बिहार पब्लिक सर्विस कमिशन (बीपीएससी) की प्रीलिम्स परीक्षा फिर से कराने की मांग को लेकर सरकार और छात्रों का बीच टकराव का कोई समाधान नहीं निकल पाया है.
परीक्षा फिर से कराने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था.
पुलिस के इस रुख़ की विपक्षी दलों ने तीखी आलोचना की है. इस बीच सोमवार को आंदोलनकारी छात्रों से बिहार के मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा ने मुलाक़ात की लेकिन छात्रों का कहना है कि उन्हें कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है.
ख़ास करके छात्रों की मांगों और दर्जनों छात्रों के ख़िलाफ़ दर्ज हुई एफ़आईआर वापस लेने पर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला.
जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया है. रविवार को प्रशांत किशोर छात्रों के एक जुलूस का नेतृत्व भी कर रहे थे.
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रशांत किशोर पर आरोप लगाया है कि पुलिस के लाठीचार्ज के दौरान वह प्रदर्शन स्थल से भाग गए थे.
वहीं सत्ताधारी जेडीयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने प्रशांत किशोर का राजनीतिक भगोड़ा कहा है.
इस बीच सोमवार को प्रशांत किशोर ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है कि छात्रों की मांग का मुद्दा सुलझाएं नहीं तो विरोध-प्रदर्शन और तेज़ होगा.
प्रशांत किशोर ने कहा, ”अभी हमारे नौजवानों के भविष्य पर प्राथमिकता से बात होनी चाहिए. बाद में हम राजनीति कर लेंगे.”
छात्रों की मुख्य सचिव से मुलाक़ात से पहले प्रशांत किशोर ने बीपीएससी परीक्षा में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था.
प्रशांत किशोर ने प्रचंड सर्दी में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर नीतीश कुमार की चुप्पी को लेकर भी सवाल उठाया है.
प्रशांत किशोर ने कहा, ”छात्र सर्दी में खुले आसमान के नीचे विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. पुलिस उन पर लाठी चला रही है और नीतीश कुमार चुप हैं. मुख्यमंत्री दिल्ली में अच्छा वक़्त बीता रहे हैं. नीतीश कुमार ने पूरे मामले पर एक शब्द नहीं बोला है.”
अल्टीमेटम को लेकर प्रशांत किशोर ने कहा, ”हम एक जनवरी तरह सकारात्मक नतीजे का इंतज़ार करेंगे. हम बिहार के ब्यूरोक्रेट्स को समय दे रहे हैं कि सीएम से बात कर इसका समाधान निकालें. अगर अगले 48 घंटों में इसका समाधान नहीं निकलता है तो छात्र फिर से विरोध-प्रदर्शन शुरू करेंगे और इससे सड़कें जाम होंगी.”
सोमवार प्रशांत किशोर ने प्रदर्शन स्थल से लाठीचार्ज के दौरान भागने सवाल पर कहा, ”प्रशासन ने आश्वासन दिया है तो हम इंतज़ार कर ले रहे हैं. आंदोलन में हम वीलेन या हीरो बनने नहीं आए हैं. अगर छात्रों को हमने उकसाया है, तो पुलिस गिरफ़्तार कर ले. हम यहीं खड़े हैं. कोई ढाका तो गए नहीं हैं. हम सुरक्षा लेकर चलते नहीं हैं. पटना में ही हैं. हम सात घंटे प्रदर्शन स्थल पर थे. हमने क्या तब चूड़ी पहनी थी? जब हम सात घंटे थे और छात्रों को उकसा रहे थे तो प्रशासन क्या तमाशा देख रहा था?”
प्रशांत किशोर ने कहा, ”अगर हमने उकसाया है तो पुलिस गिरफ़्तार कर ले. तेजस्वी यादव अपने बंगला में बैठे हैं, उन्हें छात्रों की मदद करने से किसने रोका है? नीतीश कुमार उनके चाचा हैं, चाचा से बोलकर छात्रों की मांगे मनवा लें.”
प्रशांत किशोर का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह छात्रों से चेतावनी के अंदाज़ में बात करते दिख रहे हैं. सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल हो रहा है कि कैसे प्रशांत किशोर छात्रों को धमकी दे रहे हैं.
इस वीडियो पर प्रशांत किशोर ने कहा, ”हमलोग रात में दो बजे छात्रों को कंबल देने गए थे. उसी दौरान कुछ लोग उलझ गए. चार लोग वहाँ आकर बैठ जाते हैं और आकर नेता बनने की कोशिश करने लगते हैं. हम तो छात्रों की मदद करने गए थे.”
इसमें वह युवा अपने हाथ पर लगी चोट को दिखाते हुए कह रहा है, ”प्रशांत किशोर हमसे राजनीति खेल गए. प्रशांत किशोर ने कहा था कि पहली लाठी वह खाएंगे लेकिन वह पुलिस की लाठी चलने से पहले ही निकल गए.”
प्रशांत किशोर ने कहा, ”रात में बच्चों ने बताया कि बच्चों को ठंड लग रही है और कंबल नहीं है. हमलोग कंबल लेकर गए थे. उसी दौरान दो लोग नेता बनने की कोशिश कर रहे थे.”
प्रशांत किशोर ने कहा, ”नीतीश कुमार की राजनीति का ये अंतिम दौर चल रहा है. मुख्यमंत्री से मिलने के लिए बच्चे पिछले डेढ़ महीने से दर दर की ठोकरें खा रहे हैं. छात्रों से मिलने में क्या दिक़्क़त है. नीतीश कुमार को लेकर ग़लत सलाह दे रहे हैं. सुशासन बाबू का तमगा पहले ही उनसे ही हट चुका है.”
18 दिसंबर से बिहार की राजधानी पटना में सैकड़ों छात्र बीपीएससी की प्रीलिम्स परीक्षा फिर से कराने की मांग कर रहे हैं. इन छात्रों की मांग है कि सभी 912 परीक्षा केंद्र पर प्रीलिम्स की परीक्षा फिर से हो. यह परीक्षा 13 दिसंबर को हुई थी. बीपीएससी ने पटना के एक सेंटर पर परीक्षा प्रश्न पत्र देरी से बँटने के आरोप के बाद परीक्षा रद्द करने का फ़ैसला किया था.
अमृत लाल मीणा से मिलने गए एक छात्र नेता ने अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस से कहा, ”मुख्य सचिव ने हमारी मांगें ध्यान से सुनीं. हमने उन्हें बताया कि सभी स्टूडेंट्स के लिए राइट टू इक्वालिटी होनी चाहिए. पटना के एक सेंटर के 18,000 अभ्यर्थियों के लिए दोबारा परीक्षा सही नहीं है. वहीं, पटना सेंटर पर कथित उपद्रव के लिए जिन उम्मीदवारों पर प्राथमिकी दर्ज हुई, उसे वापस लिया जाना चाहिए. मुख्य सचिव ने हमारी बातें सुनीं लेकिन हमें कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया.”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.