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साल 2023 की बात है. पंजाब में बरसात के बाद आई बाढ़ से सतलुज नदी के किनारे वाली ज़मीनों में पानी भर गया था, जिससे किसानों की फ़सलों को भारी नुकसान हुआ था.
फ़िरोज़पुर ज़िले के गांव किलचे के रहने वाले जोगिंदर सिंह, गुरमेज़ सिंह और छिंदर सिंह बाढ़ के समय अपना ट्रैक्टर ऊंची जगह पर ले जा रहे थे, तभी सतलुज नदी का तेज़ बहाव उन्हें अपने साथ ले गया.
परिवारों को कोई अंदाज़ा नहीं था कि उनका क्या हुआ. फिर पाकिस्तान से मिली खबरों से पता चला कि वे नदी के तेज़ बहाव में बहकर पाकिस्तान पहुंच गए थे.
परिवार ने स्थानीय नेताओं और अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला.
बाद में दोनों देशों की मंज़ूरी के बाद पाकिस्तान सरकार ने हाल ही में इन तीनों को भारत के हवाले कर दिया.
‘वापसी की उम्मीद भी नहीं बची थी’
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जोगिंदर सिंह ने बताया, “हमारा खेत बॉर्डर के पास है. ट्रैक्टर पानी में फंस गया था. हम उसे निकालने गए तो नदी के तेज़ बहाव में बहते हुए पाकिस्तान पहुंच गए.”
उन्होंने बताया, “वहां कुछ लोगों ने हमें बैठने के लिए कहा और पुलिस को बुलाया गया. पुलिस ने हमारी आंखों पर पट्टी बांधी और हमें अपने साथ ले गई. शुरू के चार–पांच दिन हमारे साथ मारपीट भी हुई और पूछा गया कि क्या हमें पाकिस्तान भेजा गया था.”
“हमने उन्हें बताया कि हमारी ऐसी कोई मंशा नहीं थी. हम सतलुज नदी में बहकर यहां आ गए हैं. जब उन्हें इस बात पर भरोसा हो गया, तो उन्होंने हमें पीटना बंद कर दिया.”
“सबसे पहले हमें कसूर जेल और बाद में लाहौर जेल भेज दिया गया. जेल में हमें अलग रखा जाता था. वहां और भी भारतीय कैदी थे जो कई सालों से जेल की सज़ा काट रहे थे, लेकिन हमें किसी से मिलने नहीं दिया जाता था.”
जोगिंदर ने बताया, “लगभग 15 महीने बाद जज साहब की इजाज़त से हफ़्ते में एक बार घर बात करने का मौका मिला. उसी समय मुझे पता चला कि मेरे पिता की मौत हो चुकी है.”
“हमें कोई उम्मीद नहीं थी कि हम कभी भारत वापस आएंगे, लेकिन एक दिन अचानक हमें बताया गया कि आपको रिहा कर दिया गया है. यह सुनकर हमें बहुत खुशी हुई. हम सरकार का धन्यवाद करना चाहते हैं, जिनकी वजह से हम अपने घर लौट पाए हैं.”
खुशी के मारे दो दिन नींद नहीं आई

जोगिंदर सिंह की पत्नी सरोज रानी ने बताया, “हमें जोगिंदर सिंह और उनके साथियों के सतलुज नदी में बहकर पाकिस्तान पहुंचने के बारे में 25 दिन बाद ख़बरों से पता चला था. उससे पहले हमने उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाई थी.”
“जब हमें यह पता चला तो बहुत दुख हुआ. बच्चे भी रोते रहते थे और स्कूल नहीं जाते थे. घर में कमाने वाला सिर्फ़ जोगिंदर सिंह ही था.”
उन्होंने बताया कि जोगिंदर सिंह फसल कटाई वाली मशीनों पर फोरमैन के तौर पर काम करते हैं. ये तीन भाई हैं और आठ एकड़ ज़मीन की खेती साथ मिलकर करते हैं. तीनों भाई अलग-अलग रहते हैं.
उन्होंने कहा कि घर का गुज़ारा पहले ही मुश्किल से चलता था. बाढ़ के कारण ज़मीन का हिस्सा नदी में बह गया और नदी ने ज़मीन में रास्ता बना लिया. फिर जब पानी आया तो चार एकड़ गेहूं की फसल भी डूब गई.
अपने पति की वापसी के बारे में वह बताती हैं, “हमने गुरुद्वारों, मंदिरों और मस्जिदों में बहुत अरदासें और दुआएं कीं. हमें जोगिंदर सिंह के ज़िंदा होने की कोई उम्मीद नहीं थी, क्योंकि ख़बरों में सिर्फ़ उनकी फोटो ही देखी थी.”
“दो बच्चे प्राइवेट स्कूल में पढ़ते थे. फीस न देने के कारण एक बच्चे का नाम भी काट दिया गया था. अब उनके घर लौट आने से पूरे परिवार में बहुत ख़ुशी है.”

गुरमेज़ सिंह ने कहा, “2023 में हम ट्रैक्टर ऊंची जगह पर ले जाने गए थे, लेकिन उससे पहले ही सतलुज नदी के तेज़ बहाव में बहकर पाकिस्तान पहुंच गए. वहां पहुंचते ही सिविल लोगों ने हमें पकड़ लिया.”
“हमने उनसे गुज़ारिश की कि हमें यहां की पुलिस या मिलिट्री के हवाले कर दिया जाए, ताकि हम अपने घर वापस जा सकें. उन्होंने किसी विभाग को फोन किया और अधिकारी हमारे ऊपर नकाब डालकर ले गए.”
“शुरू में हमारे साथ मारपीट की जाती थी, लेकिन बाद में हमारे बहकर आने की ख़बरें आने के बाद पिटाई बंद कर दी गई. जेल में हमें वही खाना दिया जाता था, जो बाकी कैदियों को मिलता था.”
उन्होंने कहा, “पहले हमें वापस आने की कोई उम्मीद नहीं थी. बाद में जब लौटने की खबर मिली, तो खुशी के मारे दो दिन नींद नहीं आई.”
उन्होंने बताया कि उन्हें बहुत मानसिक तनाव हो गया था और वे हर रोज़ गुरुद्वारे माथा टेकने जाते हैं. उनके जाने के बाद बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई और परिवार के सदस्य भी बीमार पड़े. अब वे अपने बच्चों और परिवार के लिए कुछ करना चाहते हैं और सरकार के आभारी हैं.
गुरमेज़ सिंह की मां मंजीत कौर ने बताया, “हमें अपने बेटे के सतलुज नदी में बह जाने का काफ़ी दिनों बाद पता चला. बेटे के बिना हमारी कोई ज़िंदगी नहीं थी. हम हर रोज़ अरदास करते रहे और बहुत मुश्किल दिन गुज़ारे.”
उन्होंने कहा कि अब वे बहुत खुश हैं और सेहत भी ठीक है. “परमात्मा का शुक्र है कि उसने मेरे बेटे को दूसरी ज़िंदगी दी है.”
‘सब जांच पर निर्भर करता है’

एडवोकेट मेहर सिंह मल्ल ने बताया कि जो लोग बाढ़ में बहकर या किसी और कारण से सीमा पार कर पाकिस्तान पहुंच जाते हैं, वहां की सुरक्षा एजेंसियां उनकी जांच करती हैं. इसके बाद भारत की बॉर्डर सिक्योरिटी फ़ोर्स से संपर्क किया जाता है.
उन्होंने कहा कि जब यह साफ़ हो जाता है कि दूसरे देश में जाने की मंशा जानबूझकर नहीं थी, तो पाकिस्तान उन्हें भारत वापस भेज देता है. वापसी के लिए कोई तय समय नहीं होता- यह सब जांच पर निर्भर करता है.
उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान से लौटने वाले हर व्यक्ति पर भारत में मुक़दमा दर्ज करना ज़रूरी नहीं होता. यह इस बात पर निर्भर करता है कि सीमा जान-बूझकर पार की गई थी या गलती से.
टेलिफ़ोनिक जानकारी के मुताबिक, बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के इंस्पेक्टर दीप सिंह ने कहा, “यह पुराना मामला होने के कारण हमारे पास इसका कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है.”
उन्होंने कहा, “अब इनके वापस आने की हमें सिर्फ़ जानकारी थी. इसके अलावा हमारे पास और कोई जानकारी नहीं है.”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.