डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि भारत बुरे पड़ोसियों से अपने नागरिकों को बचाने के लिए जो करना होगा, वह करेगा। भारत को आतंकवाद से अपना बचाव करने के अधिकार है और कोई भी यह निर्देश नहीं दे सकता कि वह अपनी रक्षा कैसे करे।
भारत अपनी रक्षा के लिए जो भी आवश्यक होगा, करेगा। आइआइटी मद्रास के टेक्नो-एंटरटेनमेंट फेस्ट शास्त्र-2026 के उद्घाटन के मौके पर जयशंकर ने कहा, ”आपके पड़ोसी बुरे भी हो सकते हैं। दुर्भाग्य से, हमारे हैं। खासकर पश्चिम वाला।

भारत बुरे पड़ोसियों से अपने नागरिकों को बचाने के लिए सब करेगा
अगर कोई देश तय करता है कि वह जानबूझकर, लगातार और बिना पछताए आतंकवाद जारी रखेगा, तो हमें अपने लोगों को आतंकवाद से बचाने का अधिकार है। हम उस अधिकार का इस्तेमाल करेंगे। हम उसका इस्तेमाल कैसे करेंगे, यह हम पर है।
कोई हमें निर्देश नहीं दे सकता कि हमें क्या करना चाहिए या क्या नहीं। हमें अपनी रक्षा के लिए जो भी करना होगा, वह करेंगे।’ विदेश मंत्री ने कहा, ‘कई वर्ष पहले हमने जल बंटवारे की व्यवस्था पर सहमति जताई थी, लेकिन अगर दशकों तक आतंकवाद जारी रहे, तो अच्छे पड़ोसी वाले संबंध नहीं हो सकते।
आप यह नहीं कह सकते कि कृपया मेरे साथ पानी साझा कीजिए, लेकिन मैं आपके विरुद्ध आतंकवाद जारी रखूंगा। यह मुमकिन नहीं है।
पड़ोसी अच्छा है तो करते हैं मदद
बांग्लादेश में अशांति के बारे में पूछे जाने पर जयशंकर ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए ढाका की अपनी हालिया यात्रा के बारे में बात की। उन्होंने कहा, ‘हमें कई तरह के पड़ोसी मिले हैं, अगर आपका कोई पड़ोसी अच्छा है या कम से कम आपके लिए नुकसानदायक नहीं है, तो आपकी स्वाभाविक प्रवृत्ति उसके प्रति दयालु होने व उसकी मदद करने की होती है और एक देश के तौर पर हम यही करते हैं।
भारत के अधिकतर पड़ोसियों को अहसास है कि अगर भारत बढ़ता है, तो हमारे सभी पड़ोसी साथ में बढ़ेंगे। यही संदेश मैं बांग्लादेश भी ले गया था। हम उन्हें आगामी चुनाव के लिए शुभकामनाएं देते हैं और हमें उम्मीद है कि जब हालात सामान्य हो जाएंगे, तो इस क्षेत्र में पड़ोस की भावना बढ़ेगी।’
जयशंकर ने अफगानिस्तान के साथ भारत के दीर्घकालिक सभ्यतागत संबंधों को दोहराया और अफगानियों के सामने आने वाली चुनौतियों को स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि उनकी अपने समकक्ष के साथ सार्थक बातचीत हुई है और उम्मीद जताई कि समय के साथ हालात बेहतर होंगे।
नवंबर में शंघाई एयरपोर्ट पर चीनी अधिकारियों द्वारा अरुणाचल प्रदेश की एक महिला को परेशान किए जाने की खबरों पर जयशंकर ने कहा कि भारत ने इस घटना का औपचारिक रूप से विरोध किया है। उन्होंने कहा, ”अरुणाचल प्रदेश भारत का हिस्सा है और हमेशा रहेगा। इस तरह की चालों से जमीन पर कुछ भी बदलने वाला नहीं है.. भारत बिना किसी दबाव के अपने लोगों और अपनी सुरक्षा की रक्षा करेगा।’

वैक्सीन देने जैसी भावनात्मक चीज नहीं देखी
जयशंकर ने कहा कि कि भारत मानवीय सहायता, विकास में सहयोग और सुरक्षा संबंधी खतरों को दृढ़ता से जवाब के बीच संतुलन बनाकर अपनी पड़ोसी नीति को फिर से तैयार कर रहा है। उन्होंने बताया कि कई पड़ोसी देशों को कोविड वैक्सीन की पहली खेप भारत से मिली और यूक्रेन संघर्ष के दौरान, जब आपूर्ति श्रृंखला बाधित थीं, तब भारत ने खाद्य सहायता भी दी।
विदेश मंत्री ने कहा, ‘अपने पूरे करियर में मैंने वैक्सीन देने से अधिक भावनात्मक असर वाली कोई चीज दुनिया में नहीं देखी। ऐसे लोग भी थे जिनकी आंखों में वैक्सीन की पहली खेप को याद करके आंसू आ गए थे।’ उस समय कुछ पश्चिमी विकसित देशों ने अपनी आबादी से आठ गुना अधिक वैक्सीन स्टाक कर रखी थी और उनके बगल में छोटे देश थे, जिन्हें वे 10,000 डोज भी देने को तैयार नहीं थे।
‘वसुधैव कुटुंबकम’ का बताया संदेश
‘वसुधैव कुटुंबकम’ के संदर्भ में जयशंकर ने कहा, ‘असल में इस शब्द का संदेश क्या है? इसका मतलब है कि हमने दुनिया को कभी भी दुश्मन या खतरनाक माहौल नहीं माना है जिसमें हमें खुद को बचाना पड़े.. अगर आप सीमित संसाधनों के साथ समस्या सुलझाने के मोड में हैं, तो आप अधिक से अधिक असर कैसे डाल सकते हैं?
असल में यही वह समस्या है जिसे हल करना है। आज भारतीय विदेश नीति में, आज भारतीय कूटनीति में हम जो करने की कोशिश करते हैं, वह असल में उस समस्या को हल करना है और हम ऐसा अपनी प्रतिस्पर्धा का इस्तेमाल करके, अपनी ताकतों का इस्तेमाल करके, दूसरे संस्थानों व संभावनाओं का फायदा उठाकर करते हैं।’
उन्होंने कहा, ‘ऐसी बहुत कम पुरानी सभ्यताएं हैं जो आज भी मौजूद हैं और बड़े आधुनिक राष्ट्र बन पाई हैं। हम उनमें से एक हैं। हमें अपने अतीत का अहसास है, जो बहुत कम देशों को होता है।’ विदेश मंत्री ने छात्रों से कहा कि वे भारत को सिर्फ आज के देश के तौर पर नहीं, बल्कि एक ऐसी सभ्यता के तौर पर देखें जो दुनिया के भविष्य को आकार दे रहा है।
(न्यूज एजेंसी ANI के इनपुट के साथ)