
बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमन ऑफ़ द ईयर के छठे संस्करण के लिए नॉमिनीज़ की घोषणा हो गई है.
इस साल इसके पांच दावेदार हैं- क्रिकेटर हरमनप्रीत कौर और स्मृति मंधाना, शतरंज खिलाड़ी दिव्या देशमुख, निशानेबाज़ सुरुचि सिंह और एथलीट ज्योति याराजी.
यह पुरस्कार साल 2025 में भारतीय खेल जगत में महिलाओं के योगदान को सम्मानित करने और देश में खेल से जुड़ी सभी महिलाओं की उपलब्धियों का जश्न मनाने के लिए है.
बीबीसी के चुने गए एक पैनल ने इन पांच भारतीय महिला खिलाड़ियों की लिस्ट को तैयार किया है. जूरी में भारत भर के कुछ सबसे अनुभवी और प्रतिष्ठित खेल पत्रकार, विशेषज्ञ और लेखक शामिल हैं.
पहली बार बीबीसी ने एक ग्रैंड जूरी बनाई है, जो विजेताओं का फ़ैसला करेगी. इस ग्रैंड जूरी में टेनिस स्टार लिएंडर पेस, लॉन्ग जंपर अंजू बॉबी जॉर्ज और पैरा एथलीट दीपा मलिक शामिल हैं.
विजेताओं को 16 फ़रवरी को होने वाले एक समारोह में सम्मानित किया जाएगा. समारोह में बीबीसी की जूरी की तरफ से नामांकन हासिल करने वाली तीन अन्य महिला खिलाड़ियों को भी अलग-अलग श्रेणियों में सम्मानित किया जाएगा.
- बीबीसी पैरा स्पोर्ट्सवुमन ऑफ़ द ईयर अवॉर्ड- पैरा स्पोर्ट्स में उत्कृष्टता के लिए दिया जाएगा.
- बीबीसी इमर्जिंग प्लेयर ऑफ़ द ईयर अवॉर्ड- एक युवा खिलाड़ी की उपलब्धियों को पहचान देगा.
- बीबीसी लाइफ़टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड- खेल के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान करने वाली किसी अनुभवी खिलाड़ी के प्रति सम्मान प्रकट करता है.
बीबीसी न्यूज़ की अंतरिम ग्लोबल डायरेक्टर फियोना क्रैक कहती हैं, “इंडियन स्पोर्ट्सवुमन ऑफ़ द ईयर भारत की महिलाओं की खेल में शानदार उपलब्धियों से भरे एक साल को दर्शाता है. बीबीसी वर्ल्ड सर्विस इन प्रयासों को दिखाने और उनका जश्न मनाने में, किसी भी दूसरे मीडिया संस्थान से अलग और अहम भूमिका निभाता है. हमें खुशी है कि हम इन महिलाओं को ऐसा मंच दे पा रहे हैं, जहां वे अपनी मेहनत से हासिल की गई उपलब्धियों को भारत और दुनिया भर के दर्शकों तक पहुंचा सकें.”
इस कार्यक्रम को मैनेज और प्रोड्यूस कलेक्टिव न्यूज़रूम कर रहा है.
कलेक्टिव न्यूज़रूम की एडिटर इन चीफ़ और सह संस्थापक रूपा झा कहती हैं, “अक्सर महिलाओं को शादी, उम्र, शरीर से जुड़े मानकों या दिव्यांगता जैसी वजहों से खेल से दूर रहने के लिए हतोत्साहित किया जाता रहा है. इस साल की संपादकीय थीम, एक बेहद साधारण लेकिन ज़रूरी बात को मज़बूती से सामने रखती है कि सभी खेल सकते हैं क्योंकि खेल सबका है. उसका असली असर सिर्फ़ नतीजों से नहीं, बल्कि सभी को शामिल किए जाने और मिलने वाले मौक़ों से मापा जाना चाहिए. आईएसडब्ल्यूओटीवाई 2026 हर उस महिला के लिए जश्न मनाता है, जिसने मैदान में उतरने की हिम्मत दिखाई और अपनी जगह बनाई.”
बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमन ऑफ़ द ईयर के छठे संस्करण के लिए नॉमिनीज़…
दिव्या देशमुख, चेस ग्रैंडमास्टर

20 साल की शतरंज खिलाड़ी दिव्या देशमुख ने जुलाई में एफआईडीई महिला वर्ल्ड कप जीतने वाली पहली भारतीय और अब तक की सबसे कम उम्र की चैंपियन बनकर इतिहास रच दिया.
इस बड़ी उपलब्धि के साथ उन्हें ग्रैंडमास्टर का दर्जा भी मिला. फ़ाइनल में जब दिव्या ने कोनेरू हम्पी को हराया तो यह एक तरह से अगली पीढ़ी को कमान मिलने जैसा पल था, क्योंकि कोनेरू हम्पी भारत की पहली महिला ग्रैंडमास्टर रही हैं.
2005 में पश्चिमी भारत के शहर नागपुर में जन्मी दिव्या ने महज़ पांच साल की उम्र में शतरंज खेलना शुरू कर दिया था. दो साल के भीतर ही वह अंडर‑7 नेशनल चैंपियन बन गईं और 2017 में उन्होंने लड़कियों की अंडर‑12 कैटेगरी में वर्ल्ड यूथ चेस चैंपियनशिप का ख़िताब अपने नाम किया.
2022 में चेन्नई में हुए चेस ओलंपियाड में भारत की ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली टीम में उनकी अहम भूमिका रही.
इसके दो साल बाद इससे भी बड़ी कामयाबी मिली. इन्डिविजूअल गोल्ड मेडल जीतने के साथ वह उस टीम का हिस्सा रहीं, जिसने पोडियम पर पहला स्थान हासिल किया.
हरमनप्रीत कौर, क्रिकेटर

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने नवंबर में देश को उसका पहला आईसीसी महिला वर्ल्ड कप ख़िताब दिलाया.
घरेलू मैदान पर खेलते हुए उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ सेमीफ़ाइनल में 339 रन के बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए 88 गेंदों पर 89 रनों की ज़िम्मेदारी भरी पारी खेली और टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई.
इससे पहले 2017 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में खेली गई उनकी नाबाद 171 रन की पारी आज भी महिला क्रिकेट की बेहतरीन पारियों में गिनी जाती है.
1989 में पंजाब राज्य में खेल से प्यार करने वाले माता-पिता के घर में जिस दिन हरमनप्रीत का जन्म हुआ, उसी दिन उनके पिता उनके लिए ‘गुड बैटिंग’ लिखी हुई एक टी‑शर्ट ख़रीदकर लाए.
2009 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू करने के बाद से जैसे इस भविष्यवाणी को सच साबित करते हुए वह भारतीय टीम की बल्लेबाज़ी की मज़बूत कड़ी बनी हुई हैं.
उन्हें टाइम मैगज़ीन की 2023 की टॉप 100 इमर्जिंग लीडर्स की सूची और बीबीसी की 100 मोस्ट इंस्पायरिंग वूमेन सूची में शामिल किया गया है.
2017 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया, जो भारत का दूसरा सबसे बड़ा खेल सम्मान है. हरमनप्रीत कौर को हाल ही में पद्म श्री सम्मान से भी नवाजा गया है.
स्मृति मंधाना, क्रिकेटर

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की उपकप्तान स्मृति मंधाना खेल की अब तक की महान खिलाड़ियों में अपनी जगह बनाने की ओर तेज़ी से बढ़ रही हैं.
29 वर्षीय बाएं हाथ की बल्लेबाज़ मंधाना, महिला वनडे क्रिकेट में सबसे ज़्यादा शतक के मामले में दूसरे स्थान पर हैं और मौजूदा खिलाड़ियों में सबसे ज़्यादा रन बनाने के मामले में तीसरे स्थान पर.
पश्चिमी भारत के महाराष्ट्र राज्य के सांगली शहर में जन्मी स्मृति को क्रिकेट खेलने की प्रेरणा अपने पिता और भाई से मिली. वो दोनों ज़िला स्तर पर क्रिकेट खेल चुके हैं.
2013 में अंडर‑19 ज़ोनल टूर्नामेंट खेलते हुए वह लिस्ट-ए मैच में दोहरा शतक लगाने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनी थीं.
पिछले साल सितंबर में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ 50 गेंदों में शतक जड़ा, जो 50 ओवर क्रिकेट में किसी भारतीय खिलाड़ी द्वारा लगाया गया सबसे तेज़ शतक था और उन्होंने विराट कोहली का रिकॉर्ड तोड़ दिया.
उन्हें 2018 और 2021 में दो बार आईसीसी विमेन्स क्रिकेटर ऑफ़ द ईयर चुना गया है. साल 2019 में भारत सरकार ने उन्हें प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया.
सुरुचि सिंह, शूटर

निशानेबाज़ी के शानदार इतिहास वाले राज्य हरियाणा से आने वाली सुरुचि सिंह 2024 में तब सुर्खियों में आईं, जब उन्होंने नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में सात गोल्ड मेडल जीते.
19 साल की उम्र में उन्होंने सीनियर लेवल पर इंटरनेशनल डेब्यू किया और बहुत जल्द खुद को दुनिया के इस मंच पर स्थापित कर लिया.
2025 में उन्होंने ब्यूनस आयर्स, लीमा और म्यूनिख में हुई आईएसएसएफ़ वर्ल्ड कप सिरीज़ में इन्डिविजूअल गोल्ड मेडल जीते और एक दुर्लभ ‘गोल्डन ट्रेबल’ पूरा किया. लीमा में उन्होंने मिक्स्ड टीम इवेंट में भी गोल्ड मेडल जीता.
कज़ाख़स्तान में आयोजित एशियन शूटिंग चैंपियनशिप 2025 में उन्होंने मनु भाकर और पलक गुलिया के साथ मिलकर महिला टीम इवेंट में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता.
सितंबर में वह इंटरनेशनल शूटिंग स्पोर्ट फ़ेडरेशन की 10 मीटर एयर पिस्टल श्रेणी में दुनिया की नंबर‑1 महिला निशानेबाज़ बन गईं.
ज्योति याराजी, एथलीट

ऐसे देश में जहां ट्रैक और फ़ील्ड स्पर्धाओं में शीर्ष स्तर पर उपलब्धियां कम ही रही हैं, ज्योति याराजी 2024 के पेरिस ओलंपिक खेलों में 100 मीटर हर्डल रेस के लिए क्वालिफ़ाई करने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं.
बाधाओं को पार करना दरअसल ज्योति के लिए कभी मुश्किल नहीं रहा. 26 साल की ज्योति सीमित संसाधनों वाले परिवार में पली‑बढ़ी हैं. उनके पिता सिक्योरिटी गार्ड थे और मां घरेलू कामकाज करती थीं.
2022 में उन्होंने 13.23 सेकेंड में 100 मीटर हर्डल रेस पूरी कर राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा. इसके बाद वो कई बार अपना ही रिकॉर्ड तोड़ चुकी हैं.
उन्होंने 2022 के नेशनल गेम्स में भी जबरदस्त प्रदर्शन किया, जहां स्प्रिंट और हर्डल रेस के अलग‑अलग इवेंट्स में कई गोल्ड मेडल जीते. इसके अलावा, उन्होंने वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में ब्रॉन्ज़ और 2022 एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल भी अपने नाम किया.
2023 में ज्योति ने एशियन इंडोर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 60 मीटर हर्डल रेस में गोल्ड मेडल और एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता.
इसके बाद एशिया की शीर्ष बाधा दौड़ धावक के रूप में उनकी पहचान और पक्की हो गई. 2025 में गुमी में हुई एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी उन्होंने 100 मीटर हर्डल रेस में गोल्ड मेडल जीता.
2024 में उन्हें प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमन ऑफ़ द ईयर पुरस्कार की शुरुआत 2019 में भारत की महिला खिलाड़ियों की उपलब्धियों को सम्मानित करने और उनका जश्न मनाने के लिए की गई थी. पहले संस्करण की विजेता बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु थीं.
2020 के संस्करण की विजेता वर्ल्ड चेस चैंपियन कोनेरू हम्पी रहीं, जबकि वेटलिफ़्टर मीराबाई चानू ने 2021 और 2022 में यह पुरस्कार जीता. वहीं, 2024 का पुरस्कार निशानेबाज़ मनु भाकर को मिला.
एथलीट पीटी उषा और अंजू बॉबी जॉर्ज, वेटलिफ़्टर कर्णम मल्लेश्वरी, हॉकी खिलाड़ी प्रीतम सिवाच और क्रिकेटर मिताली राज लाइफ़टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड की पूर्व विजेता रह चुकी हैं.
टेबल टेनिस खिलाड़ी भावना पटेल और निशानेबाज़ अवनी लेखरा बीबीसी इंडियन पैरा‑स्पोर्ट्सवुमन अवॉर्ड से सम्मानित हो चुकी हैं.
क्रिकेटर शेफ़ाली वर्मा, निशानेबाज़ मनु भाकर और तीरंदाज़ शीतल देवी को बीबीसी इमर्जिंग प्लेयर ऑफ़ द ईयर अवॉर्ड मिल चुका है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.