डिजिटल डेस्क, बेंगलुरु। कर्नाटक में स्पेशल इंटेंसिव रिव्यू (SIR) के दौरान भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (सेक्युलर) के कार्यकर्ताओं पर आरोप लगा कि उन्होंने बड़े पैमाने पर वोटर लिस्ट से हजारों नाम हटवाने की कोशिश की है।
बीजेपी और JD(S) के कार्यकर्ताओं पर लगे इन आरोपों के बीच राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी वी. अंबुकुमार ने सोमवार को कहा कि फॉर्म 7 के जरिए एक भी नाम नहीं हटाया गया है।
फॉर्म 7 का इस्तेमाल तब होता है, जब वोटर लिस्ट में किसी नाम को शामिल करने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई जाती है या उसे हटाने की मांग की जाती है।
फॉर्म 7 के जरिए नहीं हटा कोई नाम
कर्नाटक में 16 जून से 4 अक्टूबर के बीच ऐसी 91,278 अर्जियां मिलीं। 23 सितंबर तक, जब दावे और आपत्तियों का चरण खत्म हुआ था, तब तक यह संख्या 58,220 थी। इनमें से कोई भी नाम शामिल करने के प्रस्ताव पर आपत्ति नहीं थी।
मुख्य चुनाव अधिकारी वी. अंबुकुमार ने कहा कि इन पर 22 अक्टूबर से पहले कार्रवाई की जाएगी और आखिरी सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।
अंबुकुमार ने करीब छह घंटे की बातचीत के बाद कहा कि उन्होंने बड़ी संख्या में आई अर्जियों का लिखित रूप में संज्ञान लिया है और गलत बयानों की जांच के आदेश दिए हैं।
कर्नाटक के मुख्य चुनाव अधिकारी ने कहा कि उन्हें 7-10 दिन पहले ही बड़ी संख्या में अर्जियां दाखिल होने के बारे में पता चला था। इस पर उन्होंने अधिकारियों को कार्रवाई करने के लिए कहा था।
ERO (चुनाव पंजीकरण अधिकारी) की ओर से कोई FIR दर्ज नहीं कराई गई है। उन्होंने कहा, ‘सात दिन का नोटिस पीरियड अभी बाकी है।’ अब तक जो FIR दर्ज की गई हैं, वे निजी व्यक्तियों द्वारा BNS के तहत दर्ज कराई गई हैं और मामला अदालत में विचाराधीन है।
जब तक जरूरी न हो, ERO के पास न जाएं
मुख्य चुनाव अधिकारी कुमार ने कहा कि चल रही SIR प्रक्रिया के दौरान सुनवाई के लिए मतदाताओं को इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) के पास जाने की जरूरत नहीं है, जब तक कि ऑफ़िसर को उनकी मौजूदगी जरूरी न लगे।
वी. अंबुकुमार ने कहा कि सुनवाई की प्रक्रिया ECI की समय-सीमा से पहले, 13 अक्टूबर तक पूरी होने की उम्मीद है। SIR पूरी होने के बाद, सात राजनीतिक पार्टियों को फाइनल वोटर लिस्ट डिजिटल फॉर्मेट में (बिना फोटो के) और फिजिकल कॉपी में (फोटो के साथ) दी जाएगी।
कुमार ने बताया कि अब तक ‘नो मैपिंग’ और ‘विसंगतियों’ (anomalies) वाली कैटेगरी में मतदाताओं को 40 लाख से ज्यादा नोटिस भेजे जा चुके हैं।
कुमार ने बताया कि मान्यता प्राप्त पार्टियों के अनुरोध पर, ऐसी मतदाताओं की लिस्ट CEO की वेबसाइट पर पब्लिश की गई है, जैसा कि राजनीतिक पार्टियों ने मांगा था।
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