इमेज कैप्शन, छत्रपति संभाजीनगर में मतदान के बाद स्याही हटाने का प्रयास करता एक मतदाता
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई समेत राज्य की 29 नगर निगमों के चुनाव के लिए गुरुवार को मतदान पूरा हो गया. नौ साल बाद हो रहे ये चुनाव सभी राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं.
हालांकि, मतदान के दौरान राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा मतदाताओं को लगाई जाने वाली स्याही रही. दरअसल, इस साल उंगली पर स्याही लगाने की बजाय मार्कर से निशाना बनाया जा रहा है, जिसपर विभिन्न राजनीतिक दलों ने आपत्ति जताई है.
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि कई जगहों पर मार्कर के निशान को सैनिटाइज़र से मिटाकर दोबारा मतदान किया जा रहा है. उधर, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की रूपाली चकांकरने भी कहा है कि मार्कर के निशान को किसी तरल पदार्थ से मिटाया जा रहा है. वहीं कांग्रेस ने भी इस पर आपत्ति जताई है.
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि विपक्ष नतीजों के बाद किसी को दोषी ठहराने की तैयारी कर रहा है. वहीं, राज्य चुनाव आयुक्त दिनेश वाघमारे ने कहा है कि मार्कर पेन से लगने वाली स्याही अमिट है.
मार्कर के निशान को लेकर आरोप क्या हैं?
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इमेज कैप्शन, राज्य चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि अगर कोई व्यक्ति अपनी उंगली से स्याही मिटाकर दोबारा मतदान करने आता है तो उसके ख़िलाफ़ उचित कार्रवाई की जाएगी
इस साल नगरपालिका चुनाव के मतदान में मतदाताओं की उंगलियों पर स्याही के बजाय मार्कर पेन से स्याही लगाई जा रही है.
विपक्ष का दावा है कि इस निशान को नेल पॉलिश रिमूवर, सैनिटाइज़र और कुछ दूसरे तरल पदार्थों से साफ़ किया गया.
मीडिया बात करते हुए एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए. उन्होंने मार्कर के निशान पर भी टिप्पणी की.
राज ठाकरे ने आरोप लगाया, “पहले उंगली पर स्याही लगाई जाती थी. अब वे पेन का इस्तेमाल करते हैं. इस पेन को लेकर हर तरफ़ से शिकायतें आ रही हैं. वोट डालने के बाद बाहर आने पर सैनिटाइज़र लगाकर स्याही हटाई जाती है. स्याही हटाओ, वापस जाओ और दोबारा वोट डालो, यही तरीका है.”
उन्होंने ये भी कहा कि सरकार किसी भी कीमत पर चुनाव जीतना चाहती है और मनमानी करना चाहती है. सरकार विपक्षी दलों को चुनाव लड़ने से रोकने की कोशिश कर रही है.
इसी बीच मुंबई नगर निगम ने स्पष्टीकरण जारी किया है.
दरअसल, कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह कहा गया कि मतदान के बाद उंगलियों पर लगी स्याही को मिटाया जा रहा है. ख़बरों में यह भी कहा गया है कि मुंबई नगर निगम आयुक्त ने इस बात को स्वीकार कर लिया है.
हालांकि, मुंबई नगर निगम ने इस ख़बर का खंडन किया है. नगर निगम ने एक बयान में स्पष्ट किया है कि नगर आयुक्त भूषण गगरानी ने मतदान के बाद उंगलियों से स्याही पोछने के संबंध में कोई बयान नहीं दिया है.
क्या कहना है विपक्षी पार्टियों का?
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इमेज कैप्शन, एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे ने कहा कि सरकार किसी भी कीमत पर चुनाव जीतना चाहती है
राज्य में कांग्रेस, एमएनएस और एनसीपी ने मार्कर के निशान पर सवाल खड़े किए हैं.
कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें नेल पॉलिश रिमूवर से उन्होंने अपनी और अपनी पत्नी की उंगली से मार्कर के निशान को हटाते हुए दिखाया.
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की नेता रूपाली चकनकर का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह धायरी फाटा स्थित एक मतदान केंद्र के सामने अपने कार्यकर्ताओं के साथ खड़ी हैं.
उनके सामने एक पुलिस अधिकारी खड़ा है, जो एक दूसरे व्यक्ति का वीडियो दिखा रहा है जिसमें वह मतदान के बाद अपने हाथ पर लगे मार्कर की स्याही को किसी तरल पदार्थ से पोछ रहा है. वीडियो में रूपाली चकनकर पुलिस अधिकारी से कह रही हैं कि इस स्याही को पोछकर फ़र्ज़ी मतदान किया जा रहा है.
फडणवीस ने कहा- विपक्ष बहाने ढूंढ रहा
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इमेज कैप्शन, देवेंद्र फडणवीस अपनी मां (बीच में) और पत्नी (बाएं) के साथ मतदान के बाद
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपनी मां सरिता फडणवीस और पत्नी अमृता फडणवीस के साथ नागपुर के धरमपेठ क्षेत्र में वोट डाला.
बाद में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने मार्कर के निशान पर लग रहे आरोपों के बारे में भी बात की.
उन्होंने कहा कि मार्कर पेन का इस्तेमाल करना है या किसी और चीज़ का, यह फ़ैसला चुनाव आयोग करता है.
उन्होंने कहा, “मार्कर पेन का इस्तेमाल पहले भी हो चुका है. अगर किसी को कोई आपत्ति है, तो चुनाव आयोग को ध्यान देना चाहिए. वे (विपक्षी दल) नतीजों के बाद किसी को दोषी ठहराने की तैयारी कर रहे हैं. मुझे एक मार्कर पेन भी दिया गया था. मेरी उंगली पर लगी मार्कर पेन की स्याही मिट नहीं रही है.”
चुनाव आयोग का आया बयान
इमेज कैप्शन, राज्य चुनाव आयुक्त दिनेश वाघमारे ने कहा है कि मार्कर पेन से लगने वाली स्याही अमिट है
राज्य में मार्कर की स्याही को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी रहने के बीच चुनाव आयोग ने भी इस मामले पर अपना पक्ष रखा है.
चुनाव आयोग का कहना है कि उंगली से स्याही मिटाने की कोशिश करके मतदाताओं के बीच भ्रम पैदा करने का प्रयास करना एक अपराध है.
राज्य चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि अगर कोई व्यक्ति अपनी उंगली से स्याही मिटाकर दोबारा मतदान करने आता है तो उसके ख़िलाफ़ उचित कार्रवाई की जाएगी.
राज्य चुनाव आयुक्त दिनेश वाघमारे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्याही के मुद्दे पर स्पष्टीकरण दिया है.
उन्होंने कहा, “नगरपालिका चुनावों में मतदान के लिए इस्तेमाल की जा रही मार्कर पेन की स्याही को लेकर काफी भ्रम की स्थिति है. मैं इस बारे में बस इतना ही कहना चाहता हूं कि यह अमिट स्याही है. भारत निर्वाचन आयोग द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली अमिट स्याही भी यही है. बस फर्क इतना है कि यह मार्कर पेन के रूप में है.”
उन्होंने कहा, “इस तरह के मार्कर पेन 2011 से इस्तेमाल में हैं. यह स्याही मिटाई नहीं जा सकती. लगाने के बारह से पंद्रह सेकंड के भीतर यह सूख जाती है. इस स्याही को लेकर संदेह पैदा करने के लिए मतदाताओं में भ्रम फैलाने हेतु वीडियो प्रसारित किए जा रहे हैं.”
राज्य चुनाव आयुक्त ने कहा, “मतदान केंद्रों पर मतदाता प्रतिनिधि मौजूद हैं. वे मतदाताओं की पहचान की पुष्टि भी करते हैं. अगर कोई फ़र्ज़ी वोट डालने आता है, तो मतदाता प्रतिनिधि इसकी शिकायत कर सकते हैं. उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई भी की जाएगी.”
उन्होंने आगे कहा, “मतदाताओं की भी ज़िम्मेदारी है. मतदाताओं को स्याही सूखने से पहले उसे नहीं मिटाना चाहिए. अगर ऐसा हो रहा है, तो यह मतदाताओं की गलती है. अगर कोई जानबूझकर इस तरह की झूठी कहानी फैला रहा है, तो हम उसके ख़िलाफ़ मामला दर्ज करेंगे.”