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बॉम्बे हाईकोर्ट को फैसला,बर्थ सर्टिफिकेट में सिर्फ मां का नाम दर्ज हो, पिता का नहीं…महिला की याचिका पर मुंबई हाईकोर्ट भी हैरान, जानें फैसला – bombay high court dismisses woman plea to exclude father name from child birth record know all

Byadmin

Apr 3, 2025


मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट में एक महिला ने याचिका दायर कर ऐसी अजीब मांग कर दी, जिसे सुनकर जज भी हैरान हो गए। दरअसल एक महिला ने याचिका दायर कर अपने बच्चे के बर्थ सर्टिफिकेट से अपने पति का नाम पिता के तौर पर दर्ज नहीं करने की डिमांड की थी। महिला का कहना था कि सिर्फ उसका नाम ही सिंगल मदर के तौर पर बर्थ सर्टिफिकेट में दर्ज किया जाए। हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ के जस्टिस मंगेश पाटिल और वाई जी खोबरागड़े ने याचिकाकर्ता को खूब सुनाया, फिर याचिका खारिज करते हुए पांच हजार रुपये का जुर्माना ठोक दिया।
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महिला ने क्या मांग की थी?
38 वर्षीय महिला ने कोर्ट में याचिका दायर कर यह मांग की थी कि औरंगाबाद नगर निगम अधिकारियों को उसके बच्चे के जन्म रिकॉर्ड में सिर्फ मां का नाम दर्ज करने का आदेश दिया जाए। सर्टिफिकेट में उसे सिंगल पैरेंटस के तौर पर शामिल किया जाए और पिता के नाम के बिना बर्थ सर्टिफिकेट जारी किया जाए। महिला ने अपनी बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल अयाचिका में दावा किया कि उसका पति कुछ बुरी आदतों का आदी है और उसने कभी अपने बच्चे का चेहरा भी नहीं देखा है। कोर्ट ने इस मांग को खारिज कर दिया।

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महिला के रवैए पर कठोर टिप्पणी

28 मार्च को दिए गए आदेश में हाई कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि अपने वैवाहिक विवाद में उलझे माता-पिता अपने अहंकार को संतुष्ट करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। माता-पिता में से कोई भी अपने बच्चे के जन्म रिकॉर्ड के संबंध में किसी भी अधिकार का प्रयोग नहीं कर सकता है। पीठ ने आदेश में कहा कि महिला ने जो दावा किया है, उससे स्पष्ट है कि वह अपने बच्चे को प्रॉपर्टी मानती है, जिसके बारे में वह कुछ भी दावा कर सकती है। यह बिल्कुल स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता अपने अहंकार को संतुष्ट करने के लिए बच्चे के हितों की भी परवाह भी नहीं करती है। जबकि बच्चे का भविष्य सबसे महत्वपूर्ण है। यह याचिका सिस्टम का मिसयूज और कोर्ट के कीमती समय की बर्बादी है।

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