डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार, 12 जनवरी को मराठी पहचान पर कड़ा रुख अपनाया। बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव से पहले सीएम ने जनता के साथ ही विपक्ष को साफ संदेश दिया कि ‘नगर निकाय का नेतृत्व मराठियों के हाथों में ही रहेगा।’
उद्धव ठाकरे की शिवसेना और राज ठाकरे की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने इस चुनाव में कई बार दावा किया कि मराठी मानुष खतरे में है। इस पर सीएम फडणवीस ने कहा कि मराठी समुदाय का नहीं, बल्कि कुछ राजनीतिक ताकतों का अस्तित्व खतरे में है।
भाषा विवाद पर बोले फडणवीस
बीएमस चुनाव से पहले भाषा-विवाद को लेकर भी खूब राजनीति हो रही है। सीएम देवेंद्र फडणवीस ने इस लेकर चुनावी जनसभा में कहा, ‘स्कूलों में हिंदी और अंग्रेजी पढ़ाने का निर्णय तब ही स्वीकृत हो गया था, जब उद्धव ठाकरे की सरकार थी। हमारी सरकार ने इस निर्णय के अध्ययन के लिए केवल एक समिति का गठन किया है।’
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि ‘उद्धव ठाकरे के कार्यकाल में एक रिपोर्ट आई थी जिसमें सिफारिश की गई थी कि स्कूलों में छात्रों को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाएं पढ़ाई जानी चाहिए। यह रिपोर्ट सितंबर 2021 में प्रस्तुत की गई थी और उद्धव ठाकरे की तत्कालीन कैबिनेट ने 20 जनवरी 2022 को इसे मंजूरी दी थी।’
उद्धव ठाकरे का सरकार पर हमला
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए पिछले तीन वर्षों में मुंबई को बर्बाद करने और अविभाजित शिवसेना द्वारा 25 वर्षों में किए गए कार्यों को नष्ट करने का आरोप लगाया था।