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भारतीय स्मार्टफोन का बड़ा बाजार बनेगा EU, सस्ते होंगे इलेक्ट्रॉनिक आइटम; आम आदमी को कितना फायदा?

Byadmin

Jan 28, 2026


राजीव कुमार, नई दिल्ली। यूरोपीय यूनियन (ईयू) के साथ व्यापार समझौते पर अमल होने पर ईयू अमेरिका के बाद भारत के लिए सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार बन सकता है। ईयू में फिलहाल भारतीय स्मार्टफोन व अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम के निर्यात पर 14 प्रतिशत शुल्क लगता है।

व्यापार समझौते पर अमल के बाद यह शुल्क शून्य हो जाएगा जिससे ईयू के बाजार में भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम काफी सस्ती हो जाएगी और ईयू के बाजार में चीन, वियतनाम जैसे देशों से आने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम से भारतीय आइटम आसानी से प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।

14% शुल्क हटने से भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स होंगे सस्ते

गत मंगलवार को भारत व ईयू के बीच व्यापार समझौते की सफल वार्ता पूरी होने पर आगे की प्रक्रिया के लिए हस्ताक्षर किए गए।

इंडियन सेलुलर इलेक्ट्रानिक्स एसोसिएशन का अनुमान से ईयू के साथ व्यापार समझौते से वर्ष 2035 तक भारत का ईयू में होने वाल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 100 अरब डालर तक पहुंच सकता है।

वर्तमान में ईयू के बाजार में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 12 अरब डालर का है और इनमें से 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी स्मार्टफोन की है।

2035 तक ईयू निर्यात 100 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान

ईयू सालाना 750 अरब डालर के इलेक्ट्रानिक्स आइटम का आयात करता है और इस हिसाब से ईयू के बाजार में भारतीय इलेक्ट्रानिक्स आइटम के निर्यात को बढ़ाने की पूरी गुंजाइश है और शुल्क में 14 प्रतिशत तक की कटौती से इसमें मदद मिलेगी।

अभी भारत में बनने वाले आईफोन का सबसे अधिक निर्यात अमेरिका में होता है। औद्योगिक संगठनों का कहना है कि ईयू में 27 देश हैं और इनसे जुड़े कई देशों की प्रति व्यक्ति आय 30 हजार डालर से अधिक है। इसलिए ईयू में एपल के आईफोन बिक्री बढ़ने की पूरी संभावना है।

भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और निवेश को बढ़ावा मिलेगा

जानकारों का कहना है कि ईयू के साथ व्यापार समझौता होने से दूसरे देशों की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां और अधिक भारत में निवेश करना चाहेंगी।

क्योंकि उन्हें अब यूरोप की बाजार दिख रहा है। जापान, ताइवान की कंपनियां भारत में लैपटाप लेकर अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम के लिए अलग से निवेश कर सकती है।

इस समझौते से इलेक्ट्रानिक्स आइटम बनाने वाली भारतीय कंपनियों को कच्चे माल भी कम दाम पर मिल सकेंगे। ईयू इलेक्ट्रानिक्स आइटम के पा‌र्ट्स का सप्लायर है, लेकिन अभी ईयू से उन्हें आयात करने पर शुल्क देना पड़ता है।

समझौते पर अमल के बाद यह शुल्क समाप्त हो जाएगा जिससे इलेक्ट्रानिक्स मैन्यूफैक्चरिंग की लागत कम हो जाएगी। अभी इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम के कच्चे माल के लिए भारत मुख्य रूप से चीन पर निर्भर करता है।

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