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2024 में जानी मानी पॉप स्टार टेलर स्विफ़्ट के ‘द एराज़’ टूर का आख़िरी पड़ाव कनाडा में था. संगीत उद्योग का यह अब तक का सबसे अधिक मुनाफ़ा कमाने वाला म्यूज़िक टूर था.
टेलर स्विफ़्ट का यह मेगा टूर दो सालों तक चला जिसमें उन्होंने पांच महाद्वीपों के कई देशों में 149 लाइव म्यूज़िक कॉन्सर्ट किए.
इस टूर ने दो अरब डॉलर से अधिक कमाए. इससे पहले होने वाले मेगाटूर की कमाई इसकी आधी भी नहीं थी.
टेलर स्विफ़्ट ने संगीत उद्योग में एक नया रिकॉर्ड कायम किया.
नौ महीने बाद पॉप बैंड कोल्ड प्ले ने अपने ‘म्यूज़िक ऑफ़ द स्फ़ीयर्स’ वर्ल्ड टूर का एक और पड़ाव पूरा किया.
कोल्ड प्ले के मेगाटूर ने अब तक 1.5 अरब डॉलर से अधिक कमा लिए हैं. सवाल है कि म्यूज़िक मेगाटूर भारी मुनाफ़े का स्रोत कैसे बन गए?
बड़ा फ़ैन बेस
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म्यूज़िक बैंड अपना फ़ैन बेस कैसे बढ़ाते हैं या उन्हें चाहने वालों की संख्या कैसे बढ़ा रहे हैं, यह समझने के लिए दक्षिण कोरियाई म्यूज़िक शैली के-पॉप के कलाकारों के प्रयासों को समझना ज़रूरी है.
के-पॉप दरअसल कोरियाई और कई पश्चिमी संगीत शैलियों का मिश्रण है. उनकी धुनों और गीतों में जोश और जानदार बीट्स होती हैं.
पेचीदा और आकर्षक डांस होता है. इतना ही नहीं के-पॉप बैंड्स अपने फ़ैन्स से जुड़ने के लिए सोशल मीडिया और टेक्नोलॉजी का भी जमकर इस्तेमाल करते हैं.
उनकी सफलता को समझने के लिए हमने बात की सियोल स्थित म्यूज़िक डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी रूट नोट्स के एशिया प्रमुख केविन किम से.
उनका कहना है कि पश्चिमी कलाकारों और कोरियाई कलाकारों के बीच एक बड़ा फ़र्क यह है कि कोरियाई के-पॉप आर्टिस्ट हमेशा ऑनलाइन रहते हैं. यूट्यूब पर उनकी मौजूदगी रहती है. कई आर्टिस्ट ‘बबल’ एप पर सीधे अपने फ़ैन्स के साथ चैट भी करते हैं.
बबल एक दक्षिण कोरियाई सोशल मीडिया एप है जिसके ज़रिए फ़ैन्स अपने म्यूज़िक स्टार्स से सीधे मैसेज प्राप्त कर सकते हैं. इसका इन बैंड्स के मेगा कॉन्सर्ट्स की सफलता में बड़ा योगदान रहा है.
केविन किम कहते हैं कि इस एप के ज़रिये के-पॉप बैंड्स जानते हैं कि उनके सबसे अधिक फ़ैन्स किन इलाक़ों में हैं और उसी आधार पर वे अपने कॉन्सर्ट टूर तय करते हैं और अपने कार्यक्रमों की घोषणा करते हैं.
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के-पॉप बैंड्स के कई फ़ैन्स उन्हें इतना पसंद करते हैं कि किसी एक बैंड के कॉन्सर्ट को देखने के लिए दूर शहरों और दूसरे देशों तक पहुंच जाते हैं.
उनके फ़ैन्स नाचते गाते समारोह स्थल पहुंचते हैं जिससे इन बैंड को ज़बरदस्त पब्लिसिटी मिलती है. कई बार यह फ़ैन्स एक लाइट स्टिक लेकर आते हैं जिसके रंग से पता चलता है कि वे किस क्षेत्र के हैं.
इस लाइट स्टिक की लाइट को कॉन्सर्ट के आयोजक नियंत्रित करते हैं जिससे संगीत की धुन के साथ उसके रंग बदलते हैं या फ्लैश निकलते हैं जिससे कॉन्सर्ट का माहौल और रंगीन हो जाता है.
केविन किम ने बताया कि यह लाइट स्टिक काफ़ी एडवांस टेक्नोलॉजी से बनती हैं. संगीत के उतार-चढ़ावों के अनुसार उसके रंग और रोशनी बदलती है. कभी कॉन्सर्ट हॉल के दाहिने हिस्से में लाइट स्टिक उजागर होती हैं तो कभी बाएं हिस्से में.
इससे दर्शकों और श्रोताओं के लिए कॉन्सर्ट का अनुभव काफ़ी डायनैमिक हो जाता है. उन्हें महसूस होता है कि वे उस संगीत का हिस्सा हैं.
लाइट स्टिक ही नहीं बल्कि कोरियाई के-पॉप बैंड्स अपने फ़ैन्स को बैंड से जुड़ी काफ़ी दूसरी सामग्री भी बेचते हैं.
केविन किम ने कहा कि, “कोरियन बैंड्स अपने बैंड के या उसके स्टार्स की तस्वीरों के पोस्टर, टी शर्ट और की-चेन जैसी कई चीज़ें बेचते हैं. हर कॉन्सर्ट के लिए नई तस्वीरों के साथ टीशर्ट और की-चेन बनाकर जारी किए जाते हैं.”
उनके फ़ैन्स ये चीज़ें बड़े शौक से ख़रीदते और कलेक्ट करते हैं.
यह सभी रणनीतियां कॉन्सर्ट टूर को पहले से कहीं अधिक मुनाफ़े में ले आई हैं. मगर सवाल उठता है कि यह इतना सफल कैसे हुए. और संगीत एल्बम या सीडी आदि बेचकर पैसे कमाने के पुराने तरीक़ों का क्या हुआ?

डिजिटल बदलाव
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अमेरिका की मियामी यूनिवर्सिटी के फ़्रॉस्ट स्कूल ऑफ़ म्यूज़िक की प्रोफ़ेसर सेरोना एल्टन कहती हैं कि पहले पॉप म्यूज़िक बैंड्स कॉन्सर्ट टूर का इस्तेमाल अपनी नयी संगीत एल्बम के रेकॉर्ड या सीडी को प्रमोट करने के लिए करते थे ताकि उनके फ़ैन्स उनकी एल्बम ख़रीदें लेकिन अब यह म्यूज़िक बैंड कॉन्सर्ट टूर से सीधा मुनाफ़ा कमा रहे हैं.
उनके अनुसार इसकी एक बड़ी वजह पिछले बीस सालों में डिजिटल टेक्नोलॉजी में आए परिवर्तन हैं क्योंकि पहले लोग किसी आर्टिस्ट की एल्बम ख़रीदने म्यूज़िक स्टोर जाते थे लेकिन अब वे उनके गाने आसानी से इंटरनेट पर डाउनलोड कर सकते हैं और कई बार ग़ैरकानूनी तरीके़ से मुफ़्त में यह गाने डाउनलोड करते हैं.
सेरोना एल्टन ने कहा कि, “पहले सबसे ज़्यादा म्यूज़िक रेकॉर्ड या सीडी युवा ख़रीदते थे. अब वो ग़ैरक़ानूनी तरीके़ से इंटरनेट से यह म्यूज़िक डाउनलोड करने लगे हैं. इसने संगीत उद्योग का समीकरण बदल दिया है.”
वह कहती हैं कि जब कलाकारों ने देखा कि उनके संगीत रेकॉर्ड की बिक्री धीरे-धीरे घटती जा रही है तो उन्होंने कॉन्सर्ट टूर के ज़रिए अपने संगीत से पैसे कमाने का विकल्प अपनाया.
सेरोना कहती हैं कि कॉन्सर्ट टूर से पॉप कलाकारों के संगीत की इंटरनेट के माध्यमों पर स्ट्रीमिंग बढ़ती है लोग कॉन्सर्ट की घोषणा होते ही उनके एल्बम ऑनलाइन ख़रीदने लगते हैं. लेकिन इससे ख़ास ज़्यादा कमाई नहीं होती.
इसलिए कलाकारों के लिए यह ज़रूरी होता है कि कॉन्सर्ट एक बड़ा शानदार शाहकार बने जिसकी चर्चा हो और बड़ी संख्या में लोग उसके टिकट ख़रीदें. इन कॉन्सर्ट को भव्य स्तर पर आयोजित करने में बड़ा निवेश आवश्यक होता है.
कॉन्सर्ट की भव्यता
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सेरोना एल्टन कहती हैं कि यह कॉन्सर्ट विशाल स्टेडियमों में आयोजित होते हैं जिसमें हज़ारों दर्शक आते हैं.
स्टेज के नज़दीकी दो-तीन कतारों से पीछे बैठे लोगों को स्टेज पर परफ़ॉर्म कर रहे आर्टिस्ट साफ़ दिखायी नहीं देते. ऐसे में केवल माइक पकड़ कर गाने से काम नहीं चलता. उस स्टेडियम में भव्य सेट लगाने पड़ते हैं, विशाल वीडियो स्क्रीन लगाई जाती हैं जिस पर परफ़ॉर्म कर रहे आर्टिस्ट साफ़ और क़रीब से दिखाई देते हैं.
इसके लिए नई टेक्नोलॉजी के ज़रिए लाइट्स और साउंड का एक भव्य अनुभव साकार करना पड़ता है ताकि उस स्टेडियम में मौजूद सभी दर्शक उसका पूरा आनंद उठा सकें.
ये शो कई शहरों में होते हैं और लाखों टिकट बिकते हैं. इस विशाल तामझाम को एक जगह से दूसरी जगह और कई बार दूसरे देशों में ले जाना बड़ा ख़र्चीला काम होता है. इसलिए यह ज़रूरी हो जाता है कि यह काम बड़ा मुनाफ़ा भी दे.
इस काम में सोशल मीडिया की भी बड़ी भूमिका होती है. सेरोना एल्टन बताती हैं कि टूर करने वाले बैंड को पता करना पड़ता है कि उसके सबसे ज़्यादा फ़ैन किन शहरों में हैं. वहां कब, कितने शो करने चाहिए.
वह कहती हैं कि बहुत सोच-विचार कर ही पूरे टूर की योजना बनाई जाती है. म्यूज़िक स्ट्रीमिंग और संगीत एल्बम की बिक्री के आधार पर पता लगाया जाता है कि किस बाज़ार में उनके कॉन्सर्ट की कितनी मांग होगी.
कई बार इस मांग को ध्यान में रखकर एक ही जगह कई शो किए जाते हैं.
एक सवाल यह भी है कि आज के समय जब ज़्यादातर संगीत डिजिटल माध्यमों से सुना जा रहा है उसमें यह कॉन्सर्ट टूर क्या नई बात लाते हैं?
टूर का अर्थशास्त्र
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यूके की न्यू कासल यूनिवर्सिटी में संगीत विभाग के प्रमुख ऐडम बेहर कहते हैं कि पहले पॉप म्यूज़िक आर्टिस्ट का काम इतना पेचीदा नहीं था.
आर्टिस्ट स्टूडियो जाकर अपनी एल्बम रिकॉर्ड करते थे और फिर उसके प्रचार और प्रमोशन के लिए काम करते थे. टूर के आयोजन में म्यूज़िक लेबल यानी संगीत को रिकॉर्ड करके उसका वितरण करने वाली कंपनियां योगदान देती थीं.
मगर डिजिटल युग में यह समीकरण बदल गए हैं. ऐडम बेहर का कहना है कि किसी संगीत एल्बम की ऑनलाइन स्ट्रीमिंग की कोई सीमा नहीं है. मगर टूर कॉन्सर्ट के टिकट सीमित होते हैं और लाइव म्यूज़िक का मज़ा ही निराला है जो उन्हें ख़ास बनाते हैं. और यही वजह टूर कॉन्सर्ट को बड़े मुनाफ़े वाला व्यापार बनाती है.
वह कहते हैं, “किसी गाने के रिकॉर्ड या फ़ाइल तो करोड़ों लोगों के पास हो सकते हैं लेकिन पॉप स्टार को सामने लाइव परफ़ॉर्म करते हुए देखने-सुनने का आनंद अलग है.”
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“एक विशाल स्टेडियम में हज़ारों लोगों होते हैं जिसमें कोई दर्शक एक छोटे तिनके समान होता है. मगर कॉन्सर्ट के सेट और लाइट्स से माहौल बेहद जोशीला और उन्मादपूर्ण हो जाता है जिससे कॉन्सर्ट में संगीत का आनंद उठाना एक दुर्लभ अनुभव जैसा होता है. इसमें एक एक्सक्लूसिविटी होती है. इसलिए आर्टिस्ट इन टूर से भारी रक़म कमा पाते हैं.”
ऐडम कहते हैं कि इस एक्सक्लूसिविटी या अनूठे अनुभव के लिए अधिक पैसा या प्रीमियम भी देना पड़ता है.
इंटरनेट पर स्पॉटीफ़ाय और दूसरे म्यूज़िक स्ट्रीमिंग प्लैटफ़ॉर्मों से भी टूर के आयोजन और जगह चुनने में मदद मिलती है.
इससे पता चलता है कि किन शहरों या देशों में किस आर्टिस्ट का कितना म्यूज़िक स्ट्रीम होता है और कितने सुनने वाले हैं. उसी के आधार पर टूर के पड़ाव और स्थान तय किए जाते हैं.
एक विशाल स्टेडियम में हज़ारों लोगों के साथ कॉन्सर्ट देखने में एक जादूई अहसास होता है. उत्सव जैसा माहौल बनता है जिसमें हम हज़ारों लोगों के साथ मिलकर संगीत का मज़ा लेते हैं.
चलती-फिरती अर्थव्यवस्था
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पॉपी रीड म्यूज़िक जर्नलिस्ट हैं और सिडनी स्थित क्यूरियस मीडिया की संस्थापक भी हैं.
उनका मानना है कि कॉन्सर्ट टूर सभी कलाकारों के बस की बात नहीं है. यह सिर्फ़ वही आर्टिस्ट कर सकते हैं जिनके लाखों-करोड़ों फ़ैन हों.
उनके अनुसार, इस व्यापार में पैसा तो है लेकिन मुनाफ़े का मार्जिन कम है. जिन जगहों पर वे टूर करते हैं वहां के स्थानीय समुदायों को भी इसका आर्थिक लाभ मिलता है.
वह कहती हैं, “बड़े कलाकार बड़ी टीम और तामझाम के साथ आते हैं. जितने दिनों तक वे किसी शहर में रुकते हैं, उस दौरान उस शहर की अर्थव्यवस्था को बड़ा फ़ायदा होता है क्योंकि उनके ठहरने, रहने-खाने और अन्य ज़रूरतों से उस शहर के लोगों को रोज़गार और मुनाफ़े के अवसर मिलते हैं. कई सरकारें तो टेलर स्विफ़्ट, बियॉन्से और कोल्ड प्ले जैसे बैंड से उनके शहर आने की अपील करती हैं.”
कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो, ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला के साथ-साथ चिली और थाईलैंड के राष्ट्र प्रमुखों ने टेलर स्विफ़्ट से उनके देश का टूर करने की अपील की थी.
इससे पता चलता है कि यह मेगा टूर आर्थिक दृष्टि से कितने महत्वपूर्ण हैं. अब इन मेगा टूर में कई उत्पादों को प्रमोट भी किया जाता है जो कि आय का एक और स्रोत है.
पॉपी रीड ने बताया कि कई बड़े ब्रैंड इन आर्टिस्टों के मेगाटूर के साथ जुड़ना चाहते हैं जिससे आर्टिस्टों की और कमाई होती है.
रोचक बात यह भी है कि इन मेगाटूर के समाप्त होने के बाद भी उससे आय ख़त्म नहीं होती बल्कि नए स्रोत निकल आते हैं.
टेलर स्विफ़्ट ने अपने ‘द एराज़’ टूर पर डिज़्नी प्लस के साथ मिलकर 6 हिस्सों में डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म भी बनाई.
पॉपी रीड कहती हैं कि जब टेलर स्विफ़्ट के ‘द एराज़’ टूर की घोषणा हुई और जैसे ही टिकट की बिक्री शुरू हुई तो कई लोगों ने कई सारे फ़ोन और कंप्यूटर पर लॉग इन करके अपने बच्चों के लिए उसके टिकट ख़रीदने की कोशिश की.
कई लोगों ने 200 से 300 डॉलर में टिकट ख़रीदे. कुछ लोग टिकट के लिए 1,000 डॉलर तक ख़र्च करने को तैयार थे.
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पॉपी रीड का मानना है कि इन टूर के आयोजन में बहुत भारी ख़र्च होता है जिसे वसूलने और मुनाफ़ा कमाने के अलावा कलाकारों के पास दूसरा विकल्प नहीं है.
2024 में टेलर स्विफ़्ट के कॉन्सर्ट के 15 करोड़ टिकट बिके थे. फ़ैन्स को यह मेगाटूर इतने पसंद हैं कि कुछ लोग एक आर्टिस्ट के एक से ज़्यादा कॉन्सर्ट देखने के लिए उतावले रहते हैं जबकि एक आर्टिस्ट के दो कॉन्सर्ट में ख़ास फ़र्क नहीं होता.
पॉपी रीड का कहना है जो जुनूनी फ़ैन हैं, उन्हें इससे फ़र्क नहीं पड़ता. “लाइव म्यूज़िक कॉन्सर्ट देखना सुनना इतना यादगार अनुभव होता है कि अगर फ़ैन इस पर अपने ढेर सारे पैसे ख़र्च करना चाहें तो कोई बुरी बात नहीं है.”
तो अब लौटते हैं अपने मुख्य प्रश्न की ओर- म्यूज़िक मेगाटूर भारी मुनाफ़े का स्रोत कैसे बन गए?
डिजिटल टेक्नोलॉजी ने संगीत ख़रीदने सुनने के तरीक़ों को बदल दिया है. अब इंटरनेट पर हमारे पसंदीदा संगीत की कॉपी आसानी से उपलब्ध है और दुकान पर जाकर ख़रीदने की ज़रूरत नहीं पड़ती.
इस बदलाव से संगीत की बिक्री और कलाकारों की आय पर असर पड़ा.
ऐसे में पॉप आर्टिस्ट मेगाटूर के ज़रिए लाइव म्यूज़िक और उसके एक्सक्लूज़िव अनुभव को अपने फ़ैन्स तक पहुंचा रहे हैं जिससे इस उद्योग में पैसा आ रहा है.
जितना शानदार और चकाचौंध करने वाला कॉन्सर्ट हो, पैसे उतने ही ज़्यादा आते हैं.
हमारे एक्सपर्ट की राय है कि फ़ैन अपने पसंदीदा पॉप स्टार्स के साथ जुड़ाव चाहते हैं, उन्हें सामने लाइव गाते हुए देखना चाहते हैं. यही वजह है कि मेगाटूर इतने अधिक सफल हो रहे हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.