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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया. आगामी वित्त वर्ष में अलग-अलग मंत्रालय के मद में कितनी रक़म जाएगी ये बजट में ही तय होता है.
साल 2026-27 के वित्त वर्ष के लिए रक्षा मंत्रालय के बजट में तक़रीबन 15 फ़ीसदी की बढ़ोतरी की गई है.
बीते साल रक्षा बजट 6,81,210 करोड़ रुपये था जबकि आगामी बजट 7,84,678 करोड़ रुपये का है.
रक्षा मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट करके बताया है कि आगामी बजट में बढ़ोतरी का मक़सद मॉडर्नाइज़ेशन, टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन और बेहतर संसाधन इस्तेमाल के लिए आसान ख़रीद पर ख़ास ध्यान देना है.
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रक्षा बजट के किस मद में कितनी रक़म?
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रक्षा बजट के तहत आने वाले कैपिटल आउटले में सबसे अधिक 21.84 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई है. पहले ये 1.80 लाख करोड़ रुपये था जिसे अब बढ़ाकर 2.19 लाख करोड़ रुपये किया गया है. हथियारों और उपकरणों की ख़रीद-फ़रोख़्त कैपिटल आउटले मद से ही होती है.
इसके अलावा डिफ़ेंस सर्विसेज़ (रेवेन्यू) में 17.24 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई है. पहले ये 3.11 लाख करोड़ रुपये था जिसे बढ़ाकर 3.65 लाख करोड़ रुपये किया गया है.
डिफ़ेंस सर्विसेज़ (रेवेन्यू) में ही दिन-प्रतिदिन ऑपरेशन के ख़र्चे दर्ज होते हैं. इसके तहत मेंटेनेंस, ईंधन, मरम्मत और तनख़्वाह जैसे ख़र्चे शामिल हैं.
इसके अलावा डिफ़ेंस पेंशन में 6.53 फ़ीसदी की बढ़ोतरी की गई है, जो अब 1.71 लाख करोड़ रुपये का हो गया है.
रक्षा बजट में 15 फ़ीसदी की बढ़ोतरी ऐसे समय पर हुई है जब बीते साल मई में पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ भारत का सैन्य संघर्ष हुआ था.
पहलगाम में चरमपंथी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में चरमपंथी कैंपों को निशाना बनाने का दावा किया था. भारत ने इस अभियान को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का नाम दिया था.
इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष शुरू हुआ था. भारतीय सेना ने कहा था कि पाकिस्तानी सेना के डीजीएमओ से आए संघर्ष विराम के निवेदन के बाद सैन्य टकराव रुक गया था.
उसके बाद से ही ये अनुमान लगाए जा रहे थे कि भारत अपने रक्षा बजट में बढ़ोतरी कर सकता है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा बजट में हुई इस बढ़ोत्तरी का स्वागत किया है.
उन्होंने कहा, “बजट से भारत की रक्षा क्षमताओं में इज़ाफ़ा होगा. मैं डिफ़ेंस सेक्टर में 7.85 लाख करोड़ रुपए आवंटित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करता हूं.”
रक्षा बजट में 15 फ़ीसदी की बढ़ोतरी क्या सभी ज़रूरतों को पूरी करता है? इस सवाल पर रक्षा विश्लेषक राहुल बेदी नए रक्षा बजट को नाकाफ़ी बताते हैं.
वो कहते हैं, “महंगाई दर लगातार बढ़ रही है. चिंता की बात यह भी है कि रुपया लगातार कमज़ोर हो रहा है. इस लिहाज़ से देखें तो 15 फ़ीसदी की बढ़ोतरी शून्य हो जाएगी. इस वजह से इसे फ़्लैट बजट ही कहा जाना चाहिए.”
इतने बजट से आधुनिक हो पाएगी सेना?
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भारत और पाकिस्तान के सैन्य संघर्ष के दौरान अलग ही तरह की एक जंग देखी गई जिसमें ड्रोन और तकनीक का इस्तेमाल हुआ.
सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने बीते महीने एक कार्यक्रम में कहा था कि भारतीय सशस्त्र बल नेट-सेंट्रिक से डेटा-सेंट्रिक युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं, जिसमें भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस एक महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में उभर रहा है.
उन्होंने कहा कि एडवांस्ड सेंसर और एआई टेक्नोलॉजी युद्ध के मैदान में लगभग पूरी पारदर्शिता ला रहे हैं, जिससे सरप्राइज़ देना मुश्किल होता जा रहा है और जीत के लिए टेक्नोलॉजिकल श्रेष्ठता ज़रूरी हो गई है.
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सिर्फ़ आधुनिक टेक्नोलॉजी का होना ही काफ़ी नहीं है और सैन्य नेतृत्व को भी बौद्धिक रूप से तैयार रहना चाहिए और बदलती चुनौतियों का सामना करने के लिए अपने काम करने के तरीके़ को अपनाना चाहिए.
इस तरह की बात वो पहले भी कह चुके हैं. क्या यह रक्षा बजट भविष्य की इन सभी ज़रूरतों को पूरा करता है? इस सवाल पर रक्षा विश्लेषक राहुल बेदी कहते हैं कि भारत को 114 नए लड़ाकू विमान और छह पनडुब्बियों का क़रार करना है.
वो कहते हैं, “जर्मनी के साथ छह पनडुब्बियों का 10 अरब डॉलर का क़रार है. वहीं 114 नए लड़ाकू विमान ख़रीदे जाएंगे, 30-35 अरब डॉलर का ये सौदा किसके साथ होगा अभी यह तय नहीं है. इसका पैसा एकसाथ नहीं जाता है लेकिन इसके लिए बजटिंग और मोल-भाव करना होता है.”
“जब से ऑपरेशन सिंदूर हुआ है तब से सेना के प्रमुख, सीडीएस, रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री कहते रहे हैं कि सेना को तकनीकी रूप से आधुनिक किया जाएगा. इसके लिए पैसों की ज़रूरत होती है और बजट में 15 फ़ीसदी की बढ़ोतरी से ये मुश्किल दिखाई देता है.”
अंग्रेज़ी पत्रिका द वीक के सीनियर असिस्टेंट एडिटर संजीब कुमार बरुआ ने पत्रिका के यूट्यूब चैनल पर बताया कि केंद्रीय बजट में रक्षा मंत्रालय सबसे बड़ा बजट पाने वाला मंत्रालय है, इसका कुल बजट में 14.68 फ़ीसदी हिस्सा है जबकि ये बीते साल 13.45 फ़ीसदी था.
वो कहते हैं, “रक्षा बजट पर विचार-विमर्श कभी आसान नहीं होता. जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रक्षा के लिए अलग रखे जाने वाले फ़ंड पर चर्चा और कैलकुलेशन के लिए बैठी होंगी, तो कई फ़ैक्टर्स ने उन्हें गहराई से सोचने पर मजबूर किया होगा. जैसे- ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद की स्थिति, चीन की तेज़ तकनीकी और सैन्य प्रगति, भारत का आत्मनिर्भर मिशन और अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों की तत्काल ज़रूरत.”
“2026–27 का यह आवंटन पिछले साल के 6.81 लाख करोड़ रुपये के रक्षा बजट से 15.27% ज़्यादा है. इससे संकेत मिलता है कि रक्षा ख़र्च लगातार बढ़ेगा, और सैन्य आधुनिकीकरण की रफ़्तार को न केवल कायम रखा जाएगा बल्कि और तेज़ किया जाएगा.”
आधुनिकीकरण के लिए क्या सिर्फ़ लड़ाकू विमान या पनडुब्बियों की ख़रीद काफ़ी है? इस पर राहुल बेदी कहते हैं, “आज के समय में हेलीकॉप्टर, लड़ाकू विमान और पनडुब्बियों के साथ-साथ ड्रोन और साइबर वॉरफ़ेयर की अहमियत बढ़ गई है. इस समय पनडुब्बियों और लड़ाकू विमानों की कमी है.”
“भारतीय वायु सेना में 42 फ़ाइटर स्क्वॉड्रन की मंज़ूरी है जबकि आज की तारीख़ में सिर्फ़ 29-30 स्क्वॉड्रन हैं. एक स्क्वॉड्रन में तक़रीबन 20 जहाज़ होते हैं तो इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि 250-300 जहाज़ों की ज़रूरत है. पनडुब्बियां पुरानी हो गई हैं जिन्हें बदलना है. हेलीकॉप्टर और ट्रेनिंग एयरक्राफ़्ट पुराने हो गए हैं जिनकी जगह नए आने हैं.”
“इस तरह से देखें तो कई ज़रूरतें हैं और इन सभी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए बजट में पैसों की ज़रूरत होती है.”
चीन-पाकिस्तान के आगे कहां है भारत का रक्षा बजट
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पाकिस्तान का रक्षा बजट 2122 अरब पाकिस्तानी रुपये से बढ़कर 2550 अरब पाकिस्तानी रुपये किया गया था. आसान शब्दों में समझें तो पाकिस्तान के जीडीपी का ये सिर्फ़ 1.97 फ़ीसदी था.
वहीं चीन की बात करें तो साल 2024 में उसका रक्षा बजट उसकी 18.74 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी का 1.7 फ़ीसदी था. बांग्लादेश का रक्षा बजट साल 2024 में उसकी 450 अरब डॉलर की जीडीपी का महज़ 0.9 फ़ीसदी था.
दूसरी ओर भारत का कुल रक्षा बजट उसकी कुल जीडीपी तक़रीबन 4 ट्रिलियन डॉलर का 1.9 फ़ीसदी है.
इन आंकड़ों को सामने रखें तो पाकिस्तान और बांग्लादेश का रक्षा बजट भारत के आगे काफ़ी छोटा है. वहीं भारत का रक्षा बजट चीन के आगे काफ़ी छोटा है.
तीनों देशों के बजट की तुलना पर राहुल बेदी कहते हैं, “चीन का बजट हमारे मुक़ाबले बहुत-बहुत आगे है. पाकिस्तान के बजट को कम करके नहीं देखना चाहिए क्योंकि चीन.. पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत भारत के कई पड़ोसी देशों की भी मदद करता है. इस वजह से तुलना नहीं की जा सकती है.”
भारत का रक्षा बजट उसकी ज़रूरतों के लिहाज़ से कितना होना चाहिए? इस सवाल पर राहुल बेदी कहते हैं कि जब तक रक्षा बजट कुल जीडीपी का 3 फ़ीसद नहीं होगा तब तक उसकी ज़रूरतें पूरी करने में मुश्किलें आएंगी.
वो कहते हैं, “1962 में जब चीन से जंग हुई थी तब से लेकर आज तक कुल रक्षा बजट जीडीपी के इसी आंकड़े के आसपास ही है. हमारे देश की जीडीपी कई गुना ज़रूर बढ़ी है लेकिन रक्षा बजट 2 फ़ीसदी के आसपास ही पहुंच पाता है. मिलिट्री की डिमांड हमेशा से कुल जीडीपी का 3 फ़ीसदी रही है.”
“अगर हमें सेना को जल्द से जल्द आधुनिक करना है तो रक्षा बजट को कुल जीडीपी का 3 फ़ीसदी लगातार रखना होगा.”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.