डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सोमवार से घरेलू हवाई किराए को नियंत्रण-मुक्त किया जा रहा है। सरकार ने टिकट की कीमतों पर लगी अस्थायी सीमा हटा दी है, जिससे एयरलाइंस के लिए बढ़ती परिचालन लागत के बीच किराए को स्वतंत्र रूप से तय करने का रास्ता खुल गया है।
यह कदम केंद्र सरकार द्वारा दिसंबर 2025 में घरेलू हवाई किरायों पर सीमा तय किए जाने के महीनों बाद उठाया गया है। यह फैसला उड़ानों में बड़े पैमाने पर हुई रुकावटों के बाद लिया गया, जिसके कारण पूरे सेक्टर में टिकटों की कीमतों में भारी उछाल आ गया था।
एयरलाइंस स्थितियों के अनुसार तय कर सकेंगी कीमतें
अब जब यह सीमा हटा दी गई है तो एयरलाइंस एक तरफा इकोनॉमी टिकट के लिए (दूरी के आधार पर) लगभग 18,000 रुपये की पिछली ऊपरी सीमा से अब बंधी नहीं रहेंगी और वे मांग तथा बाजार की स्थितियों के अनुसार टिकटों की कीमतें तय कर सकेंगी।
उड्डयन मंत्रालय ने क्या कहा?
सीमा हटाने के अपने आदेश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा, “अधिक मांग, रुकावटों या आपात स्थितियों के दौरान किराए में अत्यधिक या अनुचित बढ़ोतरी को गंभीरता से देखा जाएगा। यदि जनहित में आवश्यक हुआ तो किराए की सीमा या अन्य हस्तक्षेपों को फिर से लागू किया जा सकता है।”
यह फैसला विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) की बढ़ती कीमतों और उड़ान संचालन को प्रभावित करने वाले भू-राजनीतिक तनावों के बाद आया है, जिससे एयरलाइन के खर्चों में काफी वृद्धि हुई है।
अधिकारियों ने कहा कि इस फैसले का मकसद एविएशन सेक्टर में बाजार की सामान्य गतिशीलता को बहाल करना है, जिससे व्यवधानों के कारण आई अस्थिरता के बाद जब यह उद्योग स्थिर हो रहा है तो एयरलाइनों को कीमतों तय करने में ज्यादा लचीलापन मिल सके।
एयरलाइंस कंपनियां कर रही थीं ये मांग
एयरलाइंस बढ़ती वित्तीय दबाव का हवाला देते हुए इन पाबंदियों को हटाने की मांग कर रही थीं। इंडस्ट्री बॉडी ‘फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस’ ने यह बात उठाई थी कि किराए पर लगी पाबंदियों के जारी रहने से उन्हें राजस्व का नुकसान हो रहा है, ठीक ऐसे समय में जब एयरलाइंस पहले से ही बढ़ते ईंधन खर्च और ऑपरेशनल चुनौतियों से जूझ रही हैं।