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बस्तर में बंदूकें शांत लेकिन जमीन के नीचे बिछा बारूद बना हुआ है खतरा, माओवादी हिंसा की डेडलाइन के बस तीन दिन बाकी

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Mar 29, 2026


जेएनएन, बस्तर। माओवादी हिंसा के पूर्ण सफाए के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा तय की गई 31 मार्च 2026 की डेडलाइन अब बेहद करीब है।

पिछले दो वर्षों में सुरक्षा बल ने माओवादियों को उनके सबसे सुरक्षित किलों से खदेड़ दिया है, लेकिन इस निर्णायक मोड़ पर एक अदृश्य दुश्मन बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है और वह दुश्मन है इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस यानी आइईडी।

बंदूकें तो शांत हो रही हैं, लेकिन जमीन के नीचे बिछा बारूद आज भी सुरक्षाबलों और आम लोगों के लिए खतरा बना हुआ है। माओवादी हिंसा के खात्मे के अभियान से जुड़े पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बस्तर की माटी को पूरी तरह से सुरक्षित बनाना एक लंबी प्रक्रिया होगी। जब तक जमीन के नीचे दबे बारूद का आखिरी टुकड़ा भी निष्क्रिय नहीं हो जाता, तब तक विकास तेजी से नहीं हो सकेगा।

बस्तर के आंकड़ों पर गौर करें, तो वर्ष 2001 से 2026 तक आइईडी ब्लास्ट की 1,277 घटनाएं दर्ज की गईं। इस घातक हथियार ने न केवल 443 जवानों की जान ली, बल्कि 158 आम लोगों को भी अपनी चपेट में लिया।

साल 2010 में आइईडी ने अकेले ही 101 जवानों की जान ले ली थी। राहत की बात यह है कि साल 2026 में अब तक आइईडी से एक भी बलिदान नहीं हुआ है, जो सुरक्षाबलों की चौकसी और नई रणनीति की सफलता को दर्शाता है।

26 वर्षों में कुल 4,580 आइईडी जब्त

माओवादी हिंसा मुक्त बस्तर की राह में सबसे बड़ा रोड़ा यही आइईडी रहा है, लेकिन अब सुरक्षाबलों ने अपनी कार्यप्रणाली बदल दी है। अब फोर्स केवल हमला नहीं करती, बल्कि तकनीक और कुत्तों के जरिए खोजो और निष्कि्रय करो के अभियान पर काम कर रही है। पिछले 26 वर्षों में कुल 4,580 आइईडी जब्त किए गए हैं।

आइईडी मुक्त होंगे बस्तर के गांव- विजय शर्मा

प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा का कहना है कि असली जीत केवल बंदूकें शांत करने में नहीं, बल्कि जमीन को सुरक्षित करने में है। उन्होंने घोषणा की है कि जिस तरह गांवों को ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) बनाया गया था, उसी तर्ज पर अब बस्तर के हर संदेहास्पद रास्ते और पगडंडी को आइईडी मुक्त घोषित करने का अभियान चलाया जाएगा।

पांच वर्षों का रिपोर्ट कार्ड

र्ष-      स्थिति

2022 माओवादियों के कोर क्षेत्रों में नए कैंप स्थापित किए गए।
2023 सुरक्षा बल ने प्रहार अभियान तेज किया।
2024 अबूझमाड़ और बस्तर के भीतरी इलाकों में निर्णायक मुठभेड़।
2025 इस साल रिकार्ड 860 आइईडी बरामद की गई।

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