डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नीट की परीक्षा के बाद कॉलेज में सीटें पाने के लिए कई स्टूडेंट्स अपनी नागरिकता तक बदलने को तैयार हैं। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने 811 उम्मीदवारों की सूची जारी की है, जिन्होंने 2025-26 में तीसरे राउंड की काउंसलिंग में सफलता हासिल करने के लिए एनआरआई बनने का फैसला किया है।
दरअसल MCC के तीसरे राउंड की काउंसलिंग में एनआरआई उम्मीदवारों को मेडिकल कॉलेज में सीटें आवंटित की जाती हैं। इसकी फीस भी काफी ज्यादा होती है। मगर, इसके बावजूद नीट कॉलेज में सीट पाने के लिए कई उम्मीदवारों ने एनआरआई कोटे का चयन किया है।
NRI कोटा
एनआरआई कोटे में प्रतिस्पर्धा कम होती है, जिसके कारण कट-ऑफ मैनेज करना भी काफी आसान होता है। नीट परीक्षा में कम अंक लाने वाले उम्मीदवारों ने एनआरआई कोटा के तहत सीट पाने के लिए अपनी भारतीय नागरिकता तक छोड़ने का फैसला कर लिया है।
MCC की रिपोर्ट के अनुसार, 811 उम्मीदवारों ने एनआरआई कोटा का चयन किया है।एनआरआई कोटा में दो श्रेणियां होती हैं, पहली उन उम्मीदवारों की जो खुद एनआरआई हैं और दूसरी श्रेणी एनआरआई के नजदीकी रिश्तेदारों की है। पहली कैटेगरी में 113 उम्मीदवार और दूसरी कैटेगरी में 698 उम्मीदवार शामिल हैं।
कितनी होती है कट-ऑफ?
एनआरआई कोटा की पहली श्रेणी में दाखिला लेने वाले उम्मीदवारों का कट-ऑफ महज 10 प्रतिशत है, यानी 800 में से 82 नंबर लाने वाले उम्मीदवारों को इस श्रेणी में दाखिला मिल सकता है। वहीं, दूसरी श्रेणी से सीट पाने वाले उम्मीदवारों का कट-ऑफ 28 (3.5%) अंक है।
NRI कोटे की फीस
एनआरआई कोटा के तहत नीट कॉलेज में दाखिला लेना बेशक आसान है, लेकिन इसके लिए कॉलेजों में मोटी फीस चुकानी पड़ती है। एनआरआई कोटा में पोस्ट ग्रेजुएट्स की फीस 45 लाख रुपये से 95 लाख रुपये तक होती है। ये विश्वविद्यालय और राज्यों पर निर्भर करता है।
वहीं, अगर एनआरआई कोटा में कई सीटें खाली रह जाती हैं, तो इन्हें मैनेजमेंट सीटों में तब्दील कर दिया जाता है, जिनकी फीस काफी हद तक कम होती है।