहीं है.
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने समाचार एजेंसी एएफ़पी की ओर से एक रेगुलर प्रेस कॉन्फ्रेंस में घटना के बारे में पूछे जाने पर कहा कि उन्हें “ज़मीनी हालात की बारीकियों के बारे में पूरी जानकारी नहीं है.”
उन्होंने कहा कि “दक्षिण चीन सागर मध्यस्थता मामले पर चीन का रुख़ स्पष्ट और एक जैसा रहा है.”
उन्होंने कहा, “हम फिलीपींस के कुछ लोगों से अपील करते हैं कि वे दिखावा करना और गड़बड़ी पैदा करना बंद करें, और चीन-फिलीपींस संबंधों और दक्षिण चीन सागर में स्थिरता को कमज़ोर करने की कोशिशें रोकें.”
एएफ़पी ने बताया है कि इस डायलॉग को आयोजित करने वाले दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने गिल्बर्टो के आरोपों पर टिप्पणी के लिए उनके सवालों का कोई जवाब नहीं दिया है.
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दक्षिण चीन सागर को लेकर विवाद
क़रीब 35 से 36 लाख वर्ग किलोमीटर में फैले हुए दक्षिण चीन सागर पर चीन, फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ताईवान और ब्रुनेई अपना दावा करते रहे हैं.
क़ुदरती ख़ज़ाने से भरपूर इस समुद्री इलाक़े में जीवों की सैकड़ों प्रजातियाँ पाई जाती हैं.
हालिया सालों में चीन ने दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम रूप से बनाए गए टापुओं पर सैन्य अड्डे स्थापित कर लिए हैं. चीन दलील देता है कि इन इलाक़ों पर उसका सदियों पुराना अधिकार है.
दक्षिणी चीन सागर, प्रशांत महासागर और हिंद महासागर के बीच स्थित बेहद अहम कारोबारी इलाक़ा भी है. दुनिया के कुल समुद्री व्यापार का 20 फ़ीसदी हिस्सा यहाँ से गुज़रता है.
चीन का इरादा है कि दक्षिणी चीन सागर से होने वाली कारोबारी आवाजाही पर उसका नियंत्रण हो. लेकिन अमेरिका मानता है कि ये दुनिया के कारोबार के लिए ठीक नहीं होगा.
चीन और फिलीपींस के बीच कई बार दक्षिण चीन सागर को लेकर तनातनी हुई है. दक्षिण चीन सागर में एक विवादित इलाक़े पर चीन का क़ब्ज़ा करने के बाद फिलीपींस ने 2013 में मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू की थी. चीन ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया था.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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